लक्खा की रिहाई से सरकारी नौकरी तक… झोटा केस में इंसाफ मोर्चे और पंजाब सरकार के बीच कई मांगों पर सहमति
परविंदर सिंह झोटा के परिवार की ज्यादातर मांगों को पंजाब सरकार द्वारा मान लिया गया है. सिर्फ सीएम और डीजीपी के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बनी.
मानसा में परमिंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए चल रहे संघर्ष के 23वें दिन एक बड़ी खबर सामने आई है. पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों और एक्शन कमेटी के बीच करीब 5 घंटे तक चली लंबी बैठक के बाद कई अहम मांगों पर सहमति बन गई है. इस बैठक में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और पुलिस के उच्च अधिकारी मौजूद रहे.
बैठक में इस आंदोलन से जुड़े जेलों में बंद लक्खा सिधाना समेत अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई को लेकर सहमति बनी है. एक्शन कमेटी का कहना है कि नेताओं के जेल से बाहर आने के बाद ही परमिंदर सिंह झोटा का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा और उसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा. वहीं, झोटा के परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भरोसा दिया गया है. इसके अलावा मानसा में ही कथित तौर पर ड्रग्स ओवरडोज की वजह से मारे गए दलजीत सिंह के परिवार को भी नौकरी और मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया है.
झोटा के नाम पर ट्रॉमा सेंटर बनाने पर सहमति
एक्शन कमेटी के मीडिया इंचार्ज हरदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि बैठक के दौरान सबसे ज्यादा पेंच लक्खा सिधाना और अन्य नेताओं की रिहाई को लेकर फंसा रहा. एक्शन कमेटी नेताओं की रिहाई के बिना पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं थी. उन्होंने बताया कि ख्याला कलां में परमिंदर सिंह झोटा के नाम पर ट्रॉमा सेंटर बनाने के लिए एक सप्ताह के भीतर मंजूरी देने पर भी सहमति बनी है. इसके अलावा संबंधित पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध उच्च स्तरीय जांच करवाने का भरोसा दिया गया है.
झोटा की याद में प्रतिमा लगाने पर भी सहमति
वहीं, झोटा की याद में उनका स्मारक या प्रतिमा लगाने पर भी सहमति बनी है, लेकिन घटना वाली जगह पर प्रतिमा लगाने को लेकर सहमति नहीं बन पाई. सरकार के प्रतिनिधियों का कहना था कि घटनास्थल निजी संपत्ति होने के कारण वहां प्रतिमा लगाने में कानूनी अड़चन आ सकती है.
गिरफ्तार नेताओं की रिहाई और मुकदमे रद्द करने की मांग
एक्शन कमेटी ने गिरफ्तार नेताओं की बिना शर्त रिहाई और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे रद्द करने की मांग भी रखी है. इसके अलावा 13 अक्टूबर से शुरू हुए संघर्ष के दौरान भम्मे कलां, बुढलाडा और अकालिया से संबंधित दर्ज मामलों, पंजाब भर में फ्लेक्स फाड़ने के मामलों और झोटा के पिता और एंटी ड्रग्स टास्क फोर्स के कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज कथित झूठे मुकदमों को रद्द करने की मांग भी शामिल है. इस पूरे घटनाक्रम के बाद 5 नवंबर को मुख्यमंत्री के आवास के घेराव का ऐलान फिलहाल स्थगित कर दिया गया है.




