Shashi Kapoor Birth anniversary: कभी शशि कपूर का घंटों इंतजार करते थे अमिताभ बच्चन…सुपरहिट जोड़ी की दिलचस्प कहानी

Shashi Kapoor Birth anniversary: कभी शशि कपूर का घंटों इंतजार करते थे अमिताभ बच्चन…सुपरहिट जोड़ी की दिलचस्प कहानी

Shashi Kapoor & Amitabh Bachchan Films: बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि अमिताभ बच्चन संघर्ष के दिनों शशि कपूर से मिलने के लिए घंटों तक इंतजार किया करते थे. लेकिन बाद में ऐसा भी समय आया जब फिल्मी पर्दे पर शशि कपूर और अमिताभ बच्चन की सबसे कामयाब जोड़ी बनी. शशि कपूर कितने उदार और जिम्मेदार कलाकार थे, जानते हैं.

शशि कपूर भी कई मायने में एक धुरंधर कलाकार थे. जितने रोमांटिक दिखते थे, अंदर से उतने ही मजबूत इरादों से लैस इंसान थे. कपूर खानदान में उनकी छवि एकदम अलग थी. आग और आवारा जैसी फिल्मों में राज कपूर के बचपन का रोल निभाने वाले शशि कपूर के बारे में कई ऐसी बातें विख्यात हैं, जो उनकी शख्सियत को एकदम अलहदा बनाती हैं. जिस तरह हंसने के समय दांतों की अनोखी बनावट और गालों के डिंपल उनके चेहरे को निखार प्रदान करते हैं, कुछ उसी तरह उनके फिल्मी किरदार उनकी पहचान में अलग चमक बिखेरते हैं. कपूर खानदान में राज कपूर की छाप से दूर होना आसान नहीं था लेकिन शशि कपूर ने नई पहल और प्रयोग किए और इसमें उनको कामयाबी भी मिली. लिहाजा अलग छवि बनाने में सफल हुए.

आज हम यहां शशि कपूर की शख्सियत के उन पहलुओं को रेखांकित करने का प्रयास कर रहे हैं, जो उनको एक महान अभिनेता, निर्देशक और इंसान बनाते हैं. चाहे अमिताभ बच्चन के साथ बनी उनकी सुपरहिट जोड़ी हो या कि कला फिल्मों को प्रोत्साहित करने का गंभीर इरादा. कपूर खानदान में राज कपूर एक बड़े शो मैन कहलाए. आरके बैनर और बरसात, आवारा, श्री420, जागते रहो, जिस देश में गंगा बहती है, मेरा नाम जोकर, सत्यम शिवम सुंदरम जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने सामाजिक जागरुकता और रोमांटिसिज्म को जिस लोकप्रिय शैली में प्रस्तुत किया, उसका नॉस्टेल्जिया आज भी दिलों पर दस्तक देता है.

फकीरा की तरह अकेला ही चले शशि कपूर

शशि कपूर ने इन्हीं के बीच से अपने लिए एक नई राह चुनी. सत्यम शिवम सुंदरम में जीनत अमान के साथ स्क्रीन शेयर करने से पहले ही जब जब फूल खिले, कन्यादान, शर्मीली या फिर फकीरा जैसी फिल्मों से घर-घर में चहेते स्टार कलाकार बन चुके थे. इन सभी फिल्मों में शशि कपूर सोलो हीरो थे. ये सभी फिल्में सफल कहलाती हैं. हालांकि तब शशि कपूर के लिए सबसे बड़ी चुनौती खुद शम्मी कपूर थे. फकीरा फिल्म का एक मशहूर गाना है- फकीरा चल चला चल, अकेला चल चला… वाकई शशि कपूर आगे अपने फिल्मी सफर में अकेले ही चले और अपने दम पर अपने मन के मुताबिक मंजिल हासिल की.

शशि कपूर की फिल्मोग्राफी देखें तो सोलो हिट के साथ-साथ उनकी कई ऐसी मल्टीस्टारर फिल्में भी हैं, जिनमें उनकी भूमिका काफी अहम नजर आती हैं. उन्हें मल्टीस्टारर या फिर आगे चलकर अमिताभ बच्चन के को-स्टार बनने में कोई संकोच नहीं हुआ. जबकि अमिताभ बच्चन के आगमन से भी पहले शशि कपूर बड़े स्टार के तौर पर जाने जाते थे. कपूर खानदान का रुतबा था. शशि कपूर को अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर करने में कभी कोई ईगो नहीं हुआ था. ना ही उनमें रेस की कोई भावना पनपी. अमिताभ बच्चन के साथ उनकी कई सुपरहिट फिल्में हैं. दोनों गहरे दोस्त बन रहे.

Amitabh Shashi In Deewar Film

तब शशि कपूर से मिलने जाते थे अमिताभ बच्चन

शशि कपूर कितने मिलनसार, नई प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और कला सिनेमा को बढ़ावा देने वाले कलाकार थे, उसके कुछ नजीर पेश हैं. अमिताभ बच्चन के साथ दोस्ती की बड़ी ही अनोखी कहानी है. बात उन दिनों की है, जब अमिताभ बच्चन इंडस्ट्री में भाग्य आजमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स के घर और दफ्तर दस्तक देते थे. उसी क्रम में वो शशि कपूर के पास भी जाते थे. घंटों उनका इंतजार करते थे. और जब शशि कपूर बाहर निकलते थे तो हताश-निराश अमिताभ बच्चन के कंधे पर हथेली थपथपा कर करते- तुम्हारा टाइम आएगा यंग मैन. इतना बोल कर आगे बढ़ जाते. अमिताभ पीछे से उनको देखते रहते थे. शायद सोचते- ना जाने वह टाइम कब आएगा!

