गांगुली vs कोहली: आखिर विराट को क्यों ‘पसंद’ नहीं करते दादा?

गांगुली vs कोहली: आखिर विराट को क्यों ‘पसंद’ नहीं करते दादा?

BCCI की सीनियर सेलेक्शन कमेटी के मुख्य सेलेक्टर चेतन शर्मा ने एक स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया कि पूर्व BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली, पूर्व कप्तान विराट कोहली को पसंद नहीं करते थे.

राजनीति से लेकर बड़ी-बड़ी कंपनियों तक, स्कूल की क्लास से लेकर रोजमर्रा की नौकरी तक, जहां भी एक साथ एक जैसी ताकत और काबिलियत वाले लोग सक्रिय रहते हैं, उनके बीच अहं का टकराव यानी ईगो क्लैश होता ही है. खेलों की दुनिया भी अलग नहीं है और भारतीय क्रिकेट में भी इसके कई उदाहरण दिखे हैं. सबसे ताजा उदाहरण भारतीय क्रिकेट टीम के दो सबसे सफल कप्तानों का टकराव है, जिसके बारे में जानते सभी थे लेकिन अब किसी ने इसे खुले आम बोला है. ये दो शख्सियते हैं- सौरव गांगुली और विराट कोहली.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की सीनियर चयन समिति के प्रमुख चेतन शर्मा ने एक न्यूज चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में कथित तौर पर दावा किया है कि बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली टीम इंडिया के पूर्व कप्तान विराट कोहली को पसंद नहीं करते थे. ये बात इसलिए कही गई, क्योंकि दिसंबर 2021 में गांगुली के BCCI अध्यक्ष रहते हुए ही विराट कोहली ने टी20 की कप्तानी छोड़ी थी, जिसके बाद कोहली को ODI की कप्तानी से हटा दिया गया था. फिर गांगुली और कोहली के बीच मीडिया के जरिए एक-दूसरे को झूठा साबित करने वाले बयान आए.

ये सब बातें तो खैर पिछले एक साल से चल ही रही है लेकिन चेतन शर्मा के सबसे ताजा बयान या दावा या खुलासा, जो भी आप कहना चाहें, सवाल खड़े करता है कि गांगुली और कोहली में इस टकराव या इस ईगो क्लैश की वजह क्या रही होगी? ऐसा इसलिए क्योंकि गांगुली इस विवाद से पहले तक कोहली को खूब समर्थन देते थे, जबकि गांगुली के बीसीसीआई अध्यक्ष बनने पर कोहली भी खासे खुश दिखे थे या कम से कम खुशी जाहिर जरूर की थी.

2017 से टकराव की शुरुआत

फिर ऐसा अचानक क्या हो गया? इसकी स्पष्ट वजहें तो कहीं दर्ज नहीं हैं और दोनों पूर्व कप्तान ही इसे बता सकते हैं लेकिन कुछ घटनाएं और कुछ चारित्रिक विशेषताएं इसकी वजह मानी जा सकती हैं. इसका पहला एपिसोड जून 2017 में घटा. जगह थी इंग्लैंड, जब विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम चैंपियंस ट्रॉफी खेल रही थी. टूर्नामेंट से ठीक पहले ही कोहली और उस वक्त के कोच अनिल कुंबले के बीच भयंकर विवाद सामने आ गया था. यहां तक कि कोच में बदलाव की मांग भी कर दी गई और आखिर में कुंबले को इस्तीफा देना पड़ा.

पहली नजर में इसे यूं देखा जा सकता है कि गांगुली को अपने दोस्त कुंबले के साथ इस तरह के बर्ताव से नाराजगी रही होगी. इसकी दूसरी वजह ये है कि असल में गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण वाली क्रिकेट सलाहकार समिति ने ही कुंबले को कोच नियुक्त किया था. ऐसे में अपने चुने हुए कोच के साथ ऐसा व्यवहार उन्हें अखरा होगा. इतना ही नहीं, विवाद के दौरान गांगुली ने बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश भी की लेकिन सफलता नहीं मिली और कोहली का जिद्दी अंदाज शायद गांगुली के गले नहीं उतरा, क्योंकि खुद गांगुली अपने आप में काफी जिद्दी रहे थे लेकिन यहां वह कुछ नहीं कर सके.

ताकतवर में रहने की ख्वाहिश

इतना ही नहीं, कोहली और गांगुली को एक किरदार के रूप में देखकर उनके लक्षणों को भी समझना जरूरी है. गांगुली जब से भारतीय क्रिकेट में आए, वह अपने प्रदर्शन के साथ ही विवादों में बने रहे. फिर टीम इंडिया का कप्तान बनने और सफलता मिलने से उनकी ताकत और बढ़ी, जिसमें तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष जगमोहन डालमिया का सपोर्ट भी अहम था. गांगुली के कहने पर ही ग्रेग चैपल को टीम का कोच बनाया गया था. ये अलग बात है कि चैपल ने ही गांगुली को बाहर का रास्ता दिखाया था.

इसके बावजूद गांगुली को हमेशा से सबसे बड़ी ताकत बने रहने की आदत हो गई, जो BCCI अध्यक्ष बनने पर और भी बड़ी होनी लाजिमी था या कम से कम इसका एहसास लाजिमी था.

हालांकि, ये ऐसा वक्त भी था जब खुद कोहली भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत बन चुके थे. खुद कोहली भी अलग-अलग वजहों से विवादों में रहते थे. फिर भी सिर्फ भारतीय क्रिकेट नहीं, बल्कि विश्व क्रिकेट की भी सबसे ताकतवर शख्सियत कोहली थे. न सिर्फ वह अपनी बैटिंग के चरम पर थे, बल्कि वह सबसे बड़ा चेहरा थे. फिर उस वक्त BCCI अपनी सबसे कमजोर स्थिति में था क्योंकि बोर्ड को प्रशासकों की समिति चला रही थी और उसके प्रमुख विनोद राय क्रिकेट प्रशासन में पहली बार उतरे थे और कोहली की पसंद-नापसंद के हिसाब से चीजें चल रही थी.

ऐसे में बोर्ड में बदलाव के बाद दो ताकतों का टकराव लाजिमी था, जो धीरे-धीरे बढ़ता गया. साथ ही कोहली की फॉर्म भी अचानक गिरने लगी और धीरे-धीरे टीम के अंदर भी उनकी पकड़ मजबूत होती गई. फिर रोहित शर्मा जैसे दिग्गज बल्लेबाज का कद भी बढ़ने लगा जिसने कोहली को अकेला कर दिया और गांगुली के साथ उनकी दूरियां और बढ़ गईं. फिर कप्तानी विवाद ने इस खटास को चरम पर पहुंचा दिया, जिसका परिणाम मीडिया में खुलकर बयानबाजी के रूप में एक-दूसरे को झूठा साबित करने पर आ गई. यानी कुल मिलाकर एक जैसी शख्सियत वाले दो लोगों की ताकत का आपस में टकराव होना तय था, जो अंततः हो ही गया.