Dhurandhar 2 Quick Review: दावत है आदित्य धर की ‘धुरंधर 2’! पढ़िए रणवीर सिंह की फिल्म का पहला जामफाड़ रिव्यू

Dhurandhar 2 Quick Review: दावत है आदित्य धर की ‘धुरंधर 2’! पढ़िए रणवीर सिंह की फिल्म का पहला जामफाड़ रिव्यू

Dhurandhar 2: आदित्य धर की फिल्म धुरंधर 2 आखिरकार सिनेमा घरों में रिलीज हो गई है. हालांकि, असली तौर पर फिल्म कल यानी 19 मार्च को रिलीज होगी, लेकिन आज दर्शकों को लिए रिलीज से एक दिन पहले पेड प्रीव्यू रखा गया था. इस फिल्म से काफी उम्मीदें थीं, आइए जानते हैं कि आखिर ये फिल्म उन उम्मीदों पर खरी उतरती है या नहीं.

Dhurandhar 2 Hindi Review: आदित्य धर और रणवीर सिंह की ‘धुरंधर पार्ट 2’ थिएटर में रिलीज हो चुकी है. अगर आप सोच रहे थे कि ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट में ही सारा हिसाब बराबर हो गया था, तो जरा ठहरिए! क्योंकि इस फिल्म के पार्ट 2 के साथ पर्दे पर लौट आया है बदले का वो खूंखार खेल, जिसे देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं. हमने फिल्म का ‘पेड प्रिव्यू’ देख लिया है और कसम से, फिल्म में हिंसा इस कदर कूट-कूट कर भरी गई है कि फ्रंट सीट पर बैठने वालों को ये डर जरूर लगेगा कि कहीं पर्दे से खून की छींटें उनके पॉपकॉर्न पर न गिर जाएं.

हालांकि हिंसा के बावजूद फिल्म शुरुआत से लेकर अंत तक खूब मनोरंजन करती है. लेकिन क्या रणवीर की ‘धुरंधर 2’ सिर्फ एक्शन का शोर और जिंगोइज्म से भरपूर है, या इसके पीछे कोई गहरी कहानी भी छिपी है? चलिए, थोड़ा विस्तार से बात करते हैं और जानते हैं कि इस बार ‘धुरंधर’ ने क्या नया धमाका किया है.

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कहानी

फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ की कहानी वहां से शुरू होती है जहां अक्सर पुरानी यादें और जख्म गहरे होते हैं, यानी फ्लैशबैक से. यहां हमें हमजा का वो चेहरा देखने को मिलता है, जिसे दुनिया नहीं जानती. कैसे एक सीधा-साधा अपने पापा और दादा की तरह फौजी बनने का सपना देखने वाला ‘जसकीरत’ जासूसी की गलियों का माहिर खिलाड़ी ‘हमज़ा’ बन गया, पर्दे पर ये सफर देखना किसी थ्रिलर राइड से कम नहीं है. कहानी रफ्तार तब पकड़ती है जब रहमान डकैत के खात्मे के बाद हमजा खुद को ‘लियारी का किंग’ घोषित कर देता है. अब भाई साहब, किंग बनना तो आसान है, लेकिन उस ताज को संभालना और दुश्मनों की फौज से निपटना ही असली खेल है. लियारी की तंग गलियों से लेकर सत्ता के गलियारों तक, हमजा का ये बदला किस मोड़ पर जाकर थमता है और उसे इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ती है, ये जानने के लिए तो आपको थिएटर में जाकर धुरंधर 2 देखनी होगी.

