‘साख का सवाल’, होर्मुज पर कंट्रोल करने के लिए कभी भी युद्धविराम तोड़ सकते हैं ट्रंप?
अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट से सी माइन्स हटाने का ऑपरेशन शुरू कर सकता है. इसके लिए पेंटागन ने ब्लूप्रिंट बना लिया है. कई नाटो देश भी इस ऑपरेशन में शामिल हो सकते हैं. तीन चरणों में ये ऑपरेशन किया जा सकता है.
होर्मुज की लहरों पर महासंग्राम का दूसरा दौर सवार होने वाला है. ट्रंप अपनी साख को बचाने के लिए और होर्मुज पर कंट्रोल करने के लिए कभी भी युद्धविराम तोड़ सकते हैं. ईरान का दावा है कि सात से ज्यादा शहरों में रहस्यमयी विस्फोट के पीछे अमेरिका है. जिसका बदला लेने के लिए ईरान भी पलटवार कर सकता है. जबकि अमेरिका की तरफ से संकेत मिला है कि वो होर्मुज से सी माइन्स हटाने का ऑपरेशन शुरू करने वाला है. इस वजह से ईरान ने युद्धपोत की तैनाती बढ़ा दी है और निगरानी के लिए सर्वेलेंस ड्रोन लगा दिए हैं, जिससे होर्मुज फिर से धधक सकता है.
अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट से सी माइन्स हटाने का ऑपरेशन शुरू कर सकता है. इसके लिए पेंटागन ने ब्लूप्रिंट बना लिया है. कई नाटो देश भी इस ऑपरेशन में शामिल हो सकते हैं. तीन चरणों में ये ऑपरेशन किया जा सकता है.
- पहले चरण में सी माइन्स के पास सेफ पैसेज बनाया जाएगा, जिससे माइन स्वीपर शिप होर्मुज में सी माइन्स के पास पहुंच जाए. इस दौरान सैटेलाइट से निगरानी की जाएगी.
- दूसरे चरण में होर्मुज क्लीनिंग की तैयारी है. जिसमें युद्धपोत से सी माइन्स एरिया को घेरा जाएगा. और फिर सी माइन्स डिटेक्ट की जाएंगी, जिससे उन्हें नष्ट किया जा सके.
- तीसरे चरण में माइन्स को नष्ट करने का ऑपरेशन शुरू होगा. इसके लिए सोनार तकनीक का इस्तेमाल होगा. सी ड्रोन या टॉरपीडो का इस्तेमाल करके सभी सी माइन्स को ध्वस्त कर दिया जाएगा.
सोच समझकर की सी माइन्स की पोजिशनिंग
ईरान ने होर्मुज में सी माइन्स को पोजिशनिंग बेहद सोच समझकर की है. जिससे ऑयल टैंकर तभी एंट्री कर पाएं, जब वह मंजूरी दे. ईरान ने जीपीएस के जरिए लोकेशन बदलने वाली सी माइन्स भी होर्मुज में लगाई हैं. जबकि दूसरे तरह की सी माइन्स पूरे होर्मुज में बिछी हैं.
सी माइन्स से पटा होर्मुज
ईरान ने ओमान के मसनदम द्वीप से लेकर लारक द्वीर तक, फिर होर्मुज द्वीप और आगे बंदर अब्बास पोर्ट तक सी माइन्स लगाई हैं. यानी होर्मुज को पूरा सी माइन्स से पाट दिया है. खास बात ये कि अगर ईरान मंजूरी देता है तो किसी भी टैंकर के लिए सी माइन्स शिफ्ट होकर सेफ पैसेज देती हैं. लेकिन अगर जबरन घुसने की कोशिश की तो सी माइन्स फट जाती हैं. साथ ही टैंकर का पीछा करके भी उसे ध्वस्त कर देती हैं. इसके लिए ईरान के सी ड्रोन और सर्वेलेंस ड्रोन निगरानी रख रहे हैं.
अमेरिका ने युद्धविराम तोड़ा
होर्मुज और बंदरअब्बास में स्पेशल कमांड सेंटर बनाया गया है. जहां से होर्मुज में हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. यहां तक कि आगे ओमान की खाड़ी तक भी ईरानी ड्रोन पहुंच रहे हैं. जहां अमेरिका की नाकाबंदी की तस्वीरें भी ईरान के पास पहुंच रही हैं. ईरान के सात शहरों में विस्फोट हुए हैं. ईरान का दावा है, अमेरिका ने युद्धविराम तोड़ दिया है. जहां विस्फोट हुए हैं उनमें तेहरान है, जहां 5 विस्फोट हुए, इस्फहान में 3 धमाके, कुम में 2 विस्फोट जबकि करज में 2 धमाके, शहरयार में 1 विस्फोट, चितगार में 1 धमाका, नतांज में 2 विस्फोट से ईरान दहल गया.
धमाकों से तिलमिलाया ईरान
सात से ज्यादा शहरों में धमाकों से ईरान तिलमिला उठा है. ईरान से सीधे तौर पर युद्धविराम का उल्लंघन बता रहा है. दावा कर रहा है कि तमाम विस्फोट के पीछे अमेरिका है. अमेरिका ने दावा किया है कि ईरान किसी बड़े ऑपरेशन की तैयारी में जुटा है. इसी वजह से वो वार्ता के लिए तैयार नहीं है.
रहस्यमयी धमाकों का बदला
ऐसी आशंका है कि ईरान में हुए रहस्यमयी धमाकों का बदला ईरान ने सैबटाज हमले करके लिया है. क्योंकि धमाकों के कुछ वक्त बाद ही USS जमवाल्ट में आग लग गई. ज़ुमवाल्ट मिसिसिपी के पास्कागौला शिपयार्ड में था. जबकि इससे पहले USS फोर्ड में भी आग लगी थी. USS Zumwalt और USS Ford जैसे जहाजों के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को किसी ‘मैलवेयर’ या साइबर हमले के जरिए निशाना बनाये जाने की आशंका है.
साइबर हमले की धमकी
जिससे शॉर्ट सर्किट या ओवरहीटिंग के कारण आग लग गई हो. ईरान साइबर हमले की धमकी भी दे चुका है. यानी सीजफायर के बीच अब सैबटाश हमलों का दौर भी शुरू हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका बड़े संकट में फंस गया है और जिसके केंद्र में होर्मुज है. जिसको लेकर तनाव अरब से यूरोप तक जा पहुंचा है.



