Bollywood Remake Films: स्क्रिप्ट का संकट… जमकर रीमेक फिल्म क्यों बना रहे बॉलीवुड के डायरेक्टर, हैरान करने वाला है ये डेटा
Bollywood Remake Films: एक दौर था जब बॉलीवुड के रीमेक बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित होते थे. लेकिन पिछले कुछ सालों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई. OTT, सोशल मीडिया और बदलते दर्शकों की पसंद ने रीमेक फिल्मों का गणित बिगाड़ दिया. आखिर क्यों नहीं चल रहा बॉलीवुड का पुराना फॉर्मूला, जानिए.
Bollywood Remake Films: एक समय था जब बॉलीवुड की पहचान उसकी नई और दमदार कहानियां हुआ करती थीं. हर शुक्रवार दर्शकों को उम्मीद रहती थी कि उन्हें पर्दे पर कुछ नया देखने को मिलेगा. लेकिन, पिछले एक दशक में तस्वीर काफी बदल गई. ओरिजिनल स्क्रिप्ट पर दांव लगाने के बजाय बॉलीवुड के कई बड़े प्रोड्यूसर्स और स्टूडियो ने पहले से सफल फिल्मों का रीमेक बनाने को सेफ ऑप्शन मान लिया. साउथ इंडियन फिल्मों से लेकर हॉलीवुड तक की सुपरहिट फिल्मों के हिंदी रीमेक बनने लगे. शुरुआत में यह रणनीति काम भी आई. लेकिन समय के साथ दर्शकों की पसंद बदल गई और यही फॉर्मूला बॉलीवुड पर भारी पड़ने लगा.
बॉलीवुड फिल्मों का दौर काफी कमाल का रहा है, लेकिन जब से रीमेक फिल्में हावी होना शुरू हो गई हैं, लोगों ने दिशा बदल दी है. रीमेक फिल्में एक वक्त तक लोगों ने खूब पसंद किया है, ‘गजनी’, ‘वांटेड’, ‘सिंघम’, ‘कबीर सिंह’ और ‘सिंबा’ जैसी फिल्मों ने शानदार कमाई कर यह भरोसा दिलाया कि हिट कहानी को नए स्टार्स के साथ पेश किया जाए तो सफलता तय है. लेकिन, कोरोना महामारी के बाद ये फॉर्मूला उल्टा पड़ता दिखा. ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने भाषा की दीवार लगभग खत्म कर दी. जिसके बाद दर्शक तमिल, तेलुगु, मलयालम या हॉलीवुड की ओरिजिनल फिल्में रिलीज के कुछ समय बाद ही घर बैठे देख लेते हैं. ऐसे में जब वही कहानी दो-तीन साल बाद हिंदी रीमेक के रूप में सिनेमाघरों में आती है तो उसमें नया कुछ नहीं बचता.
कैसा है अब रीमेक फिल्मों का हाल-
- कोरोना के बाद OTT ने रीमेक फिल्मों की मांग घटा दी.
- दर्शक पहले ही ओरिजिनल फिल्म देख चुके होते हैं, इसलिए रीमेक में नया नहीं लगता.
- सोशल मीडिया पर हर रीमेक की तुरंत ओरिजिनल फिल्म से तुलना होने लगी है.

सबसे ज्यादा रीमेक कहां से आए?
आइकॉनिक फिल्में भी रीमेक
सोशल मीडिया ने भी इस बदलाव को और तेज कर दिया. अब ट्रेलर रिलीज होते ही लोग ओरिजिनल फिल्म से तुलना शुरू कर देते हैं. यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में कई बड़े सितारों की रीमेक फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह संघर्ष करती नजर आईं. सवाल अब यह है कि क्या बॉलीवुड के पास नई कहानियों का संकट है, या फिर मेकर्स आसान रास्ता चुनने के आदी हो गए हैं? हालांकि, ऐसा नहीं है कि पिछले पांच सालों में रीमेक फिल्में बनी हैं, बॉलीवुड में रीमेक फिल्मों का चलन काफी पुराना है, कई कल्ट क्लासिक फिल्में रीमेक हैं, जिनके बारे में दर्शकों को जानकारी नहीं है.
पहले क्यों चलता था रीमेक का फॉर्मूला?
2010 से 2019 का दौर रीमेक फिल्मों के लिए सुनहरा माना जाता है. उस समय साउथ इंडियन फिल्मों तक हर दर्शक की पहुंच नहीं थी. ओटीटी प्लेटफॉर्म इतने लोकप्रिय नहीं थे और सोशल मीडिया पर भी फिल्मों की इतनी चर्चा नहीं होती थी. ऐसे में अगर किसी तमिल या तेलुगु फिल्म का हिंदी रीमेक बनता था तो अधिकांश दर्शकों के लिए वह कहानी बिल्कुल नई होती थी. यही वजह थी कि कई सारी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया. इन फिल्मों ने यह विश्वास पैदा किया कि सफल कहानी का हिंदी रीमेक बनाना कम जोखिम वाला कारोबार है. इसके बाद कई बड़े बैनर लगातार रीमेक फिल्मों के राइट्स खरीदने लगे.

