बंगाल के 46 विधानसभा सीटों पर 40 फीसदी से अधिक बढ़े वोटर्स, BJP ने जनसांख्यिकीय बदलाव की बताई ये वजह

बंगाल के 46 विधानसभा सीटों पर 40 फीसदी से अधिक बढ़े वोटर्स, BJP ने जनसांख्यिकीय बदलाव की बताई ये वजह

पश्चिम बंगाल में 46 विधानसभा सीटों पर 2011 से 2021 के बीच 40% से अधिक मतदाता वृद्धि हुई है. भाजपा ने इसको "सुनियोजित जनसांख्यिकीय इंजीनियरिंग" बताते हुए आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी सरकार के संरक्षण में बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से मतदाता सूची में शामिल किया गया है. तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में व्यापक बदलाव का आरोप लगाते हुए दावा किया कि राज्य में “राजनीतिक संरक्षण” के तहत “खतरनाक जनसांख्यिकीय बदलाव” हो रहा है. पार्टी ने कहा कि वर्ष 2011 से 2021 के बीच राज्य की 46 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं की संख्या में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है. इनमें से 7 में यह वृद्धि 50 प्रतिशत से अधिक है. इसका अर्थ है कि वर्तमान मतदाताओं में से लगभग आधे नए हैं और हमने 2021 के बाद या 2011 से पहले हुए बदलावों पर भी विचार नहीं किया है.

भाजपा ने सोशल मीडिया एक्स एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि यह कोई स्वाभाविक या आकस्मिक परिवर्तन नहीं, बल्कि “सुनियोजित जनसांख्यिकीय इंजीनियरिंग” है, जो ममता बनर्जी सरकार के संरक्षण में की जा रही है.

सात सीटों पर 50 फीसदी से अधिक बढ़े वोटर्स

पार्टी ने आरोप लगाया कि इनमें से सात सीटों पर मतदाता वृद्धि दर 50 प्रतिशत से अधिक है, जबकि 118 सीटों पर यह आंकड़ा 30 से 40 प्रतिशत के बीच है. पार्टी ने कहा कि इनके अलावा, 118 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां मतदाता वृद्धि 30% से 40% प्रतिशत के बीच है.

इन 46 सीटों में से 10 मालदा से हैं. 10 दक्षिण 24 परगना से हैं. 9 मुर्शिदाबाद से हैं. 7 उत्तर दिनाजपुर से हैं. 4 दक्षिण दिनाजपुर से हैं. 2 उत्तर 24 परगना से हैं. 2 जलपाईगुड़ी से हैं और 2 दार्जिलिंग से हैं.

भाजपा ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के शासनकाल में बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से मतदाता सूची में शामिल किया गया है. पार्टी ने लिखा, “यह एक राजनीतिक परियोजना है, न कि जनसंख्या की स्वाभाविक वृद्धि.”

बंगाल की संस्कृति पर हमला

भाजपा ने चेतावनी दी कि यह “आक्रमण” है और “बंगाल की संस्कृति, पहचान और भूभाग” को बदलने का प्रयास है. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेष रूप से मालदा, मुर्शिदाबाद, दक्षिण 24 परगना और उत्तर दिनाजपुर ज़िलों में यह बदलाव सबसे अधिक देखा गया है.