दुनिया पर 34,675 लाख करोड़ रुपये का कर्ज, ब्याज चुकाने में खर्च हो रहे हैं अरबों रुपये; फ्रांस से भारत तक कितना बड़ा है बोझ?
फ्रांस में बॉन्ड यील्ड 5% तक पहुंच गई है. जानिए अमेरिका, चीन, भारत समेत बड़े देशों पर कितना कर्ज है और ब्याज का बोझ कैसे बढ़ रहा है.
दुनिया के देशों पर 34,675 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है और इस पर ब्याज चुकाने का बोझ लगातार बढ़ रहा है. यूरोप में सरकारों की आर्थिक नीतियों, सरकारी खर्च में कटौती और आम लोगों पर बढ़ते दबाव को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. फ्रांस में भी बढ़ते सरकारी कर्ज और बजट घाटे के बीच उधारी महंगी हुई है. अक्टूबर 2026 में फ्रांस के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 5% तक पहुंच गई, जबकि जर्मनी में यह 3.41% थी. यानी फ्रांस को कर्ज लेने के लिए जर्मनी के मुकाबले ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है.
अलजरीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कुल कर्ज में सरकारों के साथ कंपनियों और परिवारों की उधारी भी शामिल है. अमेरिका पर करीब 3,933 लाख करोड़ रुपये और जापान पर 826.5 लाख करोड़ रुपये का सरकारी कर्ज है. विकसित देशों का सालाना सरकारी बॉन्ड ब्याज बिल 313.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. ब्याज चुकाने में ज्यादा पैसा खर्च होने से सरकारों के पास स्वास्थ्य, शिक्षा, पेंशन और दूसरी वेलफेयर स्कीम्स के लिए कम पैसा बच सकता है.
सरकार लोन कैसे लेती है?
सरकारें अपनी कमाई यानी टैक्स और दूसरे स्रोतों से मिलने वाले पैसे के अलावा सरकारी बॉन्ड जारी करके भी कर्ज लेती हैं. जब सरकार को सड़क, रेलवे, अस्पताल, रक्षा और दूसरी योजनाओं पर खर्च करने के लिए पैसों की जरूरत होती है, तो वह बॉन्ड के जरिए बैंक, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड और दूसरे निवेशकों से पैसा जुटाती है. उदाहरण के लिए, सरकार 10 साल का बॉन्ड जारी करती है और कोई निवेशक उसे 100 रुपये में खरीदता है, तो इसका मतलब है कि उसने सरकार को 100 रुपये का लोन दिया है. इसके बदले सरकार तय शर्तों के मुताबिक ब्याज देने और अवधि पूरी होने पर मूल रकम लौटाने का वादा करती है.
मान लीजिए, सरकार ने 100 रुपये का बॉन्ड 2.5% सालाना ब्याज दर पर जारी किया है. ऐसे में सरकार निवेशक को हर साल 2.50 रुपये ब्याज देगी. 10 साल में कुल 25 रुपये ब्याज देने के बाद अवधि पूरी होने पर 100 रुपये की मूल रकम भी वापस कर देगी. हालांकि, सरकार का कर्ज हमेशा नई योजनाओं पर खर्च नहीं होता, बल्कि पुराने कर्ज की रकम चुकाने के लिए भी नया कर्ज लेना पड़ सकता है. सरकार को कर्ज पर कितना ब्याज देना होगा, यह बाजार की ब्याज दरों, महंगाई, निवेशकों की मांग और बॉन्ड की शर्तों पर निर्भर करता है.

क्या होता है जब कर्ज लेना महंगा हो जाता है?
जब बॉन्ड की कीमतें गिरती हैं, तो उनकी यील्ड यानी निवेश पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ जाता है. इससे सरकारों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है. ऐसे में सरकार को ब्याज चुकाने पर ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है, जिससे स्कूल, अस्पताल और सड़कों जैसी जरूरी सेवाओं पर खर्च करने के लिए कम पैसा बचता है. यह ठीक वैसा ही है, जैसे होम लोन की ब्याज दर बढ़ने पर किसी परिवार की EMI का बोझ बढ़ जाता है.
यूरोप की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरें 2000 के दशक की शुरुआत के बाद से 5% तक नहीं पहुंची थीं. 2010 से 2012 के यूरोजोन कर्ज संकट के दौरान ग्रीस, इटली और स्पेन जैसे आर्थिक संकट से जूझ रहे देशों को इतनी या इससे ज्यादा दरों पर कर्ज लेना पड़ा था. आयरलैंड और पुर्तगाल में बॉन्ड की यील्ड 7% से ऊपर जाने के बाद उन्हें बेलआउट पैकेज लेना पड़ा था. अब फ्रांस को 10 साल के लिए कर्ज लेने पर करीब 5% ब्याज देना पड़ रहा है, जबकि जर्मनी की दर 3.41% है. फ्रांस की बढ़ती दर बताती है कि निवेशक उसे कर्ज देने के बदले ज्यादा रिटर्न मांग रहे हैं. अब फ्रांस की बॉन्ड यील्ड इटली और ग्रीस से भी ज्यादा है. ब्रिटेन में यह दर फ्रांस से ऊपर है.
| देश | सरकारी कर्ज (ट्रिलियन डॉलर) | सरकारी कर्ज (लाख करोड़ रुपये) |
| अमेरिका | 41.4 | 3,933 |
| चीन | 22.5 | 2,137.5 |
| जापान | 8.7 | 826.5 |
| ब्रिटेन | 4.4 | 418 |
| फ्रांस | 4.2 | 399 |
| इटली | 3.7 | 351.5 |
| जर्मनी | 3.5 | 332.5 |
| भारत | 3.4 | 323 |
| कनाडा | 2.9 | 275.5 |
किस देश पर कितना कर्ज है?
दुनिया में सबसे ज्यादा सरकारी कर्ज अमेरिका पर है, जो करीब 3,933 लाख करोड़ रुपये है. इसके बाद चीन पर 2,137.5 लाख करोड़ रुपये और जापान पर 826.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है. ब्रिटेन पर करीब 418 लाख करोड़ रुपये, फ्रांस पर 399 लाख करोड़ रुपये और इटली पर 351.5 लाख करोड़ रुपये का सरकारी कर्ज है. वहीं, जर्मनी पर 332.5 लाख करोड़ रुपये, भारत पर 323 लाख करोड़ रुपये, कनाडा पर 275.5 लाख करोड़ रुपये और ब्राजील पर 247 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है.
भारत पर कर्ज उसकी अर्थव्यवस्था के आकार के मुकाबले भी अहम है. IMF के 2026 के अनुमान के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारों का कुल कर्ज GDP का 83.4% है. हालांकि, ज्यादा कर्ज का मतलब अपने आप आर्थिक संकट नहीं है. उदाहरण के लिए, जापान पर कर्ज उसकी GDP का करीब 199% है, जबकि भारत के लिए यह आंकड़ा 83.4% है. वहीं, अमेरिका पर कर्ज GDP का 127% और फ्रांस पर 118% है. किसी देश की वित्तीय स्थिति का आकलन सिर्फ कुल कर्ज से नहीं, बल्कि ब्याज चुकाने की क्षमता, सरकार की कमाई, आर्थिक विकास और कर्ज की लागत से भी किया जाता है.