बॉलीवुड की हिट रीमेक फिल्में
क्यों बिगड़ गया रीमेक का खेल?
2021 से 2025 के बीच बॉलीवुड ने लगातार रीमेक फिल्मों पर दांव लगाया. ‘तड़प’, ‘बच्चन पांडे’, ‘जर्सी’, ‘लाल सिंह चड्ढा’, ‘विक्रम वेधा’, ‘शहजादा’, ‘सेल्फी’, ‘भोला’, ‘सरफिरा’, ‘बेबी जॉन’ और ‘देवा’ जैसी कई फिल्में बड़े सितारों के साथ रिलीज हुईं. इनमें से ज्यादातर फिल्में पहले से हिट हो चुकी तमिल, तेलुगु या हॉलीवुड फिल्मों की आधिकारिक रीमेक थीं. उम्मीद थी कि स्टार पावर के दम पर ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करेंगी, लेकिन नतीजे इसके उलट रहे. इन रीमेक फिल्मों में से अधिकांश या तो फ्लॉप रहीं या फिर अपनी लागत तक नहीं निकाल सकीं. ‘दृश्यम 2’ और शैतान जैसी कुछ फिल्मों ने जरूर अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन इनके सफल होने की वजह सिर्फ रीमेक होना नहीं, बल्कि मजबूत स्क्रीनप्ले, अभिनय और दर्शकों के लिए कहानी का नया अनुभव भी था. पिछले 5 सालों में 25 रीमेक फिल्में बनीं, जिसमें से 23 फिल्में फ्लॉप साबित हुई.
पहले जैसी गलती नहीं दोहराते
आज स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है. ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर लगभग हर बड़ी साउथ इंडियन फिल्म हिंदी सबटाइटल या डबिंग के साथ मौजूद होती है. दर्शक नई फिल्मों का इंतजार नहीं करते, बल्कि रिलीज के कुछ ही समय बाद उन्हें देख लेते हैं. जब वही कहानी कुछ साल बाद हिंदी रीमेक के रूप में रिलीज होती है तो दर्शकों को पहले से पता होता है कि आगे क्या होने वाला है. ऐसे में उनके लिए फिल्म देखने की एक्साइटमेंट कम हो जाती है. यही वजह है कि कई रीमेक फिल्मों की ओपनिंग भी कमजोर रहने लगी है.

बॉलीवुड रीमेक का हाल
सोशल मीडिया ने बदल दिया पूरा खेल
पहले किसी फिल्म के रीमेक होने की जानकारी बहुत कम लोगों को होती थी. लेकिन आज ट्रेलर रिलीज होने के कुछ मिनटों के भीतर ही सोशल मीडिया पर ओरिजिनल फिल्म के सीन, डायलॉग और तुलना वायरल होने लगती है. यूट्यूब पर Original vs Remake वीडियो लाखों बार देखे जाते हैं. दर्शक पहले ही बता देते हैं कि ओरिजिनल फिल्म ज्यादा बेहतर थी. इसका सीधा असर टिकट बिक्री पर पड़ता है. लगातार रीमेक फिल्मों पर निर्भर रहने से बॉलीवुड की क्रिएटिविटी पर भी सवाल उठने लगे हैं.
ओरिजिनल कहानियों हैं पसंद
इसके उलट हाल के सालों में ’12th फेल’, ‘मुंज्या’, ‘स्त्री’ जैसी ओरिजिनल कहानियों को दर्शकों ने खूब पसंद किया. इन फिल्मों ने साबित किया कि अच्छी कहानी हो तो बिना रीमेक के भी फिल्में सुपरहिट हो सकती हैं. पिछले दो-तीन साल में कई फिल्मकार और ट्रेड एक्सपर्ट खुलकर कह चुके हैं कि अब सिर्फ रीमेक के भरोसे फिल्में नहीं चलाई जा सकतीं. दर्शक अब नई कहानी, नए किरदार और अलग अनुभव चाहते हैं. यही वजह है कि कई बड़े प्रोडक्शन हाउस अब ओरिजिनल स्क्रिप्ट डेवलपमेंट पर ज्यादा इन्वेस्ट करने की बात कर रहे हैं.




