राम मंदिर चढ़ावे को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद, क्यों उठ रहे सवाल और क्या है पूरी कहानी?

राम मंदिर चढ़ावे को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद, क्यों उठ रहे सवाल और क्या है पूरी कहानी?

अयोध्या राम मंदिर में करोड़ों के चढ़ावे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. दानपात्र में गड़बड़ी और करोड़ों रुपये के हेरफेर के आरोपों ने राजनीतिक व धार्मिक जगत में हलचल मचा दी है. अखिलेश यादव ने जांच की मांग की है, वहीं राम मंदिर ट्रस्ट आरोपों को खारिज कर रहा है. मामले की जांच और ऑडिट पर चर्चाएं तेज हैं.

अयोध्या का राम मंदिर, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र, लेकिन अब इसी मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे सवालों ने देश की राजनीति और धार्मिक जगत में हलचल मचा दी है. आरोप हैं कि राम मंदिर के दानपात्र में चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चंदे में गड़बड़ी हुई. विपक्ष सवाल उठा रहा है तो राम मंदिर ट्रस्ट आरोपों को खारिज कर रहा है, जबकि जांच और ऑडिट की चर्चाएं हैं. आखिर क्या है पूरा मामला? कैसे शुरू हुआ यह विवाद? कौन-कौन से दावे किए जा रहे हैं?

22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु रोज रामलला के दर्शन करने पहुंच रहे हैं. श्रद्धालुओं की ओर से नकद दान, सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं भी बड़ी मात्रा में चढ़ाई जा रही हैं. इसका हिसाब-किताब ट्रस्ट के लोग और SBI की ओर से नामित एक एजेंसी करती है. बीते दिनों ही राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर सवाल उठने लगे. आरोप लगा कि चढ़ावे की गणना के दौरान कुछ गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं.

3 करोड़ के चढ़ावे की गिनती से खुला राज

इस महीने की शुरुआत में दान के पैसे के गायब होने की सूचना ट्रस्ट के अधिकारियों को तब हुई जब किसी दानदाता के द्वारा लगभग 3 करोड़ की राशि रामलला को दान दी गई. आरोप ये है कि जब दान की 3 करोड़ की राशि की गिनती की गई, तब उसमें कुछ रकम कम मिले. इसके बाद दान के रुपये गायब होने की बात ट्रस्ट के पदाधिकारियों को बताई गई. सूत्रों का कहना है कि इस मामले को लेकर दो पदाधिकारियों में नोकझोंक भी हुई.

इसके बाद इस पूरे मामले की जानकारी शासन स्तर के अधिकारियों को दी. इसके बाद लखनऊ से एक टीम आनन-फानन में 7 जून को अयोध्या पहुंची और देर रात तक ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ राम जन्मभूमि परिसर में ही बैठक की. इस बैठक तक मामला गोपनीय था. शाम होते-होते तक इसकी भनक स्थानीय सपा नेताओं को लग गई. उन्होंने पूरा मामला अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंचा दिया.

अखिलेश ने ट्वीट करके लगाया आरोप

इस विवाद को राजनीतिक रंग तब मिला जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए राम मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर सवाल उठाए. अखिलेश यादव ने दावा किया कि मंदिर में चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के हिसाब-किताब को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उनकी पोस्ट के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया.

गिनती से जुड़े कुछ कर्मचारियों पर शक

विवाद बढ़ने के साथ ही कई मीडिया रिपोर्ट्स सामने आने लगीं. इन रिपोर्टों में दावा किया गया कि दानपात्र में जमा धनराशि की गणना के दौरान कथित तौर पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये का अंतर सामने आया. कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि गणना प्रक्रिया से जुड़े कुछ कर्मचारियों पर शक जताया गया है और उनसे पूछताछ की गई. हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है और जांच को लेकर आधिकारिक जानकारी सीमित रही है.