Dhurandhar 2 (1)

कैसी है फिल्म

अब बात करते हैं उस असली मुद्दे की, जिसके लिए आप टिकट के पैसे खर्च करते हैं, यानी ये फिल्म वो कमाल करती है या नहीं. ‘धुरंधर 1’ अगर शानदार थी, तो ‘धुरंधर रिवेंज’ को आप ‘बेमिसाल’ की कैटेगरी में डाल सकते हैं. पिछली फिल्म में एक्शन और थोड़ा-बहुत रोमांस का तड़का तो था, लेकिन जो ‘इमोशन्स’ वाली कमी रह गई थी, उसे इस बार आदित्य धर ने बखूबी पूरा किया है. सीधी बात ये है कि इस फिल्म में जानदार एक्टिंग है, दिल को छू लेने वाली कहानी है और संगीत ऐसा है जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी आपके दिमाग में गूंजता रहेगा. मतलब ये कि मेकर्स ने इस बार सिर्फ हड्डियां नहीं तोड़ी हैं, बल्कि दर्शकों के दिल के तारों को भी छेड़ा है. अगर पार्ट वन सिर्फ एक ट्रेलर था, तो ये फिल्म पूरी दावत है.

एक्टिंग:

अब बात करते हैं उनकी, जिनके दम पर ये फिल्म ‘धुरंधर’ बनती है. रणवीर सिंह ने ‘जसकिरत सिंह रंगी’ के रूप में एक मासूम देशभक्त से लेकर ‘हमजा’ के खूंखार अवतार तक जो सफर तय किया है, उसे देखकर बस एक ही बात निकलती है, ‘लाजवाब!’ रणवीर की आंखों में वो आग, वो गुस्सा और लियारी को राख कर देने वाली जो तड़प दिखती है, वो रोंगटे खड़े कर देती है. हर सीन के साथ उनका किरदार और भी खतरनाक होता जाता है. वहीं दूसरी तरफ हैं आर. माधवन उर्फ अजय सान्याल. भाई साहब, इस आदमी को पर्दे पर देखना किसी सुकून से कम नहीं है. वो इस ‘हौसला, ईंधन, बदला’ मिशन के असली सारथी का किरदार बखूबी निभाते हैं. माधवन ने इतनी सहजता से एक्टिंग की है कि मन करता है उन्हें थोड़ी देर और पर्दे पर देखा जाए. वो जसकिरत में जिस तरह से ‘बदले का बारूद’ भरते हैं, वो काबिले-तारीफ है. भले ही उनका स्क्रीन टाइम कम हो, लेकिन उनका असर पूरी फिल्म पर दिखता है. अर्जुन रामपाल के साथ बाकी कलाकारों ने भी अपने किरदारों को चार चांद लगा दिए हैं. सारा अर्जुन को बहुत कम स्क्रीन time मिला है, लेकिन राकेश बेदी खूब धमाल करते हुए नजर आते हैं.

डायरेक्शन:

आदित्य धर ने निर्देशन और राइटिंग में इस बार भी कोई कसर नहीं छोड़ी है. फिल्म की रफ्तार इतनी तेज है कि आपको पलक झपकने का मौका नहीं देती. लेकिन यहां असली बाजी मार ले गया है फिल्म का म्यूजिक. इस जासूसी थ्रिलर का संगीत सिर्फ बैकग्राउंड स्कोर नहीं है, बल्कि कहानी की रूह है. फिल्म में हिंसा और खून-खराबा ‘कूट-कूट’ कर भरा गया है—इतना कि कई बार आपको पर्दे से नजरें फेरनी पड़ सकती हैं. लेकिन यहां संगीत एक ‘कूलर’ या ‘फिल्टर’ की तरह काम करता है. जब स्क्रीन पर गोलियां चल रही होती हैं और खून बह रहा होता है, तब संगीत आपको उस डर के बीच थोड़ा सांस लेने की जगह देता है. ये आपको डराने के बजाय कहानी के साथ जोड़े रखता है.

देखें या न देखें?

अगर आप मनोरंजन के नाम पर कुछ ‘सॉलिड’ देखना चाहते हैं, तो ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ वही धमाका है, जिसका हमें इंतजार था. ये फिल्म सिर्फ शोर-शराबा नहीं है, बल्कि एक गहरी और इमोशनल कहानी है, जिसे शानदार तरीके से पर्दे पर उतारा गया है. हालांकि वायलेंस कम किया जा सकता था. लेकिन कमजोर दिल वालों के लिए ये फिल्म नहीं है. तो आप साल 2026 की सबसे बड़ी एक्शन फिल्म का गवाह बनना चाहते हैं, तो ‘धुरंधर 2’ आपके लिए ही बनी है.