Toxic Explain: ज़हर भरी ज़िंदगी में रिश्तों के अमृत की प्यास…यश-कियारा की टॉक्सिक में इतना खून-खराबा क्यों है?

Toxic Explain: ज़हर भरी ज़िंदगी में रिश्तों के अमृत की प्यास…यश-कियारा की टॉक्सिक में इतना खून-खराबा क्यों है?

पीरियड क्राइम ड्रामा Toxic के वायलेंस वाले सीन पर बहस शुरू हो गई. यश फुल एक्शन में हैं और स्टाइलिश भी. नयनतारा, कियारा, तारा, रुक्मणी और हुमा के रोल भी अहम हैं. टॉक्सिक की क्या है कहानी, जानते हैं.

यश की टॉक्सिक (Toxic) एक्शन और वायलेंस प्रधान फिल्म है. लिहाजा इस जॉनर में यह फिल्म दर्शकों का मनोरंजन कराने में कितनी कामयाब हो पाएगी, इसके क्राफ्ट को समझने की कोशिश करते हैं. वायलेंस और एक्शन पिछले कुछ सालों से हमारी फिल्मों का प्रमुख विषय बन गया है. गीतू मोहनदास के निर्देशन में आई करीब सवा तीन घंटे की टॉक्सिक में वह वायलेंस बेशक अब नेक्स्ट लेवल का है लेकिन उसकी वजह क्या है और वे कितने तार्किक हैं- इसे भी परखा जाना चाहिए. फिल्म की सफलता इसी में निहीत हैं,

टॉक्सिक फिल्म रिलीज से पहले से ही विवादों में रही है. कियारा के तबाही… गाने के अलावा यश के खूंखार लुक देख दर्शकों ने कयास लगा लिया था कि फिल्म में वायलेंस और अनैतिक संबंधों के चौंकाने वाले नजारे हो सकते हैं. लेकिन जब हम फिल्म देखने बैठते हैं तो इसके अनेक सीन हमारी कल्पना को भी झकझोर देते हैं. कौन किरदार, कब और किसको कैसे मार देगा या हाथ-गर्दन काट देगा- ये समझ से परे लगता है.

खतरनाक हिंसा के बीच रिश्तों की तलाश

टॉक्सिक में बेतहाशा हिंसा के ढेर सारे अकल्पनीय सीन रचे गए हैं. अनैतिक संबंध भी भरपूर दिखाए गए हैं. कुछ लोगों को टॉक्सिक टॉर्चर करने वाली लग सकती है. लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि खून से लथपथ कहानी में रिश्तों की संवेदना कहीं ना कहीं दबी हुई दिखती है, खतरनाक हिंसा की बुनियाद में जिसकी तलाश एक अहम मुद्दा है.

टॉक्सिक की कहानी में गोवा की पृष्ठभूमि है. आजादी से पहले का भी बैकड्रॉप है. देश को अंग्रेजों से तो आजादी मिल गई लेकिन गोवा अब भी पुर्तगालियों के कब्जे में है. और गोवा अनेक प्रकार के अनैतिक धंधों का गैरकानूनी अड्डा बना हुआ है. ड्रग तस्करी, कैसिनो, अवैध शराब, सिगार, देह व्यापार और मार-काट का मंजर है. जुर्म के इसी परिवेश में मुख्य किरदार राया यानी यश पला बढ़ा है- ऐसे में उसके किरदार के मिजाज से हम और क्या उम्मीद कर सकते हैं! वह साधु तो हो नहीं सकता, गैंगस्टर ही बन सकता है.

शराब, शबाब और सिगार के धुंए

फिल्म में यश का एक संवाद है- उसकी मदर टंग वायलेंस है जो कि उसके लिए यूनिवर्सिल लेंग्वेज हैं. यानी उसकी मातृभाषा हिंसा है, और यही उसकी जुबान है- उसे सिर्फ और सिर्फ गोली, गाली, चाकू और बंदूक की भाषा आती है. वह मारना-काटना जानता है, क्योंकि उसने बचपन से यही देखा है, वह अनैतिक संबंध बनाना भी जानता है क्योंकि उसने बचपन में यही सबकुछ देखा है. शराब, शबाब और सिगार उसे खास पसंद है. यानी वह जिस माहौल में जीता है, वह अत्यंत जहरीला है, यही जहर उसके दिमाग की नसों में सवार हो चुका है.

यश का यह डायलॉग फिल्म की कहानी की नींव का अहम हिस्सा है. राया उस मां का बेटा है, जो जिस्मफरोशी कर अपना और अपने किशोर बेटे और जवान बेटी का लालन-पालन करती है. उसने बचपन में सबसे पहले अपने घर में भयानक हिंसा देखी थी. मां ने उसके पिता की उसकी नजरों के सामने नृशंस हत्या कर दी थी. मां के निधन के बाद बहन गंगा (नयनतारा) ही उसके लिए मां-बाप की भूमिका निभाते हैं. गंगा और राया (यश-नयनतारा) के बहाने फिल्म में भाई-बहन के रिलेशन की बाउंडिंग को बखूबी दिखाया गया है. गंगा अपने छोटे भाई की हिफाजत के लिए अपनी जान की बाजी भी लगा सकती है.

