Nayyi Navelli Review: यामी गौतम की ‘नई नवेली’ की क्या है कहानी, जानिए इस हॉरर-कॉमेडी में कितना है दम?
Nayyi Navelli Review: यामी गौतम की यह फिल्म थिएटर में रिलीज हो चुकी है. आइए जानते हैं कि हॉरर और कॉमेडी के नाम पर परोसी गई यह फिल्म दर्शकों पर कितना असर छोड़ पाई है.
Nayyi Navelli Review: थिएटर में जब कोई हॉरर-कॉमेडी उतरती है, तो दर्शकों को उम्मीद होती है कि डर के मारे रोंगटे खड़े होंगे और ठहाकों से हॉल गूंज उठेगा. लेकिन जब मेकर्स माइथोलॉजी (पौरानिक कथाओं) के पन्नों को जबरन किसी कमजोर स्क्रिप्ट में लपेटकर पर्दे पर फेंकते हैं, तो नतीजा क्या होता है? इसका सबसे ताजा नमूना है यामी गौतम की फिल्म ‘नई नवेली’. यामी गौतम उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं जिन्होंने ‘आर्टिकल 370’ से लेकर कई फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी का लोहा मनवाया है. उनकी एक्टिंग पर उंगली उठाने का कोई सवाल ही नहीं उठता.
मगर जब किसी बेहतरीन कलाकार को सुपरवुमन बनाने की अंधी दौड़ में पूरी कहानी को ही भगवान भरोसे छोड़ दिया जाए, तो अच्छी खासी फिल्म का कबाड़ा होते देर नहीं लगती. आइए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं.
कहानी
कहानी शुरू होती है मोहिनी (यामी गौतम) की शादी से, जो राजा (आदिनाथ कोठारे) के साथ अवस्थी परिवार के घर बहू बनकर कदम रखती है. सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है, तभी घर का एक सदस्य शक की सुई मोहिनी की तरफ घुमा देता है और उसे ‘डायन’ साबित करने पर तुल जाता है. लेकिन असली खेल तब शुरू होता है जब कहानी सामान्य पारिवारिक ड्रामा से निकलकर रामायण, महाभारत और पौराणिक कथाओं के भारी-भरकम सिंड्रोम में गोता लगाने लगती है. कहानी में रावण-वध और मंदोदरी का एंगल आ जाता है, फिर कभी कभी मोहिनी में कृष्ण जैसी नटखट लीलाएं झांकने लगती हैं, फिर हनुमान जी, देवी मां का एंगल भी जुड़ जाता है, मतलब साफ है कि मेकर्स दर्शकों को कुछ ‘दिलचस्प’ परोसने के चक्कर में ऐसा घालमेल करते हैं कि सिर चकरा जाए.
कैसी है फिल्म?
हॉरर-कॉमेडी जॉनर इस तरह से होना चाहिए कि दर्शक एक पल हंसे और अगले पल डर से कांप जाए, जैसे स्त्री या फिर मुंज्या में हुआ था. मगर ‘नई नवेली’ इन दोनों मोर्चों पर बुरी तरह फेल है. दो घंटे अट्ठारह मिनट की ये फिल्म इतनी लंबी खिंचती है कि थिएटर में बैठे लोग फिल्म देखने के बजाय आपस में बतियाते, इंस्टाग्राम रील्स स्क्रॉल करते या खिड़की से झांकते नजर आए. समस्या यह है कि फिल्म में सब कुछ अकेले यामी गौतम से कराने की जिद कर ली गई है. डायरेक्टर को शायद ये गलतफहमी हो गई कि एक ही को सब कुछ बना दो, तो दर्शक ताली बजाएंगे. हकीकत यह है कि जब बाकी परिवार और किरदारों को स्क्रिप्ट में कोई भाव ही नहीं दिया जाएगा, तो स्क्रीन पर सिर्फ एक भगदड़ मची दिखेगी, कहानी नहीं.

नई नवेली में यामी
निर्देशन और राइटिंग
लेखन के स्तर पर भी ये फिल्म पूरी तरह भटकी हुई है. रामचरितमानस और श्लोकों का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए ठूंस दिया गया है ताकि फिल्म को गंभीर और महान दिखाया जा सके, जबकि उनका स्क्रीनप्ले से दूर-दूर तक कोई तालमेल नहीं बैठता. रावण के वध और राम-रावण के प्रसंगों को जिस सतही तरीके से कहानी में घसीटा गया है, वो गले के नीचे बिल्कुल नहीं उतरता. दर्शकों के साथ सबसे बड़ा मजाक यह किया गया है कि डराने के नाम पर एक भी ‘जंप-स्केयर’ नहीं है और कॉमेडी के नाम पर व्हाट्सएप फॉरवर्ड वाले बासी जोक परोसे गए हैं. अमेजन स्टूडियो ने इससे पहले कम बजट में भी कई कमाल की और कसी हुई फिल्में दी हैं, लेकिन यहां ‘नई नवेली’ के चक्कर में मामला पूरी तरह फुस्स हो गया.
एक्टिंग
यामी गौतम एक बेहद मंझी हुई और शानदार एक्ट्रेस हैं. ‘आर्टिकल 370’ जैसी फिल्मों में उनके काम ने यह साबित कर दिया है कि उनमें गहरी क्षमता है. लेकिन जब पटकथा ही लचर हो और डायरेक्टर उन पर जबरन एक ही फ्रेम में सब कुछ थोपने की कोशिश करे, तो बेचारा कलाकार भी क्या करे? यामी ने अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी दिखाने की कोशिश की है, लेकिन कमजोर राइटिंग के दलदल में उनकी ये मेहनत भी दबकर रह गई. उनके अलावा बाकी पूरी स्टारकास्ट सिर्फ भीड़ बढ़ाने और कैमरे के आगे पीछे घूमने के अलावा खास कमाल नहीं दिखा पाती.

नई नवेली की कास्ट
देखें या नहीं
कुल मिलाकर ‘नई नवेली’ एक ऐसा तमाशा है जिसे देखकर टिकट के पैसे और पॉपकॉर्न दोनों का नुकसान तय है. ये फिल्म इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि सिर्फ एक बड़े स्टार और जबरन के पौराणिक संदर्भों के भरोसे अच्छी फिल्म नहीं बनाई जा सकती. यामी का टैलेंट इस औसत दर्जे की कहानी में पूरी तरह घुटकर रह गया है. इस फिल्म को देखने के बाद तो यही कहा जा सकता है, इसे तो रामजी भी नहीं बचा सकते! इससे अच्छा है कि आप इस सिरदर्द से दूर ही रहें.