दीवार फिल्म से अमिताभ-शशि की जोड़ी हिट

हालांकि वह टाइम आया, जब अमिताभ बच्चन जंजीर से स्टार बने. इसी के साथ यश चोपड़ा की दीवार में दोनों को साथ-साथ काम करने का मौका मिला. हालांकि इससे एक साल पहले रोटी कपड़ा और मकान में भी अमिताभ बच्चन और शशि कपूर थे लेकिन वह फिल्म पूरी तरह से मनोज कुमार की थी. दीवार में जब दोनों भाई बनकर आए, एक सीन में दोनों के बीच तकरार हुई और जब शशि कपूर का आइकॉनिक डायलॉग आया- ‘मेरे पास मां है’ तो यह जोड़ी रातों रात सुपरहिट हो गई. यश चोपड़ा का फॉर्मूला हिट हो गया.

आगे चलकर कभी कभी, सुहाग, त्रिशूल, काला पत्थर, सिलसिला, शान, नमक हलाल में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की जोड़ी कभी भाई तो कभी दोस्त के दौर पर बार-बार देखने को मिली. यश चोपड़ा ने इस कामयाब जोड़ी को कई बार रिपीट किया. गौर करने वाली बात ये है कि शशि कपूर के रहते भी इन सभी फिल्मों में अमिताभ बच्चन लीड हीरो रहे. इन फिल्मों की कामयाबी अमिताभ बच्चन के नाम दर्ज हैं. शशि कपूर यहां को-स्टार हैं. कितना दिलचस्प है कि जो कलाकार एक दिन शशि कपूर के पास काम के सिलसिले में जाता था, वह बाद में लीड हीरो बना और शशि कपूर उसके को-स्टार. लेकिन उससे भी बड़ी बात ये कि शशि कपूर ने अमिताभ के साथ हर रोल को शिद्दत से किया.

कमर्शियल फिल्मों से कमाते थे, कला सिनेमा में लगाते थे

अमिताभ के साथ जोड़ी के अलावा कला सिनेमा को आगे बढ़ाने में शशि कपूर के योगदान की चर्चा किए बगैर उनकी शख्सियत की बात पूरी नहीं होती. शशि कपूर ऐसे कलाकार थे जिनके बारे में यह तथ्य भी विख्यात है कि वह कमर्शियल फिल्मों से जो कमाई करते थे, उसे कला सिनेमा की धारा को आगे बढ़ाने में खर्च करते थे. उन्होंने कलयुग, जुनून, 36 चौरंगी लेन, उत्सव जैसी फिल्में बनाईं. शशि कपूर कलयुग के निर्माता थे. निर्देशन श्याम बेनेगल ने किया था. इसमें खुद शशि कपूर के अलावा रेखा और राज बब्बर ने अभिनय किया था. शबाना आजमी, जेनिफर केंडल और नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकारों के साथ उन्होंने जुनून बनाई थी, जिसकी कहानी 1857 के विद्रोह के ईर्द-गिर्द की थी. शशि कपूर इसमें पठान जावेद खान बने थे.

वहीं आजादी के बाद एंग्लो इंडियन परिवार की जिंदगी और जिजीविषा को केंद्र में रखकर उन्होंने 36 चौरंगी लेन प्रोड्यूस की, जिसे अपर्णा सेन ने निर्देशित किया था. कला फिल्में, थिएटर और साहित्य के लिए शशि कपूर के दिल में बहुत सम्मान का भाव था. यही वजह है कि उन्होंने शूद्रक के प्रसिद्ध नाटक मृच्छकटिकम को आधार बनाकर उत्सव फिल्म बनाई, जिसका निर्देशन गिरीश कर्नाड ने किया था. फिल्म में रेखा के साथ शेखर सुमन जैसे नए कलाकार थे. शेखर सुमन को इस फिल्म के बाद पहचान मिली.

न्यू डेल्ही टाइम्स में संपादक का यादगार रोल

इसके अलावा अपने दम पर पिता पृथ्वीराज कपूर की थिएयर की विरासत को आगे बढ़ाया. अपनी पत्नी जेनिफर कैंडल के सहयोग से पृथ्वी थियेटर का पुनरुद्धार किया. जिसे बाद में उनकी बेटी संजना कपूर और आगे ले गईं, उसे देश भर की रंग गतिविधियों से जोड़ा. शशि कपूर को मर्चेंट आइवरी की अंग्रेजी फिल्म मुहाफिज या फिर न्यू डेल्ही टाइम्स जैसी फिल्मों को लेकर भी गंभीरता से याद किया जाता है. रमेश शर्मा निर्देशित न्यू डेल्ही टाइम्स में संपादक के रोल में शशि कपूर ने एक मेथड एक्टर के रुतबे को स्थापित किया और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता. शशि कपूर को फिल्मों में आजीवन योगदान के लिए दादा साहेब फाल्के सम्मान भी दिया गया था.

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