Surender Sharma: जब सुरेंद्र शर्मा की कविता सुन हंसने लगी थीं इंदिरा गांधी, अटल बिहारी बाजपेयी के बारे में क्या कहा?

Surender Sharma: जब सुरेंद्र शर्मा की कविता सुन हंसने लगी थीं इंदिरा गांधी, अटल बिहारी बाजपेयी के बारे में क्या कहा?

Poet Surender Sharma: नामी कवि सुरेंद्र शर्मा ने हालिया पॉडकास्ट के दौरान साहित्य और कला के बारे में तो बातें की ही साथ ही राजनीति से जुड़े विषयों पर भी खुलकर बातें की. उन्होंने वो किस्सा शेयर किया जब इंदिरा गांधी ने उनसे मुलाकात की थी और उन्होंने इंदिरा के सामने एक कविता भी पढ़ी थी. इसके अलावा उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में भी बातें की.

Surender Sharma on Indira Gandhi: कवि सुरेंद्र शर्मा ने अपने 5 दशक से ज्यादा लंबे करियर में कई मंच साधे हैं और कई कवि सम्मेलनों का हिस्सा रहे हैं. उन्हें साहित्य में सराहनीय काम के लिए पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था. 81 वर्षीय हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने हाल ही में टीवी9 भारतवर्ष के खास पॉडकास्ट ना काहूं से बैर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इस दौरान उन्होंने मौजूदा दौर के साहित्य पर बात करने के साथ ही राजनीति पर भी चर्चा की. उन्होंने इस दौरान इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान नेताओं संग मुलाकात से जुड़े अपने अनुभव शेयर किए.

सुरेंद्र शर्मा से पूछा गया कि आज के दौर में भावनाएं बड़ी जल्दी आहत हो जाती हैं. इसपर उनका क्या कहना है. कवि ने इस पर कहा- ऐसा इसलिए हो गया है क्योंकि आज के दौर में लिखने वाले के अंदर भी ठेस पहुंचाने की नियत है. वो चाहता है कि सामने वाला आहत हो. इस मंशा से अगर कोई चीज लिखी जाएगी तो सामने वाला आहत भी होगा. आप वैसे मत लिखो तो आहत नहीं होगा.’

कवि से पूछा गया कि नेताओं के सामने नेताओं के ऊपर ही व्यंग करना एक हास्य कवि के लिए कितना मुश्किल है. इसका जवाब देते हुए सुरेंद्र शर्मा ने कहा- पहले इतना नहीं था लेकिन अब हो गया है. पहले सबमें टॉलरेंस पावर थी लेकिन अब नहीं है. पहले के समय में सभी सुनते थे. चाहें राजीव गांधी रहे हों, चाहें वीपी सिंह रहे हों या इंदिरा गांधी रही हों. इंदिरा जी से मेरी एक बार मुलाकात हुई थी. वो मुझे नहीं जानती थीं. जगन्नाथ पहाड़िया मुझे ले गए थे कि हास्य रस का कवि है तो उन्होंने बोला था कि कुछ सुनाओ.

जब इंदिरा गांधी को कवि सुरेंद्र शर्मा ने सुनाई कविता

सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि ये बात 1978 के आसपास की है जब इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थीं. सुरेंद्र ने उस दौरान इंदिरा गांधी को जनता पार्टी पर लिखी कविताएं सुनाई थीं. नया प्रधानमंत्री चुनने में पार्टी को समय लग रहा था तो उसी पर एक कविता थी. ऐसी ही और भी कविताएं थीं जिन्हें सुनकर इंदिरा गांधी काफी खुश हो गई थीं. इसके बाद इंदिरा गांधी ने पूछा कि हमारे ऊपर भी कुछ लिखा है क्या. तो सुरेंद्र जी ने कांग्रेस की हार का कारण नाम से कविता लिखी थी. इसमें संजय गांधी पर व्यंग था. लेकिन इसे सुनकर भी इंदिरा गांधी हंसी थीं.

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अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात का जिक्र

अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात का किस्सा सुनाते हुए सुरेंद्र शर्मा ने कहा- एक-दो बार ऐसा हुआ कि अटल जी के साथ मंच साझा करने का मौका मिला. उनसे ज्यादा डेमोक्रेसी को सम्मान देने वाला कोई नेता पैदा नहीं हुआ. उनसे लोगों को सीखना चाहिए कि किस तरह से राजनीति होती है राजनीति के सम्मान का उदाहरण वाजपेयी जी से ज्यादा अच्छा कोई नहीं दे सकता है. अटल जी का एक कवि सम्मालेन में अमंत्रण था तालकटोरा स्टेडियम में. वे उस समय प्रधानमंत्री थे. मैं ही संचालन कर रहा था. इस दौरान ही मैंने उनसे कहा कि आपको कविता पढ़नी है. तो उन्होंने कहा कि मंच पर आ जाऊंगा लेकिन कविता नहीं पढ़ूंगा. वे आए भाषण दिया और फिर बैठ गए.

लेकिन उनकी डिमांड बढ़ती जा रही थी और पब्लिक चाह रही थी कि वे कविता पाठ करें. फिर मैंने बात संभालने की कोशिश की और जनता को समझाया. मैंने जनता को कहा कि इस बात को आप समझिए कि कोई कवि अगर प्रधानमंत्री भी बन जाए तो भी वो बिना पेमेंट लिए कविता नहीं पढ़ता है. इस बात पर वे उठकर आए और उन्होंने कविता पाठ किया.

आशीष पांडे
आशीष पांडे

दो दशक से पत्रकारिता की वैचारिक दुनिया का शिष्य हूं. बदलते दौर का खामोश तमाशबीन हूं. पढ़ना शौक है और लिखना पेशा. मन से बनारसी, विचार से कल्कत्ते, दिल से पहाड़ी, फितरत से कानपुरिया और पते से दिल्ली का हूं. फिलहाल TV9 भारतवर्ष में बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर कार्यरत हूं.

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