Cocktail 2: वेरोनिका जैसी सिंपथी ऐली को क्यों नहीं मिली? दीपिका पादुकोण और कृति सेनन के किरदारों में फर्क समझिए
Deepika Padukone Vs Kriti Sanon: 'कॉकटेल 2' के रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर भले ही कृति सेनन और दीपिका पादुकोण के किरदारों की तुलना हो रही हो, लेकिन इम्तियाज अली की वेरोनिका के सच्चे दर्द और लव रंजन की ऐली की चालाकियों में जमीन-आ आसमान का फर्क है. जानिए क्यों ऐली कभी दर्शकों की हमदर्दी नहीं जीत पाएगी.
Deepika Padukone Vs Kriti Sanon: जब से थिएटर में ‘कॉकटेल 2’ रिलीज हुई है, तब से सिनेमा के दीवानों के बीच एक ही बहस छिड़ी है कि क्या कृति सेनन के कैरेक्टर ‘ऐली’ की तुलना दीपिका पादुकोण की ‘वेरोनिका’ से की जा सकती है? सोशल मीडिया पर कई लोग ऐली को दूसरी वेरोनिका बता रहे हैं, लेकिन अगर किरदार की गहराई में जाएंगे तो पता चलेगा कि ऐली और वेरोनिका में जमीन आसमान का फर्क है. दोनों किरदारों को लिखने वाला शख्स भी अलग-अलग है और दोनों लेखकों की राइटिंग स्टाइल का असर दोनों ही किरदारों पर साफ झलकता है.
साल 2012 वाली ‘कॉकटेल’ को इम्तियाज अली ने लिखा था, जहां किरदारों के दिल में एक सहज सा जुड़ाव और अलग होने के पीछे मजबूरी थी. वहीं ‘कॉकटेल 2’ को लिखा है लव रंजन ने, जिनकी राइटिंग में मॉडर्न लव के नाम पर ‘रिलेशनशिप टेस्ट’, चालाकियां और गजब का इमोशनल ड्रामा देखने को मिलता है. यही वजह है कि ऐली कभी भी वेरोनिका जैसा हमदर्दी (सिम्पथी) वाला किरदार नहीं बन पाई.

दीपिका, सैफ अली खान और डायना पेंटी
वेरोनिका का दिल टूटा था, ऐली ने खुद बुना धोखा!
इम्तियाज अली की वेरोनिका एक बेफिक्र और खुले विचारों वाली लड़की थी, लेकिन उसका प्यार बेहद सच्चा था. मीरा के उसकी जिंदगी में आने से पहले वेरोनिका और गौतम साथ थे. जब गौतम को मीरा से प्यार हुआ, तब वेरोनिका का दिल बुरी तरह टूटा था. उसने अपने प्यार को खोया, जिससे दर्शकों को उससे सच्ची हमदर्दी हुई. लेकिन ‘कॉकटेल 2‘ की कहानी बिल्कुल अलग है. यहां दीया (रश्मिका मंदाना) अपने मंगेतर कुणाल (शाहिद कपूर) की वफादारी का टेस्ट लेने के लिए अपनी सहेली ऐली (कृति सेनन) को कहती है. दीया का ये तरीका बेहद गलत था, लेकिन इसके बाद ऐली ने जो किया, उसे सही नहीं ठहराया जा सकता. ऐली को जब शाहिद से प्यार होने लगा, तब उसने अपनी बेस्ट फ्रेंड दीया को सच बताने की बजाय ‘परफेक्ट ब्राइड्समेड’ बनने का नाटक जारी रखा. वो चुपचाप बैचलर पार्टी और शादी के इवेंट्स प्लान करती रही, जो कि पीठ में छुरा घोंपने जैसा था.
बैचलर पार्टी का वो सीन और मंगलसूत्र का ड्रामा
उदाहरण के तौर पर बात की जाए तो फिल्म का बैचलर पार्टी वाला सीन ऐली के किरदार को पूरी तरह कठघरे में खड़ा कर देता है. जब कुणाल दीया को फोन कर रहा था, तब ऐली ने दीया को ये बात नहीं बताई और हद तो तब हो गई जब कुणाल ने ऐली को फोन किया तो दीया के जागने के बावजूद ऐली उसे बताने के बजाय कुणाल से ‘प्राइवेट मोमेंट्स’ चुराने चली गई! अपनी सहेली के मंगेतर के साथ ऐसी चोरी-छिपे नजदीकियां बढ़ाना किसी भी एंगल से जायज नहीं लगता. इतना ही नहीं, जो लड़की अभी दुल्हन बनी ही नहीं, उसका मंगलसूत्र ट्राय करना ऐली की नीयत पर बड़ा सवाल उठाता है.

कृति सेनन
इम्तियाज अली बनाम लव रंजन
इन दोनों किरदारों को बनने में इसे लिखने वाले राइटर के स्टाइल का बहुत बड़ा रोल है. इम्तियाज अली के किरदारों में एक मोरल कंपास होता था, जहां वेरोनिका अपनी सहेली के लिए अपना प्यार कुर्बान करने की हिम्मत रखती थी. लेकिन लव रंजन की राइटिंग में किरदारों को कई बार बहुत ही ग्रे और मैनिपुलेटिव दिखाया जाता है. अगर हम शाहिद कपूर के किरदार को देखें, तो उसका कोई स्टैंड ही नहीं था. दीया जब शादी की बात करती है, तो उसका जवाब होता है,-अगर तुम चाहो तो. महफिल में वो सरेआम मजाक उड़ाता है कि अगर वो चीट भी करेगा, तो दीया को पता नहीं चलेगा. इसी वजह से दीया के मन में इनसिक्योरिटी पैदा हुई. दीया परफेक्ट नहीं थी, उसका तरीका घटिया था, लेकिन उसका शक बेबुनियाद नहीं था.
दीया ने पहली गलती जरूर की, लेकिन ऐली ने बार-बार ऐसे फैसले लिए, जिससे उसकी सहेली के साथ हुआ विश्वासघात और गहरा होता गया. इसलिए, ऐली की तुलना वेरोनिका से करना वेरोनिका के उस सच्चे दर्द की तौहीन होगी. ऐली जो भी भुगत रही है, उसकी जिम्मेदार वो खुद है.




