निधन से पहले नाना पाटेकर ने किया था हेमा मालिनी को फोन, एक्ट्रेस ने बताया क्यों नहीं हो पाई थी बात
नाना पाटेकर के निधन ने हर किसी को तोड़ दिया है. अब एक्ट्रेस हेमा मालिनी ने खुलासा किया है कि, नाना ने निधन से पहले उन्हें फोन किया था. लेकिन बात नहीं हो पाई थी. चलिए जानते हैं इसकी वजह क्या है?
Hema Malini On Nana Patekar: नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को निधन हो गया है. इसकी वजह से हर कोई सदमे में है. फैंस से लेकर सेलेब्स भी नाना को याद कर भावुक हो रहे हैं और उनके साथ बिताए पलों को भी याद कर रहे हैं. रोहित शेट्टी से लेकर रजा मुराद ने भी नाना के साथ बिताए पलों को शेयर किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी. अब वेटरन एक्ट्रेस हेमा मालिनी का रिएक्शन भी सामने आया है. हेमा ने बताया है कि नाना के निधन की खबर सुनकर उन्हें गहरा सदमा लगा है.
इतना ही नहीं एक्ट्रेस को इस बात का भी अफसोस है कि वो नाना से बात नहीं कर पाईं. हेमा ने खुलासा किया है कि, कुछ समय पहले ही नाना पाटेकर ने उन्हें कॉल किया था. लेकिन एक्ट्रेस फोन नहीं उठा पाई थीं. एक्ट्रेस ने बताया कि, दोनों ने भले ही कभी किसी फिल्म में साथ काम नहीं किया था, लेकिन इसके बावजूद वे एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे.
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नाना का फोन क्यों नहीं उठा पाई थीं हेमा
हेमा मालिनी ने IANS से बातचीत में बताया कि नाना पाटेकर ने हाल ही में उनसे बात की थी और निधन से कुछ दिन पहले दोबारा संपर्क करने की कोशिश भी की थी. उन्होंने कहा, “उन्होंने कुछ दिन पहले मुझे फोन किया था. मेरी उनसे बात भी हुई थी. करीब एक हफ्ते पहले भी उनका एक फोन आया था, ऐसा मुझे याद है. लेकिन किसी वजह से मैं उनका फोन नहीं उठा पाई, क्योंकि मैं सफर कर रही थी.इसलिए जब आज मैंने उनके निधन की खबर सुनी, तो मुझे बहुत बड़ा झटका लगा.”
हेमा ने नाना पाटेकर को बताया अभिनय की संस्था
नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताते हुए हेमा मालिनी ने कहा कि उनके जाने से हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हुआ है. उन्होंने नाना के अभिनय की तारीफ करते हुए कहा कि वह खुद में अभिनय की एक पूरी संस्था थे. हेमा ने कहा, “हमारी फिल्म इंडस्ट्री, हिंदी और मराठी सिनेमा, ने एक बहुत बड़े अभिनेता को खो दिया है. वह खुद में अभिनय की एक संस्था थे.”
Today we have lost an icon of the film industry. Nana Patekar, who has carved a place for himself with his unique acting talent and was hailed as a complete institution of histrionics is no more. He is known for his tireless work for the Naam Foundation, always devoted to the betterment of farmers and the underprivileged. He has left behind a rich legacy of films in Hindi and Marathi that showcase his great talent in a variety of roles. I loved watching his films and his unique approach to his roles. He too has mentioned that I was his favourite actress in classic cinema. The film industry will surely miss this stawart



