Varun Luhari Crime Story: ‘मास्टरजी’ का बेटा कैसे बना गैंगस्टर? 11 साल पुरानी दुश्मनी में 3 मौतें; जानिए वरुण लुहारी की क्राइम कुंडली

Varun Luhari Crime Story: ‘मास्टरजी’ का बेटा कैसे बना गैंगस्टर? 11 साल पुरानी दुश्मनी में 3 मौतें; जानिए वरुण लुहारी की क्राइम कुंडली

बागपत जिले में 9 जून को हुए सनसनीखेज डबल मर्डर ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया. दिनदहाड़े एक व्यापारी और उसके बेटे की गोली मारकर हत्या करने वाले कुख्यात बदमाश वरुण लुहारी का अंत भी कुछ ही मिनटों में गुस्साई भीड़ के हाथों हो गया. इस वारदात ने 11 साल पुरानी दुश्मनी की उस कहानी को भी फिर से चर्चा में ला दिया, जो इस हत्या की वजह बताई जा रही.

Varun Luhari Crime Story: बागपत जिले के बड़ौत में व्यापारी सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास अग्रवाल की हत्या के बाद मुख्य आरोपी हिस्ट्रीशीटर वरुण दांगी उर्फ वरुण लुहारी की मौत ने एक ऐसे परिवार की कहानी सामने ला दी है, जिसे कभी इलाके में सम्मानित और शिक्षित परिवार के रूप में जाना जाता था. बड़ौत के जनता वैदिक इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त PTI बाबूराम दांगी का परिवार कभी शिक्षा, खेल और उपलब्धियों के लिए पहचाना जाता था, लेकिन पिछले डेढ़ दशक में अपराध, गैंगवार और खूनी रंजिश ने इस परिवार का नाम सबसे ऊपर रहा. आज हालात यह हैं कि परिवार के दो बेटों की मौत हो चुकी है, पिता जेल पहुंच चुके हैं और पूरा परिवार एक बार फिर सुर्खियों में है.

शिक्षक का परिवार, बड़े सपने और पढ़े-लिखे बेटे

लुहारी गांव निवासी बाबूराम दांगी जनता वैदिक इंटर कॉलेज में PTI (शारीरिक शिक्षा शिक्षक) रहे. क्षेत्र में उन्हें लोग सम्मान से ‘मास्टरजी’ कहकर बुलाते थे. उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई और उन्हें बेहतर भविष्य देने का प्रयास किया. उनके परिवार का बड़ा बेटा वरुण दांगी उर्फ वरुण लुहारी पढ़ाई में अच्छा था. उसने LLB की पढ़ाई पूरी की थी और परिवार को उम्मीद थी कि वह कानून के क्षेत्र में करियर बनाएगा. दूसरा बेटा करुण दांगी इंजीनियर बना और वर्तमान में हरिद्वार में कार्यरत है, जबकि सबसे छोटा बेटा कपिल दांगी खेलों में प्रतिभाशाली था. ग्रामीणों के अनुसार, कपिल नेशनल स्तर का शूटर था और उसने विभिन्न प्रतियोगिताओं में दर्जनों पदक जीते थे. आइए जानते हैं इस परिवार के अपराध में कूदने की कहानी कहां से शुरू हुई…

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बाजार में दिनदहाड़े बरसी गोलियां

घटना बागपत के बड़ौत कस्बे की है. 9 जून की शाम बस स्टैंड के पास स्थित व्यस्त बाजार में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दो हथियारबंद बदमाश कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल की दुकान पर पहुंचे और उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. गोली लगने से सोहनलाल गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े. पिता को बचाने के लिए उनका बेटा विकास अग्रवाल आगे आया, लेकिन हमलावरों ने उसे भी निशाना बना लिया. कुछ ही सेकंड में दोनों जमीन पर लहूलुहान पड़े थे. बीच-बचाव करने की कोशिश करने वाले एक राहगीर को भी गोली लग गई, जिसकी हालत गंभीर बनी हुई है.

