क्या पैगंबर की तरह खुद को देख रहे तालिबान के सुप्रीम लीडर? अखुंदजादा से नाराज हुए अफगानी!
तालिबान सुप्रीम लीडर हिबतुल्ला अखुंदजादा के पैगंबर जैसे बयानों ने संगठन में आंतरिक कलह पैदा कर दी है. उनके आदेशों को ईश्वर और पैगंबर की आज्ञा मानने के समान बताने से कई तालिबानी सदस्यों के नाराज होने की खबरें हैं.
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के आने के बाद काफी हद तक शांति बनी हुई है और तालिबान तेजी से विकास के रास्ते पर चल रहा है. हालांकि, कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मानव अधिकारों को लेकर कई चिंताएं जाहिर की हैं, जिन्हें तालिबान प्रशासन नजरअंदाज करता रहा है. अब तालिबान के अंदर ही फूट डलती दिखाई दे रही है और इसकी वजह तालिबान की टॉप लीडरशिप का अहंकार बन रहा है, जिसमें उन्हें अपने फैसले पर किसी की रोक-टोक बर्दाश्त नहीं है.
तालिबान नेता हिबतुल्ला अखुंदजादा ने हाल में एक बयान में अपने आदेशों को सभी के लिए जरूर मानने पर जोर दिया है. उनके इस बयान का विरोध तालिबान के अंदर ही होने लगा है. तालिबान के कुछ सदस्यों ने उनकी आलोचना की है. उनका कहना है कि अखुंदजादा के इन बयानों से ऐसा लगता है कि वह खुद को ‘एक पैगंबर की जगह पर’ देखते हैं.
अखुंजादा पर खुद को पैगंबर के बराबर का दर्जा देना का आरोप
तालिबान के कुछ सदस्यों ने ब्रिटिश बेस्ड न्यूज आउटलेट अफगानिस्तान इंटरनेशनल को बताया कि इस तरह के बयान इस बात का संकेत हैं कि अखुंदजादा ने खुद को पैगंबर के बराबर का दर्जा दे दिया है. तालिबान के वित्त मंत्रालय ने अखुंदजादा के उस भाषण का पूरा ब्योरा जारी किया है, जो उन्होंने हाल ही में कंधार में मंत्रालय के कर्मचारियों के साथ हुई एक बैठक में दिया था.
अब तक सिराजउद्दी सिराजुद्दीन हक्कानी और शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई ने ही सार्वजनिक रूप से अखुंदजादा की आलोचना की है, जबकि अन्य सदस्यों ने खुलकर अपनी असहमति जाहिर नहीं की है. अपने भाषण में अखुंदजादा ने चेतावनी दी कि जो कोई भी उनके आदेशों का उल्लंघन करेगा, उसे कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी. उन्होंने तालिबान के अधिकारियों को व्यापार करने या किसी भी तरह से कमाई करने से भी रोक दिया है. उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी को व्यापार करने का कोई अधिकार नहीं है.
अपने आदेश की तुलना ईश्वर से!
अफगान इंटरनेशनल के मुताबिक उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी आज्ञा मानना, ईश्वर और पैगंबर की आज्ञा मानने के बराबर है. उन्होंने कहा, “अगर आप मेरे आदेशों का पालन नहीं करते हैं, तो इसका मतलब है कि आपने ईश्वर और पैगंबर के आदेशों का पालन नहीं किया है. क्योंकि शरिया (इस्लामी कानून) भी शासक की आज्ञा मानने पर ज़ोर देता है.” अखुंदजादा ने आगे यह भी आदेश दिया कि उनकी अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति न तो किसी को पैसे या तोहफे दे सकता है और न ही किसी से ले सकता है.
ये भी पढ़ें- होर्मुज संकट के बीच खुशखबरी! अफगानिस्तान में मिला तेल का भंडार, निकालने की प्रक्रिया शुरू



