श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक ब्लास्ट: क्या किसी बड़ी आतंकी साजिश की शुरुआत? ISI कनेक्शन से लेकर कई एंगल पर जांच
श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक ब्लास्ट में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े नेटवर्क का एंगल भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जांच का सबसे अहम पहलू विस्फोट के पीछे सक्रिय नेटवर्क की पहचान करना है.
राजस्थान के श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर हुए विस्फोट ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. शुरुआती तौर पर रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने की घटना दिख रहा यह मामला अब कई गंभीर सुरक्षा और आतंकी साजिश के एंगल से जांच के दायरे में है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर रेलवे ट्रैक पर धमाका करने के पीछे मकसद क्या था? क्या यह किसी ट्रेन को निशाना बनाने की कोशिश थी, रेलवे नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने की साजिश थी या फिर किसी बड़े हमले से पहले किया गया ट्रायल ब्लास्ट?
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच में राजस्थान ATS, इंटेलिजेंस टीम, NIA, IB और मिलिट्री इंटेलिजेंस समेत कई एजेंसियां जुटी हैं. फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं. इसके अलावा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और पंजाब पुलिस भी अपने स्तर पर इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं.
स्थानीय पुलिस ने विस्फोटक अधिनियम, रेलवे अधिनियम, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित प्रावधानों और BNS की अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है. अब जांच का फोकस सिर्फ धमाके की वजह और इस्तेमाल किए गए विस्फोटक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सक्रिय लोगों, उनके नेटवर्क और संभावित हैंडलर्स की पहचान पर भी है.
ब्लास्ट का तरीका बना जांच एजेंसियों के लिए पहेली
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू विस्फोट का तरीका है. शुरुआती जांच के दौरान घटनास्थल से विस्फोट के बाद आमतौर पर मिलने वाले कुछ पारंपरिक साक्ष्य बरामद नहीं होने की बात सामने आई है. मौके से न तो कोई स्पष्ट पाउडर मिला है, न कोई केमिकल, तार, डेटोनेटर या कील जैसी चीज बरामद होने की जानकारी सामने आई है. ऐसे में जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोट किस तरह किया गया और इसके लिए किस प्रकार की सामग्री का इस्तेमाल हुआ होगा.
फॉरेंसिक जांच में विस्फोट के अवशेषों, रेलवे ट्रैक को हुए नुकसान और आसपास मौजूद अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा. यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री की प्रकृति क्या थी और क्या उसका किसी पुराने मामले से कोई समानता है. फिलहाल घटनास्थल पर कुछ सामग्री नहीं मिलने के आधार पर किसी खास तकनीक या विस्फोटक के इस्तेमाल का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी.
जिस समय ब्लास्ट हुआ, उस वक्त ट्रैक पर नहीं थी कोई ट्रेन
घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति और ब्लास्ट की टाइमिंग भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है. जिस स्थान पर विस्फोट हुआ, वहां रेलवे ट्रैक के एक तरफ सड़क है, जबकि दूसरी तरफ कुछ दूरी पर एक किसान परिवार का घर मौजूद है. आसपास CCTV कैमरे नहीं होने के कारण संदिग्धों की आवाजाही का पता लगाना भी चुनौती बन सकता है. जांच में सामने आया है कि जिस ट्रैक पर विस्फोट हुआ, वहां आखिरी ट्रेन धमाके से करीब 40 मिनट से एक घंटे पहले गुजरी थी. इसके बाद अगली ट्रेन अगले दिन सुबह गुजरनी थी. यानी धमाके के समय उस ट्रैक पर कोई ट्रेन मौजूद नहीं थी.
यही तथ्य जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े कर रहा है. अगर मकसद किसी यात्री ट्रेन को निशाना बनाना था तो ट्रेन के गुजरने के समय विस्फोट क्यों नहीं किया गया? क्या साजिश का मकसद किसी ट्रेन को दुर्घटनाग्रस्त करना नहीं, बल्कि रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाना था? क्या इस घटना के जरिए रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को परखने या किसी बड़े हमले की तैयारी करने की कोशिश की गई?
इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है
- क्या किसी बड़े हमले से पहले किया गया ट्रायल ब्लास्ट?