एक कर्मचारी के खाते में मिले 5 लाख रुपये

कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि पुलिस ने आधा दर्जन लोगों से पूछताछ की, जो चढ़ावे के पैसे की देखरेख करते थे. जांच के दौरान एक कर्मचारी के बैंक खाते से पांच लाख रुपये ट्रस्ट के खाते में वापस जमा कराए गए. हालांकि, अयोध्या पुलिस कोई भी बयानबाजी करने से बच रही है. उसका कहना है कि हमें इस मामले में कोई तहरीर नहीं मिली. वहीं सूत्रों का कहना है कि पुलिस की ओर से मामले की जांच की जा रही है और कई लोगों को हिरासत में लिया गया है.

अखिलेश के आरोप पर चंपत राय का इनकार

राम मंदिर के चढ़ावे में धांधली के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सफाई भी आई. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि मंदिर की आय और दान राशि का नियमित ऑडिट होता है, जिसमें ट्रस्ट के लोग और SBI के प्रतिनिधि होते हैं. चंपत राय ने स्पष्ट किया कि अब तक ऑडिट में किसी बड़े गबन या हेराफेरी की पुष्टि नहीं हुई है, सभी वित्तीय प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जाती हैं और पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाता है.

अचानक अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्रा

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अचानक अयोध्या पहुंच गए. दिलचस्प बात यह रही कि उनकी पहले से प्रस्तावित समीक्षा बैठक 13 जून को होनी थी, लेकिन विवाद के बीच उन्होंने कार्यक्रम बदल दिया और तत्काल अयोध्या पहुंचे. सूत्रों का कहना है कि अयोध्या पहुंचकर नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की. यह कई घंटों तक चली.

पीयूष गोयल बोले- अखिलेश पर किसी को विश्वास नहीं

हालांकि बाहर निकलते समय नृपेंद्र मिश्र ने मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया और केवल इतना कहा कि उनका दौरा मंदिर निर्माण कार्यों की समीक्षा के लिए है. सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा सामने आई कि केंद्र और राज्य सरकार के साथ RSS पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं. वहीं इस मामले में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अखिलेश यादव को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनको न तो यूपी की जनता सीरियस लेती है और न ही उस पर किसी को विश्वास होता है.

अखिलेश ने फिर लगाए आरोप

इस बीच विपक्ष लगातार हमलावर बना रहा. अखिलेश यादव ने कई पोस्ट के जरिए कहा कि ट्रस्ट की तरफ से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं की जा रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो फिर जांच और पूछताछ की खबरें क्यों सामने आ रही हैं. दूसरी तरफ भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया. उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और बिना प्रमाण के आरोप लगाना उचित नहीं है. उन्होंने विपक्ष पर सनातन विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया.

ट्रस्टी महंत बोले- राम जी दंड दे देंगे

हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया. इसी दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास का एक बयान चर्चा में आया. उन्होंने कहा, ‘हमको राम जी की परंपरा पर विश्वास है… जो भी अगर उसमें किसी प्रकार का कुछ होगा तो राम जी स्वयं उसका निर्णय देंगे… उसको राम जी दंड दे देंगे.’ यह बयान सामने आने के बाद चढ़ावे को लेकर हो रहे इस विवाद को और बल मिला.

ट्रस्ट के अध्यक्ष के उत्तराधिकारी बोले- जांच होनी चाहिए

राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उन्हें आरोपों की विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जो भी दोषी पाया जाए उसे दंडित किया जाना चाहिए, जिसकी साइकिल पर चलने का ठिकाना नहीं था, आज बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बन गई हैं. पैसा कहां से आया, इसकी जांच होनी चाहिए.

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महंत कमल नयन दास ने कहा, जो दोषी पाया जाए उसको दंड मिलना चाहिए. जांच होनी चाहिए और दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए. महंत कमल नयन दास ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि समाज में ऐसे कई लोग हैं जिनकी आर्थिक स्थिति पहले साधारण थी, लेकिन आज उनके पास बड़ी-बड़ी संपत्तियां और भवन हैं. उन्होंने कहा कि यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि आखिर यह संपत्ति कहां से आई.’

