कस्तूरी से अंबा तक…भारत में मिलती हैं ये 5 तरह की हल्दी, फायदे भी अलग-अलग
हल्दी आपके खाने में पीला रंग देने के साथ ही सेहत से लेकर त्वचा तक के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन क्या आप इसकी 5 अलग-अलग वैरायटी के बारे में जानते हैं. इस आर्टिकल में जानेंगे कस्तूरी से लेकर अंबा तक पांच तरह की हल्दी और इनकी क्या है खासियत-फायदे.
:काली हल्दी: काली हल्दी (Black Turmeric / Curcuma caesia) कई एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है. इसका रंग बाहर से भी काफी डार्क होता है और काटने पर ये अंदर से डार्क ब्लू कलर की दिखाई देती है. आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है. इसी वजह से इसकी कीमत मार्केट में ज्यादा है. इसका यूज कई हेल्थ प्रॉब्लम से रिकवर होने में किया जाता है. इसकी खेती ज्यादातर पूर्वोत्तर भारत, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश में की जाती है. (Image:life_at_an_indian_farm/insta)
:कस्तूरी हल्दी: स्किन से जुड़ी समस्याओं जैसे मुंहासे, दाग-धब्बे, टैनिंग को दूर करने के लिए कस्तूरी हल्दी सबसे ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है. ये किचन वाली हल्दी की तरह पीलापन नहीं छोड़ती है. इसका रंग हल्का पीला या क्रीम जैसा मटमैला होता है. इसमें खस जैसी खुशबू आती है. इसे कस्तूरी मंजाल और जंगली हल्दी के नाम से भी जाना जाता है. ये हल्दी त्वचा की रंगत निखारने से लेकर स्किन में कसाव लाने तक में हेल्पफुल मानी गई है. (Image:greener_igrow/insta)
:लाकाडोंग हल्दी : ये भारत के मेघालय में जयंतिया हिल्स में उगाई जाने वाली प्रीमियम किस्म है. लाकाडोंग हल्दी (Lakadong Turmeric) को अपने रिच वाइब्रेंट नारंगी रंग और तेज सुगंध के लिए जाना जाता है. इसमें करक्यूमिन की मात्रा काफी ज्यादा होती है. इसे जीआई टैग भी मिला हुआ है. इसे एंटीइंफ्लामेटरी (सूजन कम करना) माना गया है. ये इम्यूनिटी बूस्टर भी है. इसके अलावा भी इसके कई फायदे होते हैं. (Image:gokulsoundararajan/insta)
पीली हल्दी: ये हल्दी का सबसे कॉमन टाइप है जो डेली रूटीन में हमारे खाने में इस्तेमाल की जाती है. दुनियाभर में उगाई जाने वाली हल्दी का तकरीबन 70 से 75 प्रतिशत प्रोडक्शन भारत में होता है. मुख्य रूप से इसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में उगाते हैं. ये स्किन से लेकर सेहत तक के लिए कई तरह से फायदेमंद रहती है. (Image:Getty Images)



