डेढ़ महीने से टेंट में उज्जैन के ‘खड़े हनुमान’, रात के अंधेरे में प्रशासन ने की प्रतिमा की स्कैनिंग; भक्तों में आक्रोश
उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर की 8 फीट ऊंची प्रतिमा डेढ़ महीने से टेंट के नीचे है. प्रशासन ने विशेष मशीनों से प्रतिमा की स्कैनिंग की. रात में जांच किए जाने पर समाजसेवी और श्रद्धालुओं ने सवाल उठाए हैं.
Ujjain News: उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर का मामला एक बार फिर गरमा गया है. मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के करीब डेढ़ महीने बाद भी 8 फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा टेंट के नीचे रखी है. सोमवार देर शाम प्रशासनिक अधिकारियों ने विशेष मशीनों से प्रतिमा और उसके आसपास के हिस्से की स्कैनिंग की. इस कार्रवाई को लेकर श्रद्धालुओं ने सवाल उठाए हैं और प्रशासन से अपनी मंशा स्पष्ट करने की मांग की है.
रात के अंधेरे में क्यों की गई प्रतिमा की स्कैनिंग?
बता दें कि कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण के लिए खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई की गई थी. मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के बाद से ही 8 फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा टेंट के नीचे है. अब सोमवार देर शाम प्रशासन की टीम विशेष मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ मंदिर पहुंची और प्रतिमा की स्कैनिंग की.
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जानकारी के मुताबिक, एसडीएम एलएन गर्ग समेत अन्य अधिकारी करीब एक से डेढ़ घंटे तक मौके पर मौजूद रहे. इस दौरान प्रतिमा और उसके आसपास के हिस्से की जांच की गई. स्कैनिंग के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रतिमा का आधार जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है और उसके नीचे की संरचना कैसी है. हालांकि जांच पूरी होने के बाद भी प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रतिमा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे.
स्कैनिंग को लेकर समाजसेवी ने उठाए सवाल
समाजसेवी संतोष व्यास ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रतिमा की जांच रात के अंधेरे में और बिना सार्वजनिक जानकारी दिए क्यों की गई? यदि प्रशासन को प्रतिमा और उसके आधार की जांच करनी थी तो यह काम पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि देर शाम अधिकारियों की टीम के पहुंचने और स्कैनिंग करने से श्रद्धालुओं के मन में कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं. प्रशासन को प्रतिमा को लेकर अपनी मंशा स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि लोगों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे.
स्कैनिंग के दौरान उपकरणों की बैटरी डिस्चार्ज हो गई!
संतोष व्यास ने दावा किया कि जांच के दौरान कुछ जगहों पर उपकरण लगाने के बाद उनकी बैटरी अचानक डिस्चार्ज हो गई. इसके बाद अधिकारियों को उपकरण दोबारा चार्ज करने पड़े. उन्होंने यह भी कहा कि स्कैनिंग से जुड़े दस्तावेज और रिपोर्ट उन्होंने अधिकारियों से प्राप्त किए हैं, ताकि जांच से संबंधित रिकॉर्ड उनके पास मौजूद रहे.
संतोष व्यास का कहना है कि मंदिर की प्रतिमा पिछले डेढ़ महीने से टेंट के नीचे है. ऐसे में प्रशासन को पुजारी और मंदिर से जुड़े जिम्मेदार लोगों के साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए और जल्द समाधान निकालना चाहिए. उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अब ज्यादा समय तक भगवान हनुमान की प्रतिमा को टेंट के नीचे नहीं रहने देना चाहते.
मंदिर का मुख्य ढांचा हटाया गया था
खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई 30 अगस्त 2026 को शुरू करने का प्रयास किया गया था. हालांकि श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों के विरोध के चलते कार्रवाई रोकनी पड़ी. इसके बाद 1 सितंबर को प्रशासनिक टीम दोबारा मौके पर पहुंची. करीब 16 घंटे तक चली कार्रवाई में मंदिर का शिखर और ऊपरी हिस्सा हटाया गया.
इसके बाद 4 सितंबर को मंदिर का मुख्य ढांचा भी हटा दिया गया. प्रशासन की योजना प्राचीन प्रतिमा को टंकी चौक के पास बनाए गए नए मंदिर में स्थापित करने की थी, लेकिन प्रतिमा को स्थानांतरित करने से पहले उसकी संरचना और जमीन के अंदर मौजूद आधार की जांच की जा रही है.




