Anupamaa vs KSBKBT 2: ‘अनुपमा’ से ‘तुलसी’ ने छीना नंबर- 1 का ताज, रुपाली गांगुली के शो की TRP क्यों गिरी? 5 बड़े कारण

Anupamaa vs KSBKBT 2: ‘अनुपमा’ से ‘तुलसी’ ने छीना नंबर- 1 का ताज, रुपाली गांगुली के शो की TRP क्यों गिरी? 5 बड़े कारण

5 Reasons Why Anupamaa TRP is Falling: राजन शाही के मशहूर टीवी सीरियल 'अनुपमा' ने टीवी को नई पहचान दी है, इसमें कोई शक नहीं. लेकिन एक ही राग को लंबे समय तक अलापने से धुन बेसुरी हो जाती है. अनुपमा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है और शायद यही वजह है कि रुपाली गांगुली के इस शो से स्मृति ईरानी के शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' ने नंबर- 1 का ताज छीन लिया.

5 Reasons Why Anupamaa TRP is Falling: छोटे पर्दे पर सालों तक राज करने वाली ‘अनुपमा’ के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है. एक समय था जब टीआरपी चार्ट पर स्टार प्लस के शो ‘अनुपमा’ का राज था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. ताजा आंकड़ों और दर्शकों के मिजाज को देखें तो ‘अनुपमा’ उस ऊंचाई को छूने में नाकाम हो रही है. वहीं स्मृति ईरानी का शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ इस शो के आगे निकल चुका है. आखिर क्यों दर्शक अब अनुपमा से कन्नी काट रहे हैं? आइए जानते हैं वो 5 बड़े कारण, जिनकी वजह से शो की टीआरपी गिर रही है.

अनुपमा की सबसे बड़ी ताकत उसकी सादगी और बोलने का अंदाज था. शुरुआत में जब वो समाज के ताने झेलकर जवाब देती थी, तो दर्शकों को सुकून मिलता था. लेकिन अब, हर छोटी बात पर अनुपमा का 5 मिनट का लंबा भाषण दर्शकों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है. हालिया ट्रैक में जब शाह परिवार की अगली पीढ़ी ने गलती की, तो दर्शक उम्मीद कर रहे थे कि अनुपमा ठोस कदम उठाएगी, लेकिन इसके बजाय उसने फिर से ‘संस्कारों का पाठ’ पढ़ाना शुरू कर दिया.

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1. खत्म नहीं हो रहे हैं अनुपमा के भाषण

अगर इस शो की ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से तुलना की जाए तो तुलसी वीरानी भी आदर्शवादी है, लेकिन उसमें एक ‘फाइटर’ भी है. 25 साल पहले भी जब अंश वीरानी (तुलसी का बेटा) गलत रास्ते पर गया था, तो तुलसी ने उसे खुद गोली मार दी थी और आज भी उन्होंने एक ही गलती पर अपने पति मिहिर को छोड़ने की हिम्मत दिखाई. दर्शकों को वो महिला किरदार पसंद आते हैं जो खुद अपने फैसले ले, न कि वो जो सिर्फ आंसू बहाए और लंबे डायलॉग बोले.

2. अब भी झेल रही हैं पहले ससुराल का सिरदर्द

अनुपमा की टीआरपी गिरने का एक सबसे बड़ा और तकनीकी कारण है, उसका ‘शाह हाउस’ से न टूट पाने वाला रिश्ता. अनुपमा ने धोखा देने वाले अपने पहले पति वनराज की हजार गलतियों को नजरअंदाज करने के बाद अनुज कपाड़िया से शादी तो की, अपना नया घर भी बसाया, लेकिन वो आज भी वनराज शाह के घर के मसलों में ही उलझी रहती है.

दर्शकों का एक बड़ा वर्ग सोशल मीडिया पर पूछता है, “क्या अनुपमा के पास अपनी खुद की कोई जिंदगी नहीं है?” लीप आने के बावजूद इस कहानी में नयापन खत्म हो चुका है. लेकिन ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में पीढ़ियां बदलीं, घर बदला, लेकिन उस ट्रैक से दर्शक आज भी कनेक्टेड महसूस करते हैं.

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3. हीरो के बिना चल रहा है शो

किसी भी टीवी शो की जान उसकी ‘लीड जोड़ी’ होती है. अनुज कपाड़िया (गौरव खन्ना) ने इस शो में जान फूंकी थी. अनुज और अनुपमा की मैच्योर लव स्टोरी ने युवाओं को भी शो से जोड़ा था. लेकिन मेकर्स ने टीआरपी के लालच में इस जोड़ी के साथ इतना ‘एक्सपेरिमेंट’ किया कि दर्शक थक गए. उन्हें बार-बार अलग करना, फिर मिलाना, फिर याददाश्त खो जाना या फिर गलतफहमी पैदा करना, इतना हो गया कि बेचारा अनुपमा का ‘अनुज’ बिग बॉस में चला गया.

‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में जब मिहिर की मौत की कहानी दिखाई गई थी तो ऑडियंस की भारी डिमांड के बाद मेकर्स को मिहिर को वापस लाना पड़ा था. लेकिन ‘अनुपमा’ में अनुज और अनुपमा के अलग होने पर अब दर्शकों को दुख नहीं होता, बल्कि वे चिढ़ जाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि अगर अनुज के किरदार को वो स्क्रीनस्पेस मिलता, जिसकी गौरव को उम्मीद थी, तो वो ये शो कभी नहीं छोड़ते.

4. सपोर्टिंग कास्ट के गायब होने से अधूरी लग रही है कहानी

जब कहानी रुक जाती है, तो टीवी मेकर्स लीप का सहारा लेते हैं. अनुपमा में भी कई छोटे और बड़े लीप आए. लेकिन समस्या यह है कि लीप के बाद कहानी बेहतर होने के बजाय और ज्यादा उलझ गई. मदालसा शर्मा (काव्या) और सुधांशु पांडे (वनराज) जैसे दिग्गज कलाकारों का शो छोड़ना एक बड़ा सेटबैक रहा. नए कलाकार उस कमी को पूरा नहीं कर पाए. शो में कई बार नए किरदार लाए जाते हैं और फिर अचानक उन्हें गायब भी कर दिया जाता है. इससे दर्शक खुद ही कन्फ्यूज महसूस करते हैं.

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5. बदल रहा है दर्शकों का टेस्ट

‘अनुपमा’ की कहानी आज भी कहीं न कहीं 2000 के दशक के डेली सोप जैसी लगती है, जहां एक ही बात को बार-बार दोहराया जाता है. लेकिन ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ ने खुद को 2026 के हिसाब से अपडेट किया है. वहां सास-बहू के झगड़े सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं हैं. ‘क्योंकि… 2’ के पास एकता कपूर का वो मैजिक टच है, जो जानता है कि कब कहानी में ऐसा मोड़ लाना है कि दर्शक अगले दिन का एपिसोड देखने के लिए मजबूर हो जाएं.

क्या ‘अनुपमा’ कर पाएगी वापसी?

टीआरपी चार्ट में पिछड़ना किसी भी शो के लिए अंत नहीं होता, खासकर तब जब दो शो में उन्नीस-बीस का फर्क हो. लेकिन ये एक चेतावनी जरूर हो सकती है. ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर ब्रांड बड़ा हो और कहानी में दम हो, तो दर्शक वापस आते हैं. ‘अनुपमा’ को अगर वापस नंबर- 1 बनना है, तो उसे अपनी ‘महानता’ के चोले से बाहर निकलना होगा और फिर से निडर ‘अनुपमा’ बनना होगा.