डच जासूसों ने जेरेड कुशनर का फोन कैसे हैक किया? 2020 में कुशनर को फोन बदलने की दी गई थी सलाह
डच खुफिया एजेंसी ने 2018 में जेरेड कुशनर का आईफोन हैक करने का दावा किया है. रिपोर्ट में 2 अरब डॉलर के लेनदेन का जिक्र है. कुशनर ने आरोप खारिज किए, दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर के फोन की जासूसी को लेकर बड़ा दावा सामने आया है. अमेरिकी खोजी पत्रकार मैथ्यू कोल की आने वाली किताब के एक अंश के मुताबिक, नीदरलैंड की सैन्य खुफिया एजेंसी MIVD ने 2018 में कुशनर के आईफोन तक पहुंच बना ली थी. एजेंसी कथित तौर पर उनके फोन की स्क्रीन पर दिखने वाली गतिविधियों को देख सकती थी. इस तरह उसे कुशनर के एक ऐसे बैंक खाते की जानकारी मिली, जिसमें करोड़ों डॉलर आने का दावा किया गया है. कुशनर ने सभी आरोपों को खारिज किया है. साल 2020 में जेफ बेजोस के फोन पर सऊदी से साइबर अटैक हुआ था. उस समय कुशनर को फोन बदलने की सलाह दी गई थी. आइए जानते हैं कुशनर का फोन कैसे हैक हुआ..

1. रूसी हैकर से शुरू हुई जासूसी की कहानी
पत्रकार मैथ्यू कोल के मुताबिक, 2017 के आखिर में नीदरलैंड की सैन्य खुफिया एजेंसी को पता चला कि रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी GRU से जुड़ा एक हैकर जासूसी के मिशन पर ब्रिटेन जा रहा है. यह हैकर चोरी किए गए बैंक डेटा से जुड़े काम के लिए जाना जाता था.
नीदरलैंड की एजेंसी ने ब्रिटेन से उसे हिरासत में लेने की अनुमति मांगी. ब्रिटिश अधिकारियों ने सहमति दे दी. इसके बाद रूसी हैकर के सामने दो विकल्प रखे गए. नीदरलैंड की एजेंसी के लिए काम करे या ब्रिटेन में जासूसी के आरोप में मुकदमे और जेल का सामना करे. उसने नीदरलैंड की एजेंसी के साथ काम करना चुना.
इसके बाद उसने रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी के एक संवेदनशील कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच दिलाई. रूस के रोस्तोव शहर में मौजूद एक सर्वर की जांच के दौरान डच अधिकारियों को कुशनर के आईफोन के स्क्रीनशॉट मिले. इससे उन्हें पता चला कि रूसी हैकर पहले ही उनके फोन तक पहुंच बना चुके थे.
2. आईफोन X की सुरक्षा में मिली कमजोरी
कुशनर उस समय आईफोन X इस्तेमाल कर रहे थे. यह फोन नवंबर 2017 में बाजार में आया था और इसमें Face ID की सुविधा थी. इसके जरिए चेहरा पहचानकर फोन खोला जा सकता था. मैथ्यू कोल की रिपोर्ट के मुताबिक, डच एजेंसी ने रूसी हैकरों के तरीके को समझने की कोशिश की. जांच के दौरान उसे फोन की सुरक्षा में एक ऐसी कमजोरी मिली, जिसका इस्तेमाल करके फोन तक पहुंच बनाई जा सकती थी. 2018 की शुरुआत तक एजेंसी इस तरीके को समझ चुकी थी.
हालांकि, इस पहुंच की कुछ सीमाएं थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, डच अधिकारी फोन का माइक्रोफोन या कैमरा चालू नहीं कर सकते थे और न ही उसमें फाइलें डाल या निकाल सकते थे. लेकिन जब भी कुशनर फोन इस्तेमाल करते, एजेंसी उनकी स्क्रीन पर दिखाई देने वाली गतिविधियों को देख सकती थी. वह स्क्रीन के चित्र अपने कंप्यूटर सर्वर पर जमा करती थी. यानी इस मामले में फोन की सुरक्षा तोड़ी गई, लेकिन रिपोर्ट में बताए गए तरीके से जासूसों को फोन के हर हिस्से पर पूरा कंट्रोल नहीं मिला था.
3. फोन पर दिखा बैंक खाता और करोड़ों डॉलर का लेनदेन
रिपोर्ट के मुताबिक, फोन की स्क्रीन देखते हुए डच अधिकारियों ने पाया कि कुशनर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई स्थित एक बैंक खाते में लॉग इन कर रहे थे. इस खाते में अजरबैजान के एक बैंक से सैकड़ों मिलियन डॉलर आने का दावा किया गया.
मैथ्यू कोल की किताब में इस खाते को अल्फा नाम दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह खाता UAE के First Abu Dhabi Bank में था. इसमें 2017 से सऊदी अरब और UAE के शाही परिवारों की ओर से करीब 75 करोड़ डॉलर आने का दावा है. खाते की निगरानी UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के भाई और बैंक के चेयरमैन तहनून बिन जायद से जुड़ी बताई गई है. किताब के अनुसार, इस पैसे का इस्तेमाल मध्य-पूर्व में राजनीतिक और कूटनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जाना था.
किताब में एक दूसरे खाते का भी जिक्र है, जिसे बीटा नाम दिया गया है. इसमें करीब 1 अरब डॉलर होने और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से जुड़े लेनदेन का दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह पैसा इजराइल में एक खाते तक पहुंचा था. दोनों खातों को मिलाकर कम से कम 2 अरब डॉलर की रकम का दावा किया गया है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यह भी साबित नहीं है कि पूरी रकम कुशनर की निजी संपत्ति थी.

4. बेजोस का फोन और सऊदी अरब का पुराना विवाद
जनवरी 2020 में खबर आई थी कि बेजोस के आईफोन में मई 2018 में वॉट्सऐप के जरिए भेजी गई एक वीडियो फाइल से जासूसी करने वाला सॉफ्टवेयर पहुंचा हो सकता है. यह संदेश सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के खाते से भेजे जाने का दावा था. हालांकि, जांच में फोन में मैलवेयर मिलने का सबूत नहीं मिला था.
इसी मामले के बाद संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ एग्नेस कैलामार्ड ने जनवरी 2020 में कुशनर समेत उन लोगों को फोन बदलने और सुरक्षा जांच कराने की सलाह दी थी, जो क्राउन प्रिंस के नियमित संपर्क में थे. उस समय यह सलाह संभावित खतरे के आधार पर थी.
5. कुशनर ने क्या कहा और क्या अब तक साबित है?
कुशनर ने 22 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर आरोपों को पूरी तरह गलत बताया. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में बैंक स्टेटमेंट, पैसे भेजने के रिकॉर्ड, खाते के नंबर या लेनदेन की तारीखें जैसे सत्यापित सबूत नहीं दिए गए हैं. उनके वकील ने भी आरोपों को झूठा बताया और कानूनी कार्रवाई की बात कही. व्हाइट हाउस ने भी किताब के दावों को खारिज किया. दूसरी ओर, नीदरलैंड की सैन्य खुफिया एजेंसी ने NOS से कहा कि वह अपने काम करने के तरीकों, जानकारी और सूत्रों पर टिप्पणी नहीं करती.
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