आतंकवादी है…लोग ताना मारते थे, मुंबई ट्रेन विस्फोट केस में रिहा आरोपी के भाई का छलका दर्द

आतंकवादी है…लोग ताना मारते थे, मुंबई ट्रेन विस्फोट केस में रिहा आरोपी के भाई का छलका दर्द

मुंबई हाईकोर्ट ने 11 जुलाई 2006 को मुंबई में कई ट्रेन में किए गए सात बम धमाकों के मामले में सोमवार को सभी 12 आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है.

मुंबई की कई ट्रेनों में 11 जुलाई 2006 को हुए सिलसिलेवार विस्फोट मामले में मुंबई हाईकोर्ट द्वारा बरी किए गए 12 लोगों में से चार को सोमवार शाम अमरावती केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया. उनमें से एक सुहैल शेख ने कहा कि वह बेकसूर था. उसे न्यायपालिका और सरकार पर पूरा भरोसा था.

वहीं बरी किए गए आरोपी सोहेल शेख के भाई राहिल शेख ने कहा कि हमने सारी उम्मीदें खो दी थीं. हम जहां भी जाते थे, हमें प्रताड़ित किया जाता था. लोग हमें ताना मारते थे, कहते थे कि वे आतंकवादी हैं. लेकिन हमें यकीन था कि अंत में सच्चाई की जीत होगी. सूत्रों ने अन्य तीन की पहचान तनवीर अहमद मोहम्मद इब्राहिम अंसारी, मोहम्मद मजीद शफी और जमीर अहमद लतीफुर रहमान शेख के रूप में की है. ये चारों 2015 से अमरावती जेल में थे.

‘बम ब्लास्ट से हमारा कोई लेना-देना नहीं’

सुहैल शेख ने कहा कि लगभग 19-20 साल (जेल में) बिताने के बाद आज हम रिहा हो रहे हैं. हमें हुकूमत (सरकार), कोर्ट पर पूरा भरोसा है और इसी भरोसे ने हमारे लिए काम किया. इस मामले से हमारा कोई लेना-देना नहीं था. हमें सत्र अदालत से ही रिहा कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन हमें हाईकोर्ट ने रिहा कर दिया है. हम सरकार, न्यायाधीशों और हमारे लिए लड़ने वाले वकीलों की टीम का शुक्रिया अदा करते हैं.

रिहाई के बाद किया शुक्रिया

उसने कहा कि मुझ पर सिमी (प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया) से संबंध रखने का आरोप लगाया गया था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं था. यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार से उसकी कोई मांग है, उसने कहा कि उनकी कोई मांग नहीं है. शेख ने कहा कि मैं बस सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं.

11 जुलाई 2006 को कई ट्रेनों में ब्लास्ट

मुंबई हाईकोर्ट ने 11 जुलाई 2006 को मुंबई में कई ट्रेन में किए गए सात बम धमाकों के मामले में सोमवार को सभी 12 आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है और यह विश्वास करना कठिन है कि आरोपियों ने यह अपराध किया है. यह फैसला शहर के पश्चिमी रेलवे नेटवर्क को हिला देने वाले आतंकवादी हमले के 19 साल बाद आया है. इस हमले में 180 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे.