IKKA एक्टर सनी देओल पहले Flop हीरो कहे जाते थे! अब 68 की उम्र में दे रहे टक्कर, कब-कैसे मिली कामयाबी?
सनी देओल फिर से चर्चा में हैं. इक्का से ओटीटी पर भी आ गए हैं. सनी देओल का एक्शन सुपरहिट है. उनका डायलॉग लोकप्रिय होता है. लेकिन एक समय ऐसा भी था जब सनी देओल की एक्टिंग में दर्शकों को दम नहीं दिखता था. उनकी पर्सनाल्टी में एक्शन की यूएसपी की खोज सबसे पहले किसने की.
सनी देओल आज बॉक्स ऑफिस पर गदर मचाने वाले अभिनेता बन चुके हैं. अब उन्होंने ओटीटी पर भी धमाका कर दिया है. नेटफ्लिक्स पर इक्का रिलीज होते ही सनी देओल की परफॉर्मेंस एक बार फिर सुर्खियों में है. उनके साथ अक्षय खन्ना भी हैं. सिद्धार्थ पी. मलहोत्रा के निर्देशन में आई इक्का कोर्ट रूम ड्रामा है और इसमें सनी देओल एक बार फिर वकील बने हैं. जी हां, वकील, जिस किरदार को निभाकर बॉक्स ऑफिस पर उनकी काया ही पलट गई. सन् 1993 की दामिनी में वकील गोविंद श्रीवास्तव के रोल में तारीख पे तारीख… डायलॉग बोलकर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड और फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था.
इसके बाद तो सिल्वर स्क्रीन पर सनी की सनसनी ही फैल गई. करियर की कायापलट हो गई. लेकिन आज बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि एक वक्त सनी देओल फ्लॉप एक्टर कहे जाते थे. उनकी फिल्में बमुश्किल ही लागत निकाल पाती थीं. पिता धर्मेंद्र निराश हो गए थे. अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ या आमिर खान और सलमान खान जैसे सितारों के सामने सनी का प्रभाव बहुत ही फीका था. सनी को सफलता पाने में बहुत संघर्ष करना पड़ा था.
जैकी, अनिल के सामने कैसे थे सनी?
ये कहानी नब्बे के दशक की शुरुआती सालों की है. अमिताभ बच्चन, जितेंद्र, ऋषि कपूर, मिथुन चक्रवर्ती का जलवा था. सन् 1981 से हिंदी फिल्म के दर्शकों को कुछ नये चेहरे देखने को मिले. स्टार किड्स में कुमार गौरव और संजय दत्त ने डेब्यू कर दिया था, लेकिन पहली पीढ़ी के सितारों के दबदबे को नहीं तोड़ पाए थे. तभी करीब दो साल बाद सन् 1983 में सनी देओल ने बेताब से डेब्यू किया. वहीं मशाल से अनिल कपूर तो हीरो से जैकी श्रॉफ. संयोगवश ये तीनों ही फिल्में चलीं.
लेकिन सनी का रुतबा कायम नहीं रह सका. जबकि जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर ने धीरे-धीरे शोहरत की बुलंदियों को छूना शुरू कर दिया. बेताब के बाद सनी देओल और पूनम ढिल्लन की क्लासिक लव स्टोरी आई- सोहिनी महिवाल. गानों की वजह से इसने ठीक-ठाक चर्चा बटोर ली परंतु ना तो सनी देओल और ना ही पूनम ढिल्लन को इससे कोई फायदा हुआ. उधर जैकी और अनिल की हिट फिल्मों का ग्राफ तेजी से बढ़ता गया और सनी साइडलाइन होते गए.