पीरियड क्राइम ड्रामा में भले ही नाजायज संबंधों और नाजायज संतानों की कहानी है लेकिन रिश्ते की संवेदना अपनी जगह बनाने के लिए छटपटाती दिखती है. यहां सभी किरदारों की जिंदगी में जहर घुला है लेकिन रिश्तों के अमृत के लिए भटक रहा है और एक-दूसरे को मार-काट रहा है. फिल्म में भाई-बहन के रिश्तों के अलावा मां-बेटे और बाप-बेटे के जज्बाती रिश्ते भी दर्शाए गए हैं जो बीच बीच में आते हैं और कहानी को भावुक बनाते हैं.

कियारा आडवाणी ने जीता दिल

फिल्म में कियारा आडवाणी एक अहम रोल में है- वह सर्कस की कलाकार है- जलपरी, हुस्नपरी के नाम से विख्यात है. उसके किरदार का नाम नाडिया है. नाडिया और राया जब मिलते हैं तो राया कहती है-जब अगली बार छूना तो मुझे लगना चाहिए कि तुम मेरे आशिक हो ना कि मालिक. यानी नाडिया को भी सच्चे प्रेम की तलाश है. उधर राया से सच्चे प्रेम की उम्मीद रेबेका (तारा सुतारिया) को भी है. नाडिया जब राया के बच्चे की मां बनती है तब वह राया को समझा पाती है कि मां का प्यार बच्चे के लिए कितना अहम होता है. नाडिया का बेटा ही बड़ा होकर यश का डबल रोल यानी टिकेट बनता है.

नाडिया के बाद राया की जिंदगी में अब तीसरी लड़की आती है- मेलिसा (रक्मणी बसंत). मेलिसा अपने बेटे को राया के साया से भी दूर रखना चाहती है, वह पिता की जुर्म की दुनिया की परछाईं भी नहीं पड़ने देना चाहती. यानी फिल्म जिस एक्शन और हिंसा पर केंद्रित है, वहां उसके सारे पात्र या तो उसके शिकार हैं या फिर उससे आज़ादी चाहते हैं.

यश का एक्शन और एक्टिंग

फिल्म में एक्शन और वायलेंस का क्राफ्ट चौंकाने वाले जरूर हैं लेकिन इसके सीक्वेंस नजरों के आगे टिकते कम हैं यानी एक सीन स्टैबलिश होने ही वाला होता है कि दूसरा सीन दिमाग पर दस्तक देने लगता है. इससे तारतम्यता भंग होती है. लेकिन एक्शन और एक्टिंग में यश की परफॉर्मेंस प्रशंसनीय है. बाप-बेटे के डबल रोल में यश चौंकाते हैं. जिन दर्शकों ने केजीएफ देखी है, उन्हें टॉक्सिक के यश के एक्शन को भी देखने में आनंद आएगा. यश की स्टाइलिश एपीयरेंस में आकर्षण है.

लेकिन बार-बार सिगार पीना बहुत बनावटी लगता है और यही बनावटीपन फिल्म के संवादों में भी है. हिंदी डब की भाषा तो अच्छी है लेकिन सिंक आउट साफ नजर आता है और संवाद अदायगी में बहुत नाटकीयता दिखती है, ऐसा लगता है रंगमंच पर नाटक देख रहे हैें.

कैसी लगीं नयनतारा, तारा, हुमा और रुक्मणी?

यश के अभिनय के अलावा फिल्म की पांचों अभिनेत्रियों में कियारा आडवाणी का पलड़ा सब पर भारी है. नाडिया के रोल में कियारा ग्लैमरस ही नहीं लगी बल्कि उसकी परफॉर्मेंस में गहराई भी दिखी है. कियारा की ये भूमिका यादगार साबित होगी. करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकती है. कियारा के अलावा नयनतारा, तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी और रुक्मणी बसंत ने भी प्रभावशाली अभिनय किया है.

अब देखना ये होगा कि करीब पांच सौ करोड़ के भारी भरकम से बनी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना कलेक्शन कर पाती है.

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संजीव श्रीवास्तव
संजीव श्रीवास्तव

संजीव श्रीवास्तव का पैतृक गांव-घर बिहार के सीतामढ़ी में है लेकिन पिछले करीब ढाई दशक से दिल्ली से लेकर मुंबई तक मीडिया की मुख्यधारा में सक्रिय हैं. ब्रेकिंग न्यूज़ से लेकर क्रिएटिव राइटिंग तक का हुनर रखते हैं, देश-विदेश की राजनीति, फिल्म, लिटरेचर, क्राइम जैसे विषयों पर बेबाकी से लिखते हैं. आसानी से समझ आने वाली और सोचने-विचारने वाली भाषा लिखना पसंद है. सिनेमा प्रिय विषय है- लिहाजा फिल्मों पर अब तक तीन किताबें, दो उपन्यास और कुछ पटकथा-संवाद भी लिख चुके हैं. कुछेक प्रिंट मीडिया में सब एडिटरी के बाद साल 2000 से टीवी न्यूज़ की दुनिया में प्रवेश. सबसे पहले जैन टीवी फिर सहारा समय में करीब 14 साल गुजारा, जहां प्राइम टाइम स्पेशल शोज/प्रोग्राम बनाने से लेकर मुंबई की एंटरटेंमेंट फील्ड में रिपोर्टिंग तक की. उसके बाद सूर्या समाचार, एबीपी न्यूज़ और न्यूज़ इंडिया के आउटपुट होते हुए अब डिजिटल मीडिया में TV9 से सम्बद्ध.

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