ममता और सयानी… राजनीति में गुरु-शिष्या की दिलचस्प रही ये कहानी

ममता और सयानी… राजनीति में गुरु-शिष्या की दिलचस्प रही ये कहानी

Sayani Ghosh: हार के बाद टीएमसी खंड-खंड हो रही है. ममता की आंखों के तारे पार्टी से दूर हो रहे हैं. जो कभी सबसे भरोसेमंद थे वो अब अलग बैठने की जगह मांग रहे हैं. ममता बनर्जी की सिपहसालार सयानी घोष भी इसमें शामिल हैं. उनका हृदय परिवर्तन हो चुका है. ममता की 'शिष्या' मानी जाने वाली सयानी अब राजनीतिक हवा का रुख भांपकर अलग राह पर हैं. वो टीएमसी के उन बागी सांसदों में हैं, जिन्होंने स्पीकर को लेटर लिखकर अलग बैठने का ऐलान किया है.

सियासत मतलब सयाने लोगों का मजमा, जहां ऋतुओं से ज्यादा हृदय-परिवर्तन होता है. यहां ना समर्पण स्थायी है और ना विरोध. अब बंगाल में जो कुछ हो रहा है उसी को देख लीजिए. ममता बनर्जी की सिपहसालार सयानी घोष का ह्रदय परिवर्तन हो चुका है. ये वो सयानी घोष हैं जो ममता बनर्जी की सियासी प्रयोगशाला से निकली हैं. ममता ने अपनी प्रयोगशाला में संघर्ष और आक्रामकता का जो मॉडल गढ़ा था, उसमें सयानी घोष सबसे फिट थीं. बीजेपी पर उनके कटाक्ष टीएमसी समर्थकों को खूब लुभाते थे. उनके तीखे वार कार्यकर्ताओं में जोश भरते थे. हालांकि, विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब बहुत कुछ बदल चुका है. अब घोष भी हवा का रुख भांप चुकी हैं और काफी सयानी हो गई हैं. वो टीएमसी के उन बागी सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने स्पीकर को लेटर लिखकर अलग बैठने और एनडीए को समर्थन करने का ऐलान किया है. आइए जानते हैं ममता और सयानी की गुरु-शिष्या वाली दिलचस्प कहानी…

वो साल था 2021, जब सयानी घोष टीएमसी में शामिल हुई थीं. तब राज्य में विधानसभा चुनाव का माहौल अपने शबाब पर था. बीजेपी भी अपने कार्यकर्ताओं में जान फूंक रही थी. नई चेहरों की तलाश थी. उधर, ममता बनर्जी को ऐसे तेज तर्रार युवा चेहरों की जरूरत थी जो सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक टीएमसी के पक्ष में माहौल को और मजूबत कर सकें. इस कसौटी पर सयानी घोष बिल्कुल फिट बैठीं.

टीएमसी में एंट्री से ममता की शिष्या तक

सयानी घोष टीएमसी में आईं और अपनी तेज तर्रार शैली से सामान्य नेता की कैटेगरी से उठकर ममता की शिष्या बन गईं. सयानी की आवाज मतलब ममता के बोल. सयानी का भाषण मतलब ममता की लाइन. फिर चाहे बीजेपी पर हमले हों या बंगाली अस्मिता का सवाल, सयानी घोष ने ठीक वैसे ही तेवर अपनाए जो ममता बनर्जी की पहचान रहे हैं.

घोष की इस सयानी शैली की ममता भी मुरीद हुईं. उन पर भरोसा जताया. उन्हें युवा तृणमूल कांग्रेस की कमान दी. सयानी ने भी ‘गुरुजी’ के भरोसे पर खरा उतरने के लिए बंगाल में कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाया. देखते ही देखते वो पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल हो गईं. जिस तरह कांग्रेस में रहते हुए ममता बनर्जी ने अपनी अलग पहचान बनाई थी ठीक वैसे ही सयानी ने भी खुद को गढ़ा.

‘गुरु गुड़ और चेला शक्कर’ हो गया

उनके ध्रुवीकरण वाले बयानों को भी ममता की पूरी शह मिली. ममता ने उन पर भरोसा बनाए रखा. दोनों की तेज तर्रार शैली को राज्य में गुरु-शिष्या की ऐसी कहानी के तौर पर देखा जाता रहा, जहां गुरु ने प्लेटफॉर्म दिया तो शिष्या ने उसी अंदाज में अपनी पहचान गढ़ी. हालांकि, ना ममता ने सोचा होगा ना सयानी ने उम्मीद की होगी कि 2026 में बीजेपी की ऐसी आंधी आएगी और सत्ता चली जाएगी. हालांकि, सच यही है कि सत्ता बदलने और सयानी के हृदय परिवर्तन के साथ ही ‘गुरु गुड़ चेला शक्कर’ हो चुका है.

सिनेमा से सियासत तक सयानी का सफर

जानी मानी बंगाली अभिनेत्री और गायिका सयानी घोष ने 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले अपनी सियासी पारी का आगाज किया था. वो टीएमसी से जुड़ीं और आसनसोल दक्षिण सीट से पार्टी की उम्मीदवार रहीं. हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा लेकिन उन पर पार्टी नेतृत्व का भरोसा कायम रहा. जून 2021 में वो पार्टी की युवा इकाई की अध्यक्ष बनीं. दिलचस्प बात ये है कि ये पद पहले ममता के भतीजे अभिषेक के पास था.

सयानी से टीएमसी को क्या फायदा हुआ?

सयानी की बेबाक शैली ने युवाओं और महिला मतदाताओं को लुभाया. फिल्म और टीवी जगत की लोकप्रियता का फायदा मिला. सोशल मीडिया पर सयानी की सक्रियता ने टीएमसी के विजन को युवाओं तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. ममता के इस फैसले के साथ ही संगठन में नई पीढ़ी तैयार हुई.

प्रशांत द्विवेदी
प्रशांत द्विवेदी

प्रशांत कुमार द्विवेदी ने साल 2017 में अमर उजाला कानपुर से करियर की शुरुआत की. अगस्त 2019 से अक्टूबर 2021 तक अमर उजाला जम्मू कश्मीर में काम किया. इसके बाद एक साल अमर उजाला नोएडा में काम करने का मौका मिला. साल 2022 में आज तक डिजिटल में बतौर चीफ सब एडिटर ज्वाइन किया. सीएसजेएमयू कानपुर से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल कर चुके प्रशांत सुरक्षा, कश्मीर मामले, क्राइम और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम करते हैं. वर्तमान में TV9 डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. नौकरी के अलावा खेल-कूद और किताबें पढ़ने में दिलचस्पी है. विशेष रूप से फिलासफी. इसके साथ ही ट्रेवलिंग पसंद है, खासतौर पर माउंटेन एरियाज में समय बिताना बहुत पसंद है. इन सबके बीच गांव, बेजुबानों और बुजुर्गों से विशेष लगाव रखते हैं.

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