Exclusive: 4 शहर, चार कहानियां…छोटे बजट की ‘लवरेज़’ में क्या है खास? डायरेक्टर मनोज कृष्ण ने बताया
पत्रकार से फिल्ममेकर बने मनोज कृष्ण अपनी फिल्म 'लवरेज़' को लेकर चर्चा में हैं. ये फिल्म चार शहरों की चार कहानियां कहती है. निर्देशक ने इस फिल्म के बारे में टीवी9 हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत की है.
LoveRays Director Interview: सिनेमा का इतिहास हमेशा बड़े बजट और स्थापित सुपरस्टार्स के नाम से नहीं, बल्कि दिल को छू लेने वाली कहानियों के दम पर भी बदलता है. हाल ही में जब सीमित बजट में बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 400 करोड़ का कारोबार करते हुए 200 गुना मुनाफे का नया कीर्तिमान स्थापित किया, तो बॉलीवुड के ट्रेड पंडितों को समझ आ गया कि दर्शक अब सिर्फ चकाचौंध नहीं, बल्कि मिट्टी से जुड़ी कहानियां देखना चाहते हैं. अब इसी उम्मीद और नए सिनेमा की राह पर चल पड़े हैं फिल्म ‘लव रेज़’ के लेखक और निर्देशक मनोज कृष्ण.
बीएचयू से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद 7 साल तक दिल्ली में सक्रिय पत्रकार रहे और अब लेखक-निर्देशक बने मनोज कृष्ण ने समाज के उन अनदेखे पन्नों को अपनी फिल्म की शक्ल दी है जो सीधे रूह को छूते हैं. दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता और मथुरा इन चार शहरों में रची-बसी चार अलग-अलग कहानियों को समेटे इस एंथोलॉजी फिल्म ‘लवरेज़’ को लेकर निर्देशक मनोज कृष्ण ने टीवी9 हिंदी डिजिटल के साथ की एक्सक्लूसिव बातचीत की और फिल्म के बारे में कई दिलचस्प खुलासे किए.
सवाल: ‘हनुमान: अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. क्या आपकी फिल्म ‘लवरेज़’ भी उसी उम्मीद और बदलाव से प्रेरित है?
जवाब: देखिए, ‘हनुमान अंश’ एक धार्मिक फिल्म थी और हमारी फिल्म सामाजिक ताने-बाने पर आधारित है, लेकिन दोनों के बीच एक बहुत बड़ा साझा धागा है और वो है कंटेंट की ताकत! एक दौर था जब कॉर्पोरेट्स हमारी पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर हावी थे और माना जाता था कि सिर्फ बड़े सितारे ही पैसा ला सकते हैं. लेकिन ‘हनुमान अंश’ ने 2 करोड़ का 400 करोड़ बनाकर दिखा दिया कि अगर कहानी में सच्चाई है, तो दर्शक दिल खोलकर प्यार देते हैं. आज का दर्शक मैच्योर हो चुका है, वह स्टार सिस्टम से आगे निकल चुका है. हमारी फिल्म ‘लवरेज़’ भी उसी भरोसे के साथ बनाई गई है.

निर्देशक-लेखक मनोज कृष्ण (बाएं- फिल्म के पोस्टर के साथ)
सवाल: फिल्म का नाम ‘लवरेज़’ है. चर्चा है कि इसमें एक नहीं, बल्कि चार अलग-अलग शहरों की दास्तान है. ये चार कहानियां क्या हैं?
जवाब: ये फिल्म नारी-प्रधान है और किसी एक जॉनरा में बंधी नहीं है. हमने देश के चार अलग-अलग प्रदेशों से चार वास्तविक और झकझोरने वाली कहानियां चुनी हैं.
कोलकाता की कहानी: ये एक सिंगल मदर और उसकी दृष्टिहीन टीनेजर बेटी के संघर्ष की दास्तान है. मां को जब बच्ची देख नहीं पाती, तो उसकी सुरक्षा की चिंता और बढ़ जाती है. एक साहसी मां कैसे अपनी बच्ची को महफूज रखती है, इसमें ये दिखाया गया है.
मुंबई की की कहानी: मायानगरी में अकेलेपन का दंश झेलते दो अनजान लोगों की कहानी है. मुंबई में नौकरी मिल जाती है. लेकिन छत मिलना कितना मुश्किल है, पगड़ी सिस्टम और भारी एडवांस के बीच दो लोग एक ही कमरे में पेइंग गेस्ट के तौर पर शिफ्ट्स में रहते हैं, प्यार में होते हैं, लेकिन कभी मिल नहीं पाते.
