The India Story Review: रसोई के जहर से अदालत के संग्राम तक, परदे पर दिखा एक बाप का भारी दर्द, कैसी है श्रेयस तलपड़े की फिल्म?

The India Story Review: रसोई के जहर से अदालत के संग्राम तक, परदे पर दिखा एक बाप का भारी दर्द, कैसी है श्रेयस तलपड़े की फिल्म?

The India Story: आपकी थाली के जहरीले सच का पर्दाफाश करती श्रेयस तलपड़े की फिल्म 'द इंडिया स्टोरी' रिलीज हो चुकी है. क्या ये फिल्म आपका पैसा वसूल करा पाएगी? पढ़ें रिव्यू.

Shreyas Talpade The India Story Review: क्या आपने कभी सोचा है कि रोज सुबह आपके घर में जो हरी-भरी सब्जियां, ताजे फल और दूध आ रहा है, वो सेहत बना रहा है या धीमा जहर बनकर शरीर में घुल रहा है? रेस्टोरेंट का नाम तो हम सब चेक कर लेते हैं, लेकिन खाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों की क्वालिटी पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता. निर्देशक चेतन डीके की नई फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी’ इसी खौफनाक और कड़वी हकीकत का पर्दाफाश करने का दावा करती है. श्रेयस तलपड़े, काजल अग्रवाल और मनीष वाधवा जैसे सितारों से सजी ये फिल्म आपकी थाली के पीछे छिपे सबसे बड़े कॉरपोरेट और खेती के ‘जहरीले खेल’ पर सवाल उठाती है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये फिल्म थिएटर्स में आपको कुर्सी से बांधकर रख पाएगी? क्या यह सिर्फ एक इमोशनल भाषण बनकर रह जाती है या फिर हम पर इंपैक्ट कर पाती है? आइए आइए पर विस्तार से चर्चा करते हैं

कहानी

फिल्म की कहानी घूमती है योगेश पाटिल (श्रेयस तलपड़े) के इर्द-गिर्द, जो भारतीय सेना का एक्स-सिपाही है. योगेश अपनी 7 साल की मासूम बेटी परी (तृषा शारदा) को जान से ज्यादा चाहता है. लेकिन उसकी हंसती-खेलती जिंदगी तब तबाह हो जाती है जब उसकी नन्हीं परी को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी घेर लेती है. डॉक्टरों और जांच से योगेश को पता चलता है कि उसकी बेटी की इस हालत की वजह कोई आनुवंशिक बीमारी नहीं, बल्कि फसलों पर छिड़के जाने वाले खतरनाक और जहरीले पेस्टिसाइड्स (कीटनाशक) हैं, जो खाने के जरिए उसके शरीर में पहुंचे हैं. अपनी बेटी को खोने के बाद योगेश का मकसद सिर्फ बदला लेना नहीं रहता, बल्कि वो देश की पूरी फूड सप्लाई चेन और जहरीली खेती के खिलाफ जंग छेड़ देता है. वो बड़े-बड़े कॉरपोरेट पेस्टिसाइड ब्रांड्स और सिस्टम को हाई कोर्ट में घसीटने का फैसला करता है. लेकिन लड़ाई आसान नहीं है!

पुलिस तो एफआईआर दर्ज करने से भी मना कर देती है और शहर का कोई वकील उसका केस लड़ने को तैयार नहीं होता. ऐसे में एंट्री होती है एडवोकेट अर्चना (काजल अग्रवाल) की, जो बिना किसी डर के योगेश का हाथ थामती है. दूसरी तरफ कंपनियों का पक्ष रखने के लिए आता है शातिर वकील (मनीष वाधवा). क्या एक बेबस पिता अपने दर्द को देश के लिए बदलाव में बदल पाता है? ये जानने के लिए आपको थियेटर में जाकर श्रेयस तलपदे की द इंडिया स्टोरी देखनी होगी.