फ्लॉप होकर भी मौका मिलता रहा
लगातार फ्लॉप होने के बावजूद सनी के साथ एक बड़ी खासियत थी, जो बाद के दिनों में यूएसपी बनी. वह थी उनकी पर्सनाल्टी और आंखों से बरसता खौफ. वह धर्मेंद्र जैसे बड़े सितारे के बेटे थे, लिहाजा उनको मौके मिलते गए. 1990 तक उन्होंने कई फिल्में की, मसलन जबरदस्त, अर्जुन, सल्तनत, यतीम आदि. ये सभी के सभी फ्लॉप. इसके बाद सनी को मल्टी स्टारर फिल्में मिलीं, मसलन त्रिदेव, जोशीले, वर्दी और चालबाज आदि. सहयोगी कलाकारों जैसे कि जैकी श्रॉफ, अनिल कपूर, श्रीदेवी या रजनीकांत के सहारे ये फिल्में चल गईं और इन्हीं में सनी के एक्शन की खोज की गई.
हालांकि अब तक भी सनी को वो मौका नहीं मिला था, जो उनके करियर को चार चांद लगा दे. सनी को थोड़ा बहुत मौका मिलने भी लगा तभी नये सितारों की फेहरिस्त आ गई. ये सितारे हैं- गोविंदा, सलमान खान, आमिर खान और शाहरुख खान आदि. ये सभी कलाकार आते ही युवाओं की पसंद बन गए. सनी फिर पिछड़ गए.
लव स्टोरीज के उलट एक्शन फिल्में मिलीं
सन् 1990 तक आते-आते अमिताभ बच्चन, जितेंद्र, ऋषि कपूर, मिथुन चक्रवर्ती जैसे सितारों के बदले नये कलाकारों पर फोकस किया जाने लगा था. कहानी का मिजाज भी बदला. गोविंदा, शाहरुख, सलमान की फिल्मों में प्रेम कहानियां नए अंदाज में आने लगी थीं. इसी दौर में सबसे पहली बार राजकुमार संतोषी ने सनी देओल की पर्सनाल्टी में वो आग देखी, जिसकी उन्हें अपनी फिल्म के लिए तलाश थी. सन् 1990 की घायल में अजय मेहरा के रोल ने सनी को सबसे पहली बार सनसनी मचाने का मौका दिया.
महज दो दशक पहले फिल्मी पर्दे पर अमिताभ बच्चन का गुस्सा सबसे ज्यादा सुपरहिट था, लेकिन अब सनी देओल के गुस्से मार्केटिंग होने लगी. चीखकर संवाद बोलने का उनका अंदाज तब के युवाओं को पसंद आ गया. उनके गुस्सैल डायलॉग जोश जगाने वाले साबित हुए. यही समय था जब एन चंद्रा जैसे डायरेक्टर ने भी नरसिम्हा में उन्हें उभरने का पूरा मौका दिया. कोई हैरत नहीं कि सनी ने मौके का पूरा फायदा उठाया. ये फिल्में सुपरहिट साबित हुईं.
दामिनी के वकील वाले रोल से चमके सनी
इसके बाद राजकुमार संतोषी ने दोबारा दामिनी में सनी को वकील गोविंद श्रीवास्तव बनाया. इस फिल्म में सनी तारीख पर तारीख…डायलॉग बोलकर अमर हो गए. सनी देओल का जादू चल गया. तारीख पर तारीख… डायलॉग जब जब दोहराया गया, तब तब सनी देओल चर्चा में आए. कहते हैं कुछ संवाद और सीन किसी कलाकार के करियर में हमेशा के लिए प्रमोशनल बन जाते हैं, सनी के लिए यह डायलॉग लकी साबित हुआ.
उसके बाद तो उनके ढाई किलो के हाथ वाले डायलॉग हों या बॉर्डर के रोल या फिर गदर में हैंडपंप उखाड़ने वाला सीन…सनी की शख्सियत में ये सबकुछ हमेशा के लिए चस्पां हो गए. अब सनी की जितनी भी फिल्में आती हैं, चाहे जाट हो या बॉर्डर 2 या फिर इक्का- लोग उन्हें जोशीले किरदार में ही देखना पसंद करते हैं. सनी जोश और गुस्सा का पर्याय बन चुके हैं,
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