Tere Ishk Mein: न कृति, न धनुष… ये निकला ‘तेरे इश्क में’ का असली खिलाड़ी, 7 मिनट में उड़ाया गर्दा

Tere Ishk Mein: न कृति, न धनुष… ये निकला ‘तेरे इश्क में’ का असली खिलाड़ी, 7 मिनट में उड़ाया गर्दा

Tere Ishk Mein: 28 नवंबर को धनुष और कृति सेनन की फिल्म 'तेरे इश्क में' ने दस्तक दी. दो दिनों में फिल्म ने करोड़ों का कारोबार कर लिया है. कोई धनुष के लिए जा रहा है, तो कोई कृति सेनन के लिए... तो किसी की जुबां पर दोनों की लव स्टोरी के चर्चे हैं. यूं तो मैं भी सिर्फ फिल्म देखने के लिए गई थी. पर असल में जो मिला, वो 7-10 मिनट सबसे यादगार साबित हो गए.

Tere Ishk Mein: ”प्रेम में मृत्यु है, ‘मुक्ति’ नहीं, तू मर तो सकता है पर निजात नहीं पा सकता…” यह डायलॉग है धनुष और कृति सेनन की फिल्म ‘तेरे इश्क में’ का. शायद कहूं तो सबसे बेहतरीन सीन. जो जितना रियल लगता है, उतना ही रोंगटे खड़े करने वाला भी. 28 नवंबर को आनंद एल राय की ‘तेरे इश्क में’ ने सिनेमाघरों में दस्तक दी. जिसने दो दिनों में भारत से टोटल 35 करोड़ का बिजनेस कर लिया है. पर क्या यह महज एक पिक्चर है? मेरा जवाब ‘नहीं’ होगा. क्योंकि इसमें बहुत कुछ ऐसा आपको देखने को मिलता है, जो असल जिंदगी के करीब है. फिल्म में जितना जबरदस्त धनुष का अंदाज है, उससे कई गुना बेहतरीन उनकी एक्टिंग. साथ ही मेकर्स ने कृति सेनन को जैसा किरदार सौंपा है, वो भी उस पर एकदम खरा उतरती हैं. पर इस कहानी का असली हीरो कोई और निकला, जानिए कौन?

किसी भी फिल्म का सबसे मजबूत किरदार आंकने का तरीका आपकी नजरों में क्या है? कोई शायद बोले- पूरी फिल्म में दिखना, या कोई कह दे- लीड रोल मिलना. पर मुझे लगता है दोनों ही नहीं. बल्कि कहानी के ऐसे पॉइंट में एंट्री लेना, जहां किसी किरदार को देखकर लोग लीड स्टार्स को ही भूल जाए. साथ ही महज कुछ मिनट ही पूरी फिल्म पर भारी लगने लगे. खासकर जब कनेक्शन पुराना होता है, तो ऐसा होता भी है. ‘तेरे इश्क में’ में भी इस खिलाड़ी ने असली खेला कर दिया.

‘तेरे इश्क में’ का असली खिलाड़ी कौन?

इस कहानी में असली ट्विस्ट लाने वाला है- मुरारी. तो अगर आपने अबतक फिल्म नहीं देखी है, तो खुद के रिस्क पर पढ़िए क्योंकि आगे भर-भरकर स्पॉइलर्स भरे हुए हैं. यह कहानी है उस लड़के की, जो प्यार खो चुका है और उस प्यार में खोए बेटे को बचाने के लिए निकले पिता को भी… बनारस के मणिकर्णिका घाट पर जैसे ही मुरारी यानी मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब की एंट्री हुई, तो पूरा थिएटर गूंज उठा. क्योंकि वो इस बार शंकर (धनुष) को बचाने पहुंचा था, जिसने कुंदन को खो दिया था. उनके हर डायलॉग पर सीटियां और तालियां बज रही थीं. फिल्म में यह किरदार महज 7-10 मिनट का रहा होगा, जो आखिर में शंकर का पिंडदान करने भी आता है. पर इस किरदार की खूबसूरती रही कि उस वक्त और उसके बाद भी हर कोई बस मुरारी की ही बातें कर रहा है. सच में मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब ‘STAR OF THE SHOW’ निकले. क्योंकि उनके कैमियो के बारे में किसी ने सोचा तक नहीं था. वो कहते हैं-

”चाहे मर या मार, नहीं मिलेगी न यहां, न ही वहां… दोस्त था हमारा बहुत अच्छा दोस्त, दोस्त क्या जान था हमारी. इतना अच्छा दोस्त कि हमारे एक कहने पर मर भी गया. कितनी बार गंगा घाट में हमने तांडव करते देखा है उसको, प्रेम में मृत्यु है मुक्ति नहीं…”

Murari And Shankar

फिल्म बेशक मुरारी के साथ खत्म हो गई. शंकर को मुक्ति मिलकर भी नहीं मिली, पर ‘रांझणा’ की वो तमाम यादें जिंदा कर गई. जिसके लिए कोई भी तैयार नहीं था. यह एकलौता ऐसा सीन है, जहां देखकर लगा कि क्या गजब बना दिए हो यार. साल 2013, जब ‘रांझणा’ में धनुष को कुंदन बने दिखाया गया, तब मुरारी भी आया था. और दोनों ने कई यादें सबको दी. वो कहानी अधूरी रह गई, जिसका खूबसूरत टच मिलता है ‘तेरे इश्क में’. इसलिए मुरारी और शंकर वाले सीन के लिए फिल्म देखना तो बनता है. यह पूरी फिल्म का सबसे गजब का सीन था. जो हर किसी की जुबां पर है, जिन्होंने भी फिल्म देख ली है. आखिरी में पंडित जी की एक लाइन सुन लीजिए, जब वो कहते हैं-

”इस देश के सारे दिलजले, कर्मजले और बावले की शक्ल एक सी हो जाती है क्या?”

कितनी भी ‘रांझणा’ और ‘तेरे इश्क में’ आती रहे, पर जब-जब पंडित-शंकर का क्रॉसओवर होगा, तो हर जगह आशिकी से ज्यादा इस दोस्ती की बात होगी.