इस्कॉन ब्रिज हादसा: तथ्य पटेल को सुप्रीम कोर्ट से मिली नियमित जमानत, भयावह दुर्घटना में गई थी 9 की जान
अहमदाबाद के इस्कॉन ब्रिज हादसे के आरोपी तथ्य पटेल को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है. इस भयावह दुर्घटना में 9 लोगों की जान गई थी. लगभग साढ़े तीन साल जेल में बिताने के बाद तथ्य पटेल रिहा होंगे. यह फैसला मामले को फिर चर्चा में लाया है.
अहमदाबाद में जुलाई 2023 में इस्कॉन पुल हादसा हुआ था. इसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी. इस केस में आरोपी तथ्य पटेल को अब सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है. इस फैसले के साथ तथ्य पटेल हादसे के बाद करीब साढ़े तीन साल जेल में बिताने के बाद जमानत पर रिहा हो जाएंगे. इससे पहले फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए निचली अदालत को मई तक करीब 25 गवाहों से पूछताछ करने का निर्देश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर पूरे गुजरात में चर्चा का विषय बन गया है. इस्कॉन ब्रिज पर हुआ यह भयावह हादसा राज्य के सबसे चर्चित सड़क हादसों में से एक माना जाता है. हादसे के बाद घटनास्थल का मंजर देखकर लोग आक्रोशित और दुखी थे. सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर काफी चर्चा हुई थी. साथ ही सख्त कार्रवाई की मांग उठी थी.
शर्तों के साथ सुप्रीम कोर्ट से मिली नियमित जमानत
इसके बाद पुलिस ने इस केस में आरोपी तथ्य पटेल के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. उधर, केस के दौरान तथ्य पटेल ने विभिन्न अदालतों में जमानत याचिकाएं दायर की थीं लेकिन मामले की गंभीरता और दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि को देखते हुए उन्हें राहत नहीं मिली. अब सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ नियमित जमानत दे दी है. हालांकि जमानत मिलने के बाद भी आरोपी को अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा.
अभी भी कई महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ बाकी
इस मामले की सुनवाई वर्तमान में जारी है. निचली अदालत में गवाहों से पूछताछ, बयान दर्ज करना और सबूत पेश करना चल रहा है. पता चला है कि इस मामले में अभी भी कई महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ बाकी है. अदालत में पेश किए गए सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर आने वाले समय में यह मामला एक महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है. उधर, इस्कॉन ब्रिज दुर्घटना मामले को लेकर लोगों में अभी भी काफी भावनाएं उमड़ रही हैं. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबकी निगाहें निचली अदालत की कार्यवाही और अंतिम फैसले पर टिकी हैं.




