2 पायलट जरूरी… चमोली हादसे के बाद उड़ान के नियम सख्त, भड़के हेलिकॉप्टर ऑपरेटर्स, आज से हड़ताल की चेतावनी
30 अक्टूबर को बद्रीनाथ से देहरादून लौटते समय हुए एक हादसे में पायलट समेत छह लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद, DGCA ने हर हेलीकॉप्टर में दो पायलट होना अनिवार्य कर दिया.
उत्तराखंड के चार धाम मार्ग पर हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के नए दो पायलट अनिवार्य नियम के विरोध में आज से अपनी सेवाएं स्थगित करने की चेतावनी दी है. बता दें कि बद्रीनाथ से देहरादून लौटते समय जोशीमठ के पास एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत हो गई.
DGCA का सख्त फैसला
इस दुर्घटना के तुरंत बाद डीजीसीए ने सुरक्षा मानकों को कड़ा करते हुए निर्देश दिया कि सोमवार (आज) से चार धाम मार्ग पर उड़ान भरने वाले सभी हेलीकॉप्टरों में दो पायलट (ट्विन-पायलट) अनिवार्य होंगे.
इसके अलावा सह-पायलट (Co-pilot) का भी पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने के लिए योग्य (Hill-qualified) होना जरूरी किया गया. प्रत्येक उड़ान से पहले देहरादून के सहस्रधारा कंट्रोल रूम से रूट क्लीयरेंस लेना अनिवार्य किया गया. हर लैंडिंग के बाद क्रू को पायलट रिपोर्ट (PIREP) दर्ज कराने का निर्देश दिया गया.
हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों का पक्ष और विरोध
डीजीसीए के इस आदेश के खिलाफ चार धाम मार्ग पर सेवाएं दे रहे 13 में से 11 ऑपरेटरों ने डीजीसीए प्रमुख वीर विक्रम यादव, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) को संयुक्त पत्र भेजा है.
Following the October 30 crash in which six people, including the pilot, died while returning from Badrinath to Dehradun, the DGCA made it mandatory for every helicopter to have two pilots. Helicopter operators have now written to the DGCA demanding the withdrawal of this requirement and have warned of suspending heli-operations starting November 2.
— ANI (@ANI) November 1, 2026
वित्तीय और व्यावहारिक बोझ
ऑपरेटरों का कहना है कि हर उड़ान में दो पायलट तैनात करने से परिचालन लागत (Operating Cost), क्रू की संख्या, ठहरने और लॉजिस्टिक्स के खर्च में भारी बढ़ोतरी होगी. उन्होंने कहा कि बिना किसी पूर्व परामर्श या व्यावसायिक मूल्यांकन के यह नियम लागू करना अव्यवहारिक है. सीमित मुनाफे और तय दरों के कारण यह अतिरिक्त खर्च उठाना या यात्रियों पर इसका पूरा भार डालना संभव नहीं है.
पहाड़ी इलाकों के पायलटों की कमी
पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने का अनुभव रखने वाले योग्य को-पायलटों की उपलब्धता तुरंत सुनिश्चित करना बेहद कठिन है. ऑपरेटरों ने यह भी तर्क दिया कि उड़ान मार्गों पर ड्रोन और पैराग्लाइडिंग गतिविधियों जैसे बाहरी खतरों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन पर अचानक नया आर्थिक बोझ डाला जा रहा है.
ऑपरेटरों ने पत्र में स्पष्ट किया है कि जब तक इस निर्देश की समीक्षा नहीं की जाती और ऑपरेटरों के साथ बातचीत करके कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक वे चार धाम चार्टर सेवाएं स्थगित रखेंगे. अगर प्रशासन और ऑपरेटरों के बीच बातचीत से सहमति नहीं बनती, तो चार धाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की हेलीकॉप्टर आवाजाही पूरी तरह ठप हो सकती है.