- जांच एजेंसियां इस संभावना को भी ध्यान में रखकर पड़ताल कर रही हैं कि कहीं यह किसी बड़ी साजिश से पहले किया गया ट्रायल ब्लास्ट तो नहीं था.
- आतंकी नेटवर्क में कई बार नए लोगों को किसी संगठन या हैंडलर के निर्देश पर छोटे स्तर के टास्क दिए जाने की आशंका रहती है. ऐसे में जांच का एक एंगल यह भी हो सकता है कि क्या किसी नए स्लीपर सेल या स्थानीय मॉड्यूल को रेलवे ट्रैक पर विस्फोट करने का टास्क दिया गया था?
- क्या इस घटना के जरिए किसी आतंकी हैंडलर का भरोसा जीतने, अपनी मौजूदगी दर्ज कराने या किसी नेटवर्क को सक्रिय करने की कोशिश हुई?
- हालांकि, अभी तक इस तरह के किसी ट्रायल ब्लास्ट या स्लीपर सेल की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. यह जांच का संभावित एंगल है, जिसकी पुष्टि डिजिटल साक्ष्यों, संदिग्धों से पूछताछ और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगी.
ISI और शहजाद भट्टी नेटवर्क का कनेक्शन खंगाल रहीं एजेंसियां
श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक ब्लास्ट में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े नेटवर्क का एंगल भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे पहले पाकिस्तान से संचालित शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े लोगों पर भारत में रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिश रचने के आरोप सामने आ चुके हैं. ऐसे में एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि श्रीगंगानगर में हुए विस्फोट का कहीं शहजाद भट्टी या उससे जुड़े किसी पुराने मॉड्यूल से संबंध तो नहीं है.
इसके अलावा आतंकी फरतुल्लाह गौरी की ओर से पहले रेलवे ट्रैक को उड़ाने की धमकी दिए जाने का पहलू भी जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है. जांच एजेंसियां पुराने आतंकी इनपुट, सोशल मीडिया गतिविधियों, डिजिटल कम्युनिकेशन और गिरफ्तार आरोपियों के संपर्कों का मिलान कर सकती हैं. हालांकि, अभी तक श्रीगंगानगर ब्लास्ट में ISI, शहजाद भट्टी या फरतुल्लाह गौरी की सीधी भूमिका का कोई पुष्ट प्रमाण सार्वजनिक नहीं हुआ है.
खुरासान मॉड्यूल का पुराना नेटवर्क भी जांच के दायरे में
इस मामले में खुरासान मॉड्यूल का एंगल भी जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. पिछले साल खुरासान मॉड्यूल से जुड़े लोगों की ओर से रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिश के मामले सामने आए थे. इस सिलसिले में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में गिरफ्तारियां हुई थीं. तेलंगाना पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर भी इस नेटवर्क की पड़ताल की गई थी. अब श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर विस्फोट के बाद एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि क्या पुराने मॉड्यूल से जुड़े किसी व्यक्ति या संपर्क का इस घटना से कोई संबंध है.
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होगा कि क्या पहले पकड़े गए आरोपियों के डिजिटल संपर्क, फोन नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट या अन्य नेटवर्क का श्रीगंगानगर मामले में सामने आए संदिग्धों से कोई मेल मिलता है.
पाकिस्तानी नेटवर्क पर नजर
जांच के दौरान कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, इनमें कुछ ऐसे लोग शामिल हैं, जिनके पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए राजस्थान में हथियार, ड्रग्स और गोला-बारूद की खेप पहुंचाने वाले नेटवर्क से संपर्क में रहने की आशंका है. एजेंसियां इन लोगों के संपर्कों, पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और पाकिस्तान में बैठे संभावित हैंडलर्स से उनके संबंधों की पड़ताल कर रही हैं.
जांच का मुख्य सवाल यह है कि क्या हथियारों और ड्रग्स की तस्करी करने वाला नेटवर्क किसी आतंकी साजिश के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा था? क्या इसी नेटवर्क के जरिए विस्फोटक सामग्री पहुंचाई गई और क्या रेलवे ट्रैक ब्लास्ट में इसका कोई इस्तेमाल हुआ?
