विकी डोनर- बधाई हो छोड़िए, आयुष्मान खुराना की ये 5 फिल्में नहीं देखीं तो बहुत कुछ मिस कर रहे

विकी डोनर- बधाई हो छोड़िए, आयुष्मान खुराना की ये 5 फिल्में नहीं देखीं तो बहुत कुछ मिस कर रहे

आयुष्मान खुराना उन कलाकारों में से एक हैं जिन्होंने कॉमर्शियल और आर्ट सिनेमा में अच्छा बैलेंस बनाया है. उनकी एक्टिंग की खूब तारीफ होती है. आइए जानते हैं कि उनकी टॉप 5 फिल्में कौन सी हैं.

Ayushmann Khurrana 5 Best Movies: बॉलीवुड एक्टर आयुष्मान खुराना ने अपनी एक्टिंग से फैंस को खूब इंप्रेस किया है. उन्होंने रोमांटिक फिल्में भी की हैं और सीरियस रोल्स भी प्ले किए हैं. आयुष्मान खुराना अपनी स्क्रीन प्रजेंस से सम्मोहित कर देते हैं. रोल्स में वे इमोशनली बहुत डीप जाते हैं और यही वजह है कि ऑडियंस बड़ी सरलते से उनसे प्रभावित हो जाती है. पिछले डेढ़ दशक में उन्होंने अपनी अलग यूएसपी बनाई है. भले ही पिछले कुछ समय में उनकी फिल्मों को वैसा रिस्पॉन्स ना मिला हो लेकिन उनकी परफॉर्मेंस पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता है.

14 सितंबर 1984 को जन्में आयुष्मान अपना 42वां जन्मदिन मना रहे हैं. वैसे तो उन्होंने अपने अब तक के करियर में कई परफॉर्मेंस दी हैं जिसमें विकी डोनर और बधाई हो को मील का पत्थर माना जाता है. लेकिन उनकी कुछ शानदार परफॉर्मेंस ऐसी भी हैं जिन्हें आपको किसी भी कीमत पर मिस नहीं करना चाहिए. एक्टर के जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं उनकी 5 शानदार परफॉर्मेंस के बारे में.

दम लगाके हइशा

इस फिल्म में आयुष्मान खुराना ने एक मिडिल फैमिली के ऐसे शख्स का रोल प्ले किया था जो हर दिन अपनी नाकामी की वजह से ताने झेलता है. चाहें घर हो या फिर बाहर उसे बार-बार उसकी नाकामियाबों का एहसास कराया जाता है. शादीशुदा जीवन में उसे अपनी पत्नी(भूमि पेडनेकर) का भरपूर साथ मिलता है. उसी प्यार और विश्वास के बलबूते वो एक दिन खुद को साबित कर के दिखाता है. ये एक इमोशनल फैमिली ड्रामा फिल्म थी जिसे काफी पसंद किया गया था.

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अंधाधुन

अंधाधुन एक सिर घुमा देने वाली सस्पेंस थ्रिलर फिल्म थी जिसमें आयुष्मान खुराना की एक्टिंग स्किल निखरकर आती है. फिल्म की स्क्रिप्टिंग इसका डायरेक्शन और आयुष्मान की एक्टिंग सबकुछ एकदम परफेक्ट था. अंधाधुन फिल्म में आयुष्मान खुराना का अभिनय काफी शानदार रहा था और बॉक्स ऑफिस के लिहाज से भी ये उनके करियर की सफल फिल्मों में से एक मानी जाती है.

आर्टिकल 15

समाज में जातिवादी मानसिकता किस हद तक नीचता पर है उसका प्रतिबिंब थी फिल्म आर्टिकल 15. सिर्फ संविधानिक महत्व ही नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रहे गलत रीति-रिवाज पर प्रहार थी ये फिल्म. इसमें आयु्ष्मान खुराना ने सिस्टम के खिलाफ जाकर सच का साथ देने वाले एक पुलिस अफसर का रोल प्ले किया था जिसमें उनकी खूब सराहना भी हुई थी.

Ayushmann Khuranna

आर्टिकल 15 फिल्म से आयुष्मान खुराना का सीन

बाला

बाला फिल्म सिर्फ किसी एक इंसान के बाल झड़ने की समस्या और समाज में उसकी एक्सेप्टेंस की कहानी नहीं थी. बल्कि ये उस आभाव के एहसास की कहानी थी जो स्वाभाविक है और इसका इंसान के जीवन में उतना भी महत्व नहीं जितना समाज एहसास करा देता है. फिल्म में आयुष्मान खुराना का रोल जितना सशक्त था उतना ही मजबूत किरदार भूमि पेडनेकर का भी था. हर इंसान किसी ना किसी आभाव में है. उसको एक्सेप्ट कर के आगे बढ़ना और जीवन में खुद को महत्व देना बहुत जरूरी है. फिल्म संदेश देती है कि समाज आपको किस नजरिये से देखता है ये उतना जरूरी नहीं बल्कि जरूरी ये है कि आप खुद को पूरी ईमानदारी के साथ किस नजरिये से देखते हैं. इस फिल्म में भी आयुष्मान का अभिनय सराहनीय था.

गुलाबो सिताबो

गुलाबो सिताबो फिल्म कोरोना के दौर में आई थी और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इसकी स्ट्रीमिंग हुई थी. फिल्म ठीक तरह से दर्शकों तक पहुंच नहीं सकी थी लेकिन खास थी. इसमें आयुष्मान खुराना और अमिताभ बच्चन की जुगलबंदी कमाल की थी. फिल्म में अन्य किरदारों का अभिनय भी बढ़िया था. ये एक सोशल इश्यू पर सटायर फिल्म थी और ऐसे केस आमतौर पर हमारे समाज के इर्द-गिर्द देखने को मिलते रहते हैं. फिल्म में सभी ने कमाल का अभिनय किया था.

पुनीत उपाध्याय
पुनीत उपाध्याय

पत्रकारिता जगत में 7 साल पूरे कर चुके पुनीत उपाध्याय रायबरेली से ताल्लुक रखते हैं. वे टीवी 9 के डिजिटल विंग में साल 2022 से सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. कला, संगीत, सिनेमा, साहित्य पर लिखने का शौक रखते हैं. साथ ही इससे जुड़ी हर छोटी, बड़ी और रोचक खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं. इसके अलावा वे अन्य बीट्स में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. पुनीत मानते हैं कि कला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि उससे इतर अंतरमन से जुड़ने और समाज से रूबरू होने का एक सार्थक जरिया भी है. CSJM कानपुर युनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद पुनीत ने ITMI (इंडिया टुडे मीडिया इंस्टिट्यूट) से मास कॉम्युनिकेशन में पीजी डिप्लोमा का कोर्स किया है. पुनीत की पहली जॉब आज तक में थी जहां उन्होंने 4 साल सब एडिटर की पोस्ट पर काम किया और मनोरंजन बीट के लिए अपनी सेवाएं दीं. पुनीत की रुचि लिखने में है और वे कलम की धार से समाज में बदलाव लाने में विश्वास रखते हैं. इसके अलावा उनकी रुचि आध्यात्म, साहित्य, गायन, दर्शन, क्रिकेट और मनोविज्ञान में है.

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