NEET Paper Leak Case: चर्चा में RCC के शिवराज मोटेगावकर का आलीशान ‘शीश महल’, करोड़ों की संपत्ति पर उठे सवाल
आलीशान बंगले का डिजाइन रामोजी फिल्म सिटी से जुड़े इंजीनियरों ने तैयार किया था. करीब 5 हजार वर्ग फुट में बना यह बंगला बेहद भव्य है. इस बंगले में विशाल पार्किंग एरिया, राजस्थानी शैली के कमरे और महंगे लकड़ी के इंटीरियर का इस्तेमाल किया गया है.
NEET-UG पेपर लीक मामले में लगातार जांच चल रही है, इस मामले में अब तक कई लोग गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं. गिरफ्तार किए गए रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस (RCC) के शिवराज मोटेगावकर का आलीशान बंगला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. लातूर में कथित NEET पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे करोड़ों की संपत्ति और लग्जरी लाइफस्टाइल से जुड़े नए पहलू भी सामने आ रहे हैं. मोटेगावकर का यह बंगला अब जांच एजेंसियों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा में आ गया है.
बताया जा रहा है कि इस आलीशान घर का डिजाइन रामोजी फिल्म सिटी से जुड़े इंजीनियरों ने तैयार किया था. करीब 5 हजार वर्ग फुट में बना यह बंगला बेहद भव्य है. इस बंगले में विशाल पार्किंग एरिया, राजस्थानी शैली के कमरे और महंगे लकड़ी के इंटीरियर का इस्तेमाल किया गया है.
बंगले में महंगी लकड़ी का इस्तेमाल
सिर्फ दीवारें ही नहीं, बल्कि पूरे बंगले में इम्पोर्टेड लकड़ी की फ्लोरिंग भी की गई है. चार मंजिला इस बंगले में आधुनिक सुविधाएं मौजूद होने की बात कही जा रही है. लातूर के पॉश और VIP इलाके में बने इस बंगले को लेकर स्थानीय लोग इसकी संपत्ति के स्रोत को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
NEET पेपर लीक मामले की जांच के बीच मोटेगावकर की संपत्तियों और आर्थिक लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है.
कौन है शिवराज मोटेगावकर
RCC की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, मोटेगांवकर ने फिजिक्स में एमएससी किया है और उन्होंने स्वर्ण पदक भी हासिल किया था. हालांकि वेबसाइट पर विश्वविद्यालय का नाम नहीं बताया गया है. संस्थान का कहना है कि उसके कई छात्रों ने SET/NET-JRF, GATE, BARC, DRDO और TIFR जैसी राष्ट्रीय स्तर की कई परीक्षाओं में कामयाबी हासिल की है.
मोटेगांवकर ने शुरुआत में घर से ही पढ़ाना शुरू किया था. इसके बाद साल 2003 में उन्होंने रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस की स्थापना की, और यह आगे चलकर RCC Pattern के रूप में विकसित हो गया. वर्तमान में इसकी कई शाखाएं हैं जो मराठवाड़ा, पुणे, नासिक, नांदेड़ और छत्रपति संभाजीनगर समेत कई शहरों में संचालित होती हैं.
संस्थान का दावा है कि उसने मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों का मार्गदर्शन किया. साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को स्कॉलरशिप देने का दावा भी करता है. मोटेगांवकर सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहते हैं और पढ़ाई तथा करियर से जुड़े सुझाव भी साझा करते रहते हैं.