जाने कैसी है फिल्म

‘द इंडिया स्टोरी’ एक नेक इरादे से बनी फिल्म है. फसलों पर जहरीले पेस्टिसाइड्स (कीटनाशकों) का इस्तेमाल, जिससे बच्चों में कैंसर हो रहा है, ये मुद्दा वाकई रोंगटे खड़े करने वाला और आंखें खोलने वाला है. जब आप पर्दे पर एक पिता को उसकी 7 साल की मासूम बेटी के कैंसर से लड़ते देखते हैं, तो वो इमोशन सीधे दिल पर वार करता है. लेकिन सिनेमा के चश्मे से देखें, तो इसमें सामाजिक संदेश इतना ज्यादा हावी हो जाता है कि ऐसा लगता है कि हम कोई फिल्म नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कोई डॉक्यूमेंट्री या अवेयरनेस कैंप देख रहे हों. कोर्टरूम ड्रामा में 90 के दशक जैसा बहुत ज्यादा रोना-धोना, लाउड मेलोड्रामा और लंबे-चौड़े भाषण ठूंस दिए गए हैं. जो मुद्दा बहुत ज्यादा असरदार और थ्रिलिंग हो सकता था, वो ढीले स्क्रीनप्ले और सुस्त रफ्तार की वजह से पर्दे पर थोड़ा बोरिंग लगने लगता है.

एक्टिंग

श्रेयस तलपड़े (योगेश पाटिल) ने एक लाचार, टूटे हुए लेकिन हिम्मत न हारने वाले पिता के रोल में अपनी जान झोंक दी है. अपनी मासूम बेटी को खोने का दर्द और आंखों में सिस्टम के खिलाफ ग़ुस्से को श्रेयस ने अपने इमोशनल सीन्स में बेहतरीन काम किया है. वो पर्दे पर एक आम बाप का दर्द बखूबी लाते हैं.

काजल अग्रवाल (एडवोकेट अर्चना) ने एक निडर और कड़क वकील का किरदार निभाया है. भले ही कोर्टरूम के लंबे भाषणों में स्क्रिप्ट थोड़ी ढीली पड़े, लेकिन भावुक और संवेदनशील मौकों पर काजल का काम काफी असरदार और देखने लायक है.

तृषा शारदा (परी) ने इस फिल्म में सबसे ज्यादा दिल जीता है. उनकी मासूमियत और अस्पताल के बेड पर उनका दर्द देखकर किसी भी दर्शक की आंखें नम हो सकती हैं.

मनीष वाधवा और मुरली शर्मा: मनीष वाधवा ने डिफेंस लॉयर के रोल में वही अपनी जानी-पहचानी लेकिन असरदार मौजूदगी दर्ज कराई है. वहीं मुरली शर्मा एक पुलिस अफसर के कैमियो में छोटे से रोल में भी छाप छोड़ जाते हैं.

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डायरेक्शन, म्यूजिक और मेकिंग

फिल्म का निर्देशन चेतन डीके ने किया है, ये उनकी पहली फिल्म है और इसकी कहानी सागर बी. शिंदे ने लिखी है. फिल्म का डिस्क्लेमर शुरुआत में ही साफ कर देता है कि ये पब्लिक डोमेन में मौजूद खबरों और जानकारियों पर आधारित है. मेकिंग की बात करें, तो मेकर्स का इरादा 100% नेक और जनहित में है. दूध में मिलावट, सब्जियों पर रंग और कीटनाशकों के छिड़काव का जो डर हमारे दिलों में रहता है, फिल्म उस पर सीधा हमला करती है. लेकिन, अगर सिनेमा के चश्मे से देखें, तो फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी आउटडेटेड मेकिंग है! बैकग्राउंड म्यूजिक और एडिटिंग में भी काफी ढील नजर आती है. अगर एडिटर साहब थोड़ी कैंची चलाते और भाषणबाजी को कम करके थ्रिलर एलिमेंट बढ़ाते, तो फिल्म में अलग ही भौकाल जम जाता!

देखें या नहीं

कुल मिलाकर कहें, तो ‘द इंडिया स्टोरी’ कोई बहुत कमाल की टेक्निकल या ऑस्कर-लेवल की सिनेमाई मास्टरपीस नहीं है, लेकिन इसका इमोशन और मैसेज सीधे दिल को छू जाता है. ये एक ऐसी आईना दिखाने वाली फिल्म है जो आपको अपनी थाली में रखे खाने पर सोचने के लिए मजबूर कर देगी. अगर आप सामाजिक मुद्दों, कोर्टरूम ड्रामा और श्रेयस तलपड़े की एक्टिंग देखना चाहते हैं, तो ये फिल्म आपके लिए वन टाइम वॉच है. लेकिन अगर आप सिर्फ चटपटा मनोरंजन, एक्शन और पैसा-वसूल एंटरटेनमेंट ढूंढ रहे हैं, तो शायद ये फिल्म आपके लिए नहीं है.

सोनाली नाईक
सोनाली नाईक

सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.

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