अंतिम संस्कार के लिए भी छुट्टी नहीं?… परदेस जाकर मां-बाप को भूलने वाली पीढ़ी पर भड़के थे नाना पाटेकर, कहा था- ‘बर्दाश्त नहीं’

अंतिम संस्कार के लिए भी छुट्टी नहीं?… परदेस जाकर मां-बाप को भूलने वाली पीढ़ी पर भड़के थे नाना पाटेकर, कहा था- ‘बर्दाश्त नहीं’

Nana Patekar: इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने बुजुर्गों के अकेलेपन पर दिल छू लेने वाला किस्सा सुनाया था. उन्होंने बताया था कि कैसे बच्चे प्राइवेसी के नाम पर मां-बाप को बेगाना कर देते हैं.

Nana Patekar: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर सिर्फ अपनी दमदार अदायगी के लिए ही नहीं जाने जाते थे, बल्कि समाज की दुखती रग पर बेबाकी से उंगली रखने के लिए भी पहचाने जाते थे. टीवी9 को दिए अपने एक यादगार इंटरव्यू में जब फिल्म ‘वनवास’ और पारिवारिक रिश्तों पर चर्चा छिड़ी, तो नाना पाटेकर ने आज की आधुनिक पीढ़ी और बुजुर्ग माता-पिता के बीच की उस कड़वी हकीकत को बयां किया था, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं. नाना पाटेकर ने बताया था कि कैसे आज संयुक्त परिवार (एकत्र कुटुंब पद्धति) बिखरते जा रहे हैं और बच्चे अपने ही मां-बाप को अनजाने में बेगाना कर रहे हैं.

नाना पाटेकर ने बताया था कि मेरा घर शिवाजी पार्क के ठीक सामने है. मैं अक्सर देखता था कि 10-12 बुजुर्ग लोग शाम 6 बजे से वहां आकर बैठते थे. उनमें से तीन बुजुर्ग ऐसे थे जो रात के 10 बजे तक वहीं बैठे रहते थे. एक दिन मुझसे रहा नहीं गया, मैं उनके पास गया और पूछा कि चाचाजी, आप शाम 6 बजे के आए हैं और 10 बजने को हैं, आप घर क्यों नहीं गए? नाना ने बताया कि उस बुजुर्ग के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, वे मुस्कुराए और उन्होंने जो जवाब दिया, उसने अंदर तक हिला दिया. बुजुर्ग ने कहा,”नाना, हमारे पास 2 कमरे का छोटा सा घर है. बेटा और बहू दोनों दिनभर नौकरी पर जाते हैं. जब वे शाम को थककर घर लौटते हैं, तो अगर मैं घर में रहूंगा तो उन्हें वो प्राइवेसी नहीं मिल पाएगी. इसलिए मैं शिवाजी पार्क के कट्टे पर आकर बैठ जाता हूं ताकि उन्हें दो-चार घंटे अकेले मिल सकें. रात को जब वे सो जाते हैं, तब मैं घर जाता हूं.

‘बाबा, कुछ चाहिए क्या?’

नाना ने भावुक होकर कहा था कि जो मां-बाप अपने बच्चों के लिए इतना सोचते हैं, वे बच्चे बदले में क्या चाहते हैं? बस इतना ही कि कभी आंख में आंसू आ जाएं, तो कोई कंधे पर हाथ रखकर पूछ ले-‘बाबा, कुछ चाहिए क्या?’

अंतिम संस्कार के लिए छुट्टी नहीं?

इस इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने उन बच्चों को भी आईना दिखाया था, जो पढ़ाई और पैसे के लिए विदेश चले जाते हैं और अपने बूढ़े माता-पिता को भारत में अकेला छोड़ देते हैं. नाना ने अपने एक दोस्त का उदाहरण देते हुए बताया था कि मेरे एक दोस्त का निधन हुआ. उसके दो बेटे विदेश में रहते थे. सिर्फ बड़ा बेटा आया, छोटा नहीं आया. जब मैंने पूछा कि छोटा क्यों नहीं आया, तो जवाब मिला कि उसे छुट्टी नहीं मिली, वो मां के वक्त आ जाएगा! एक बाप होने के नाते अगर मेरा बेटा मुझसे कहे कि आपके अंतिम संस्कार के लिए मेरे पास छुट्टी नहीं है, तो यह बात मुझसे बर्दाश्त नहीं होती. बच्चों को विदेश में पढ़ना चाहिए, कमाना चाहिए, लेकिन वहां बसना नहीं चाहिए.

अपने देश वापस आओ और जो सीखा है, उसका फायदा अपने देश के लोगों को दो. मां-बाप यहां सिर्फ एक फोन कॉल का इंतजार करते रह जाते हैं. नाना पाटेकर के ये शब्द आज भी हर उस इंसान को झकझोरते हैं, जो करियर और पैसे की अंधी दौड़ में अपने परिवार और जड़ों को पीछे छोड़ता जा रहा है.

सोनाली नाईक
सोनाली नाईक

सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.

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