एपल पर CCI का बड़ा एक्शन, सौंपेगा फाइनेंशियल डेटा, लग सकता है भारी जुर्माना
भारत में एपल के खिलाफ चल रही एंटीट्रस्ट जांच अब तेज हो गई है. कंपनी ने CCI को वित्तीय डेटा देने पर सहमति जताई है जिससे मामला जुर्माने की दिशा में बढ़ सकता है. ऐप स्टोर और पेमेंट सिस्टम पर चल रही यह जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है.
एपल को लेकर भारत में चल रही एंटीट्रस्ट जांच अब एक अहम मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) को अपनी भारत से जुड़ी फाइनेंशियल जानकारी देने पर सहमति जता दी है. यह जांच एपल के ऐप स्टोर प्रैक्टिस और इन ऐप पेमेंट नियमों को लेकर चल रही है. माना जा रहा है कि इस डेटा के आधार पर आगे चलकर कंपनी पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
CCI को मिलेगा एपल का वित्तीय डेटा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एपल ने भारतीय कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया को अपनी फाइनेंशियल जानकारी देने पर सहमति दी है. यह जानकारी ऐप स्टोर से जुड़ी जांच के लिए बेहद अहम मानी जा रही है. सीसीआई का मानना है कि एपल ने अपने मार्केट पावर का गलत इस्तेमाल किया हो सकता है. कंपनी ने 21 मई की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त समय मांगा था और 25 जून तक डेटा देने की अनुमति मिली. यह डेटा जांच को आगे बढ़ाने और संभावित जुर्माने का आधार तय करने में मदद करेगा. यह मामला एपल के लिए भारत में अब तक के सबसे बड़े रेगुलेटरी चैलेंज में से एक माना जा रहा है.
ऐप स्टोर और पेमेंट सिस्टम पर जांच
यह जांच एपल के ऐप स्टोर प्रैक्टिस पर केंद्रित है, जिसमें आरोप है कि कंपनी ने आईफोन ऐप इकोसिस्टम में अपनी मजबूत स्थिति का गलत फायदा उठाया. सीसीआई के अनुसार एपल ऐप डेवलपर्स को सीमित विकल्प देता है क्योंकि ऐप स्टोर ही आईफोन यूजर्स तक पहुंच का मुख्य माध्यम है. इसके अलावा कंपनी पर इन ऐप पेमेंट नियमों को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिसमें डेवलपर्स को एपल के पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ता है. यह जांच 2021 में शुरू हुई थी, जब टिंडर और ADIF जैसी संस्थाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी. एपल इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है और अपनी स्थिति का बचाव करता है.
भारत के डिजिटल इकोसिस्टम पर असर
इस मामले का असर भारत के ऐप इकोसिस्टम और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर बड़ा हो सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक एपल भारत में तेजी से ग्रो कर रहा है और इसकी स्मार्टफोन मार्केट में हिस्सेदारी लगभग 2 प्रतिशत से बढ़कर करीब 9 प्रतिशत तक पहुंच गई है. अगर सीसीआई का फैसला एपल के खिलाफ आता है तो इससे ऐप डेवलपर्स और स्टार्टअप्स को ज्यादा आजादी खासकर पेमेंट सिस्टम और ऐप डिस्ट्रीब्यूशन के मामलों में मिल सकती है. यह फैसला भारत में डिजिटल नियमों और टेक कंपनियों की पॉलिसी पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है.
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