मथुरा की कहानी: एक छोटी सी गलतफहमी, ईगो और समझदारी की कमी के चलते कैसे पूरा परिवार बिखर जाता है. ये कहानी घर की स्त्री के आत्मसम्मान और बिखरने के बाद फिर से जुड़ने की जद्दोजहद पर आधारित है.
दिल्ली की कहानी: आमतौर पर फिल्मों में सिर्फ रेप की घटना दिखाकर कहानी खत्म कर दी जाती है. लेकिन हमारी कहानी ‘आफ्टर रेप’ (घटना के बाद) की जिंदगी पर है. जब 20-25 साल तक कोर्ट में केस खिंचता है, पीड़िता की शादी हो जाती है, बच्चे बड़े हो जाते हैं, तब वो महिला और उसका परिवार किस घुटन में जीता है. ये कहानी आत्महत्या का रास्ता चुनने के बजाय जिंदगी जीने और मुकाबला करने का हौसला देती है. हादसे की भरपाई हो सकती है, लेकिन जिंदगी की नहीं.
सवाल: आपने इंडस्ट्री के स्थापित ए-लिस्टर सितारों के बजाय नए और थिएटर कलाकारों की कास्टिंग क्यों की?
जवाब: क्योंकि हमारी कहानी किसी स्टार की इमेज से बड़ी है और पूरी तरह यूथ-सेंट्रिक है. हमारी स्क्रिप्ट में 40 साल से ऊपर का कोई सेंट्रल कैरेक्टर ही नहीं है. हमें ऐसे चेहरे चाहिए थे जो पर्दे पर एक्टिंग करते न दिखे, बल्कि समाज के अपने लोग लगें. पंचायत’ फेम चंदन रॉय हमारे साथ हैं, जिन्होंने गांव से आए भोले लड़के का लीड रोल निभाया है. इसके अलावा नंद किशोर पंत, बसंत, राजेश रमन और रवि जैसे मंझे हुए कलाकार हैं. वहीं फीमेल लीड्स में सिमरन, दिव्या और राजश्री जैसे फ्रेश चेहरे हैं. हमने स्टूडियो में नकली सेट लगाने के बजाय इन चारों शहरों की असली गलियों में जाकर शूटिंग की है.
सवाल: फिल्म के म्यूजिक को लेकर क्या खास है? सुना है ए.आर. रहमान की पसंदीदा सिंगर मधुश्री जी भी इससे जुड़ी हैं?
जवाब: जी बिल्कुल, ये हमारे लिए बहुत गर्व की बात है. ए.आर. रहमान के लिए 50 से ज्यादा गाने गा चुकीं देश की दिग्गज पैन-इंडिया सिंगर मधुश्री भट्टाचार्य ने हमारी फिल्म के तीन गाने गाए हैं. उनका गाया गाना ‘पूछती फिर रहीं लड़कियां…’ देशभर की रेप विक्टिम्स और अत्याचार झेल चुकीं बेटियों के दर्द पर आधारित एक ट्रिब्यूट सॉन्ग है, जो समाज से तीखे सवाल करता है. फिल्म का संगीत रॉबी बादल ने तैयार किया है और कोलकाता शेड्यूल में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की एक रचना भी शामिल की गई है.
सवाल: दर्शक ‘लवरेज़’ को सिनेमाघरों में कब तक देख पाएंगे? रिलीज की क्या योजना है?

लवरेज के निर्देशक (नीली शर्ट और चश्में में मनोज कृष्ण) और कास्ट की तस्वीर
मुंबई में हुए प्रीव्यू में इंडस्ट्री के क्रिटिक्स, प्रोडक्शन डिजाइनर्स और कलाकारों से हमें शानदार सराहना मिली है. अभी श्राद्ध पक्ष खत्म होते ही हम करीब एक महीने का प्रमोशनल कैंपेन शुरू करेंगे. टीएनवी फिल्म्स के साथ मिलकर हम इस ढाई घंटे की फिल्म को देशभर के सिनेमाघरों में बड़े पैमाने पर रिलीज करने जा रहे हैं. हमें पूरा भरोसा है कि कंटेंट को तवज्जो देने वाली आज की ऑडियंस इस फिल्म को जरूर अपना प्यार देगी.




