गुजरात: गांधीनगर में ‘व्हाइट टॉपिंग रोड’ का काम पूरा, 38 करोड़ की लागत, 20 साल होती है लाइफ
मानसून की सीजन में पानी के तेज बहाव के कारण गुणवत्तायुक्त और गहन निगरानी के साथ बनी डामर रोड में भी पैच पड़ जाते हैं. ऐसी स्थिति में व्हाइट टॉपिंग तकनीक को फायदेमंद माना जाता है. सड़क एवं भवन विभाग के मुताबिक व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़कों को अब आवाजाही के लिए खोल दिया गया है.
मानसून के सीजन में गुजरात के ज्यादातर क्षेत्रों में भारी बारिश की वजह से अनेक सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में इन सड़कों और पुलों की तत्काल मरम्मत करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. वर्तमान में पूरे राज्य में युद्धस्तर पर काम चल रहा है.
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात में व्हाइट टॉपिंग रोड बनाने के संबंध में सुझाव दिया था. इसके अंतर्गत सीेएम भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में कुल 38 करोड़ रुपए के व्हाइट टॉपिंग सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी थी.
व्हाइट टॉपिंग तकनीक
इन कार्यों में गांधीनगर में 6.20 किलोमीटर लंबाई की कोबा-अडालज लिंक रोड और 2.80 किलोमीटर लंबाई की सरगासण-रक्षा शक्ति सर्कल रोड शामिल हैं. इन दोनों सड़कों को व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनाने का काम पूरा कर लिया गया है.

सड़क की लाइफ 20 साल
बता दें कि व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़क की लाइफ 20 साल की होती है. व्हाइट टॉपिंग तकनीक में मौजूदा डामर रोड की ऊपरी सतह हटाकर कंक्रीट की मोटी परत बिछाई जाती है. यह तकनीक आर्थिक दृष्टि से आरसीसी सड़क की तुलना में अधिक सरल और टिकाऊ होती है.
माना जाता है कि यह पद्धति डामर की रिसर्फेसिंग से अधिक लाभदायक होती है. सड़क में डामर की सतह के ऊपर 20 सेमी कंक्रीट की परत बिछाई जाती है, जो डामर और आरसीसी की प्रक्रिया से अलग पद्धति है.
व्हाइट टॉपिंग तकनीक फायदेमंद
मानसून की सीजन में पानी के तेज बहाव के कारण गुणवत्तायुक्त और गहन निगरानी के साथ बनी डामर रोड में भी पैच पड़ जाते हैं. ऐसी स्थिति में व्हाइट टॉपिंग तकनीक को फायदेमंद माना जाता है. सड़क एवं भवन विभाग के मुताबिक व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़कों को अब आवाजाही के लिए खोल दिया गया है.