उत्तराधिकारी ने की न्यायिक जांच की मांग

महंत कमल नयन दास ने न्यायिक जांच की मांग भी उठाई. उनका कहना है कि लगातार लग रहे आरोपों से राम मंदिर और संत समाज की छवि प्रभावित हो रही है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके. उन्होंने यह भी कहा कि 19 तारीख से शुरू होने वाले महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव कार्यक्रम के दौरान संत समाज के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की जाएगी.

मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी ने भी लगाए आरोप

मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी होने का दावा करने वाले महिपाल सिंह का आरोप है, ‘मंदिर में चोरी कोई नई बात नहीं थी, यह रोजाना होती थी. मैंने खुद चोरी पकड़ी थी.इसकी शिकायत चंपत राय और गोपाल जी से की थी. अगले ही दिन चंपत राय ने मुझे हटा दिया. मंदिर में लगे CCTV कैमरों की 8 महीने पुरानी फुटेज डिलीट करवा दी गई. चंपत राय अव्यवस्था पसंद व्यक्ति हैं. मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं में मनमर्जी चलाते हैं. अगर कोई विरोध करता है, तो उसे हटा दिया जाता है.

मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी को लेकर सवाल

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सीसीटीवी निगरानी को लेकर भी उठ रहा है. राम मंदिर परिसर अत्याधुनिक सीसीटीवी और एआई आधारित कैमरों से लैस है. दानपात्रों की निगरानी और गणना प्रक्रिया भी कैमरों के दायरे में होती है. ऐसे में सवाल यह उठाया जा रहा है कि यदि कोई अनियमितता हुई तो वह कैमरों में कैसे नहीं दिखी और यदि कोई तकनीकी खामी थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है.

शंकराचार्य और बृजभूषण शरण सिंह ने क्या कहा था?

इस बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गुरुवार को एटा में कहा, ‘राम मंदिर में शीला पूजन के समय से ही चोरी हो रही है. कितने आरोप लग चुके हैं, जब मंदिर बनने लगा तो प्लॉट बिकने लगे. दो-दो मिनट में प्लॉट करोड़ में हो जाते थे. वहां पहले से ही चंपत राय बैठे हैं. चंपत का मतलब ही होता है लेकर भाग जाना.’ इससे पहले कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा था कि मैं अगर सच बोल दूंगा तो परेशानी में आ जाऊंगा.’

कर्मचारियों के बैंक खाते खंगालने पर सच्चाई का होगा खुलासा

नाम न उजागर करने की शर्त पर ट्रस्ट के करीबी एक शख्स ने TV9 को जानकारी दी कि अगर ट्रस्ट में दान के पैसों की गिनती करने वाले कर्मचारियों की आय की जांच की जाए तो इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, इन सभी कर्मचारियों की अगर दो से तीन साल के बैंक अकाउंट की जांच की जाएं तो धांधली का आंकड़ा चौंकाने वाला हो सकता है. फिलहाल, इस मामले में पुलिस की गोपनीय जांच चल रही है, लेकिन सबकुछ अभी अनऑफिशियल ही है.

विनय कटियार भी पहुंचे अयोध्या

इस बीच राम मंदिर आंदोलन से जुड़े भाजपा नेता और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार लखनऊ से अयोध्या पहुंचे हैं. उन्होंने कहा, ‘जिस तरह के आरोप सामने आ रहे, उनकी सच्चाई सामने आनी चाहिए. इसलिए जांच जरूरी है. जब मामला करोड़ों लोगों की श्रद्धा और विश्वास से जुड़ा हो, तब पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होती है.जांच होगी तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी. मैं इसकी जानकारी लेने आया हूं.’

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पंकज चतुर्वेदी
पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी पिछले 11 साल से देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुवात हुई. दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अदंर की खबर को बाहर लाने का हुनर के साथ ही यूपी के ब्यूरोकेसी में खास पकड़ रखते हैं. इनकी पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही आप तक पहुंचाना है.

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