गिरफ्तार कुलवंत सिंह से भी जुटाए जा रहे इनपुट
पंजाब पुलिस की जांच में गिरफ्तार कुलवंत सिंह भी महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है. पंजाब पुलिस उससे पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आने वाले हथियारों और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई को लेकर पूछताछ कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर महीने में ड्रोन के जरिए श्रीगंगानगर में RDX और तुर्किये में निर्मित जिगाना पिस्टल की खेप पहुंचने की जानकारी भी जांच के दायरे में है. एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस कथित खेप का रेलवे ट्रैक ब्लास्ट से कोई संबंध है. क्या हथियारों और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई करने वाला नेटवर्क किसी बड़े हमले की तैयारी में था?
क्या स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों को पाकिस्तान में बैठे किसी हैंडलर से निर्देश मिल रहे थे? कुलवंत सिंह से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट का श्रीगंगानगर ब्लास्ट की जांच में कितना महत्व है, यह आगे की जांच और साक्ष्यों से स्पष्ट होगा.
पंजाब में पहले ही जारी हुआ था अलर्ट
सूत्रों के मुताबिक, दीपावली से पहले पंजाब में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा इनपुट जारी किया गया था. इस इनपुट में आशंका जताई गई थी कि पाकिस्तान की ISI सेना और अर्धसैनिक बलों के बड़े प्रतिष्ठानों के अलावा उनके वाहनों और काफिलों को भी निशाना बनाने की कोशिश कर सकती है. इस इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क थीं. अब श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक ब्लास्ट के बाद राजस्थान और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क की गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है.
जांच एजेंसियां यह भी समझने की कोशिश कर रही हैं कि क्या रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की घटना और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को लेकर जारी इनपुट के बीच कोई साझा नेटवर्क या कनेक्शन मौजूद है।
जांच एजेंसियों के सामने छह बड़े सवाल
- ब्लास्ट का असली मकसद क्या था? क्या यह रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश थी या किसी ट्रेन को निशाना बनाने की साजिश?
- क्या यह ट्रायल ब्लास्ट था? क्या किसी बड़े हमले से पहले विस्फोटक सामग्री और नेटवर्क की क्षमता परखने की कोशिश की गई?
- क्या किसी नए स्लीपर सेल को टास्क दिया गया था? क्या स्थानीय स्तर पर सक्रिय किसी व्यक्ति या मॉड्यूल ने हैंडलर के निर्देश पर यह कार्रवाई की?
- क्या ISI और शहजाद भट्टी नेटवर्क का कोई कनेक्शन है? क्या पाकिस्तान से संचालित किसी पुराने आतंकी नेटवर्क की इसमें भूमिका है?
- क्या ड्रोन से हथियार और RDX भेजने वाला नेटवर्क सक्रिय था? क्या अक्टूबर में श्रीगंगानगर पहुंची कथित खेप का इस ब्लास्ट से कोई संबंध है?
- क्या किसी बड़े हमले की तैयारी चल रही थी? क्या रेलवे, सेना या अर्धसैनिक बलों के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोई योजना बनाई जा रही थी?
सिर्फ रेलवे ट्रैक पर विस्फोट नहीं, नेटवर्क की तलाश
फिलहाल जांच का सबसे अहम पहलू विस्फोट की प्रकृति और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की पहचान करना है. स्थानीय पुलिस ने विस्फोटक अधिनियम, रेलवे अधिनियम, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित प्रावधानों और BNS की अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है. राजस्थान ATS से लेकर NIA, IB, मिलिट्री इंटेलिजेंस, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और पंजाब पुलिस तक की सक्रियता बताती है कि इस घटना के सभी संभावित सुरक्षा पहलुओं की जांच की जा रही है.
फॉरेंसिक रिपोर्ट, विस्फोट के अवशेष, स्थानीय स्तर पर हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ, डिजिटल साक्ष्य और पाकिस्तान से संचालित संदिग्ध नेटवर्क के इनपुट इस जांच की दिशा तय करेंगे. सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि श्रीगंगानगर में हुआ यह विस्फोट सिर्फ रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश थी, किसी आतंकी नेटवर्क का ट्रायल ब्लास्ट था या किसी बड़ी साजिश की शुरुआती कड़ी? इसका जवाब जांच पूरी होने और ठोस सबूत सामने आने के बाद ही मिल सकेगा.