हत्या के बाद भागने की कोशिश में घिर गया वरुण लुहारी

डबल मर्डर को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी हिस्ट्रीशीटर वरुण लोहारी अपने साथी के साथ मौके से भागने लगा, लेकिन वारदात को अपनी आंखों के सामने देखने वाले व्यापारियों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. सैकड़ों लोगों ने वरुण को घेर लिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ ने उसे इतना पीटा कि वह गंभीर रूप से घायल हो गया. इसी दौरान उसे गोली लगने की भी बात सामने आई. पुलिस किसी तरह उसे भीड़ से निकालकर अस्पताल ले गई, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

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सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास अग्रवाल की हुई थी हत्या.

11 साल पुरानी दुश्मनी बनी कत्ल की वजह

पुलिस जांच में सामने आया कि इस हत्याकांड की जड़ें वर्ष 2015 की एक घटना से जुड़ी हैं. बताया जाता है कि 17 जुलाई 2015 को वरुण लुहारी अपने कुछ साथियों के साथ शराब पार्टी कर रहा था. इसी दौरान वह एक दुकान पर पहुंचा और बिना पैसे दिए सामान लेने लगा. इस बात को लेकर विवाद बढ़ गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए. विवाद इतना बढ़ा कि फायरिंग हो गई, जिसमें वरुण के छोटे भाई कपिल लोहारी की मौत हो गई थी.

इस मामले में कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल को नामजद आरोपी बनाया गया था. तभी से दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी चली आ रही थी. बताया जा रहा कि इसी मामले में कोर्ट में पेशी के लिए वरुण लुहारी हाल ही में बड़ौत आया था और उसने पुरानी रंजिश निकालने के लिए इस खूनी वारदात को अंजाम दे दिया.

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शिक्षक का बेटा कैसे बना गैंगस्टर?

वरुण लुहारी का परिवार सामान्य पृष्ठभूमि से जुड़ा था. उसके पिता बाबूराम पेशे से शिक्षक थे और बाद में सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन भाई की मौत के बाद वरुण अपराध की दुनिया में उतर गया. समय के साथ वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित अपराधियों में शामिल हो गया. उसके खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट समेत करीब 19 गंभीर मुकदमे दर्ज हुए. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह लंबे समय तक इलाके के व्यापारियों और कारोबारियों के लिए सिरदर्द बना रहा. वर्ष 2023 में प्रशासन ने गैंगस्टर एक्ट के तहत उसकी संपत्ति पर कार्रवाई करते हुए बड़ौत स्थित मकान को कुर्क कर दिया था.

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जेल में रहते हुए भी मांगी थी रंगदारी

वरुण का आपराधिक नेटवर्क जेल के अंदर से भी सक्रिय बताया जाता है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2019 में जेल में बंद रहने के दौरान उसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक बड़े व्यापारी से 15 लाख रुपए की रंगदारी मांगी थी. संपत्ति कुर्क होने के बाद उसका परिवार उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में रहने लगा था. इसके बावजूद उसका आपराधिक प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था.

परिवार का आरोप- पहले ही दी थी सूचना

मृतक व्यापारी के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. परिवार का कहना है कि उन्होंने वारदात से कुछ दिन पहले ही पुलिस को सूचना दी थी कि वरुण लुहारी कोर्ट की तारीख पर आने वाला है और उनसे खतरा हो सकता है. इसके बावजूद कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई. परिजनों के मुताबिक, घटनास्थल से तहसील की दूरी करीब 50 मीटर और पुलिस चौकी महज 100 मीटर दूर है. इसके बावजूद हमलावर आसानी से वारदात को अंजाम देने में सफल रहे.

नवविवाहिता पत्नी पर टूटा दुखों का पहाड़

इस घटना ने अग्रवाल परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है. मृतक विकास अग्रवाल की शादी 4 दिसंबर 2025 को हुई थी. परिवार के अनुसार, विकास की पत्नी करीब तीन महीने की गर्भवती है. शादी के महज कुछ महीनों बाद पति की हत्या ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.

पुलिस की कार्रवाई जारी

इस मामले में पुलिस ने मृतक पक्ष की शिकायत पर पांच नामजद और एक अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस ने मुख्य आरोपी वरुण लुहारी के पिता बाबूराम को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं फरार आरोपियों सचिन उर्फ मोंटो और जयंत गोलू समेत अन्य संदिग्धों की तलाश के लिए 10 विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है. इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी तैनात किया गया है.

पारस जैन
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