जेपी-राजेंद्र प्रसाद की धरती बिहार के लोगों में क्या ‘सिविक सेंस’ नहीं? गालीबाज टीचर के वायरल वीडियो से उठे सवाल

जेपी-राजेंद्र प्रसाद की धरती बिहार के लोगों में क्या ‘सिविक सेंस’ नहीं? गालीबाज टीचर के वायरल वीडियो से उठे सवाल

केंद्रीय विद्यालय की गालीबाज टीचर का वीडियो वायरल हो चुका है. दीपाली नाम की इस टीचर ने बिहार के लोगों के सिविक सेंस पर ना केवल सवाल उठाये बल्कि अपशब्द भी कहे हैं. फिलहाल शिकायत के बाद इस टीचर को निलंबित कर दिया है लेकिन इस वीडियो ने मानसिकता और समझ को लेकर कई सवाल खड़े कर दिये हैं.

बिहार में केंद्रीय विद्यालय की विवादास्पद टीचर को तत्काल प्रभाव से निलंबित तो कर दिया गया है लेकिन उसके वायरल वीडियो से बवाल मचा हुआ है. सिविक सेंस किसे कहते हैं, इस पर बहस छिड़ गई है. वायरल वीडियो ने कई तरह के सवाल भी खड़े कर दिये हैं. बिहार के जहानाबाद में पोस्टिंग के नाराज महिला टीचर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल कर दिया, जिसमें उसने बिहार के लोगों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था. महिला टीचर का नाम दीपाली है. वायरल वीडियो में उसने बिहार के लोगों के रहन-सहन, भाषा-बोली से लेकर सिविक सेंस पर सवाल उठाये थे. इस वीडियो को देखते हुए समझना मुश्किल है कि क्या इसे यह नहीं मालूम कि जिस धरती के लोगों के बारे में वह गुस्सा और नफरत से भरे शब्दों का इस्तेमाल कर रही है उसी धरती पर चाणक्य, चंद्रगुप्त मौर्य, आर्यभट्ट, गुरुगोविंद सिंह से लेकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद और जयप्रकाश नारायण जैसी विभूतियां का जन्म हुआ था. देश इनके योगदान को कभी भूल नहीं सकता.

अपनी पोस्टिंग से महिला टीचर इतनी खफा थी कि उसने बिहार को देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा बता दिया. दीपाली ने कहा कि हमारा देश विकासशील रह गया है तो इसका जिम्मेदार केवल बिहार है. अगर बिहार को देश से बाहर कर दिया जाये तो देश को विकसित होने से कोई नहीं रोक सकता. इन शब्दों से समझा जा सकता है कि उसके भीतर बिहार के लोगों को लेकर कितनी नफरत भरी हुई है. हैरत तो इस बात पर भी है कि इतने सीमित ज्ञान के साथ इस टीचर ने केंद्रीय विद्यालय जैसे देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू को कैसे क्लियर कर लिया? बिहार ही नहीं बल्कि देश के किसी भी भू-भाग के बारे में इतनी संकीर्ण समझ रखने वाले लोग आखिर बच्चों को क्या शिक्षा देंगे?

टीचर ने बिहार की विभूतियों का भी किया अपमान

सोशल मीडिया पर शेयर किये गये वीडियो में दीपाली ने यहां तक कहा कि उसकी पोस्टिंग अगर लद्दाख, ओडिशा, दक्षिण भारत के राज्य, गोवा या देश के किसी भी प्रदेश में होती तो उसे खुशी मिलती लेकिन बिहार में पोस्टिंग करके केंद्रीय विद्यालय संगठन ने उसकी जिंदगी नरक समान कर दी. बिहार के लोगों को लेकर भद्दी भद्दी गालियों से भरे वायरल वीडियो की आवाज तुरंत सत्ता और सियासत तक पहुंची, जिसके बाद उसके खिलाफ एक्शन लिया गया. सांसद शांभवी चौधरी की शिकायत पर दीपाली को निलंबित कर दिया गया. शांभवी चौधरी ने केंद्रीय विद्यालय संगठन को चिट्ठी लिखी. शांभवी ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि बिहार का अपमान बर्दाश्त नहीं किया सकता. केंद्रीय विद्यालय संगठन फौरन हरकत में आया.

वायरल वीडियो बिहार के बारे में अज्ञानता

जाहिर है बिहार के लोगों के सिविक सेंस पर सवाल उठाकर दीपाली ने प्रदेश की उन महान विभूतियों और सांस्कृतिक विरासत को नीचा दिखाने की कोशिश की है, जिसका देश की आजादी और पौराणिक आख्यानों में अहम स्थान है. सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों में सक्रियता दिखाई है. यह वीडियो उन सभी प्रवासी मजदूरों का भी अपमान है जो देश के कोने कोने में निर्माण कार्यों में जुटे हैं या महानगरों में गरीबी में किसी तरह से रिक्शा चलाकर तो सब्जियां बेचकर गुजारा करते हैं. बिहार और बिहार के लोगों के बारे में ऐसी टिप्पणी करने का उसे तुरंत खामियाजा भुगतना पड़ा.

आने वाले समय में बिहार में विधानसभा का चुनाव होने वाला है, लिहाजा ऐसे मामले को विपक्षी दल हाथों हाथ ना ले ले इसलिए सत्ता पक्ष ने तुरंत एक्शन लेने की मांग की. वायरल वीडियो टीचर की अज्ञानता को भी दर्शाता है. ऐसा लगता है कि उसे ना केवल बिहार बल्कि देश के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास के बारे में भी कोई जानकारी नहीं. बिहारियों को लेकर उसके जहरीले बोल उसके सीमित ज्ञान का परिचायक हैं. ऐसा लगता है उसने कहीं का गुस्सा कहीं और निकाला है.

इतनी अज्ञानी बच्चों को क्या शिक्षा दे?

वैसे बिहार को लेकर या बिहारियों के बारे में ऐसी अज्ञानता और संकीर्ण विचार कोई नई बात नहीं. सामान्यतया खुद को संभ्रांत और मॉडर्न समझने वाले लोग आम बिहारियों को अक्सर कमतर करके आंकते हैं और उन्हें उपेक्षित और लांछित करने की भी मंशा रखते हैं. लेकिन भूल जाते हैं कि ये वही बिहार है जहां देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद, बाबू वीर कुंवर सिंह, जयप्रकाश नारायण, रामधारी सिंह दिनकर, शिवपूजन सहाय, जननायक कर्पूरी ठाकुर, गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण जैसी विभूतियां हुईं. इतना ही नहीं, इतिहास और पुराण में झांककर देखें तो राजा जनक, माता सीता, सम्राट अशोक, चाणक्य, चंद्रगुप्त मौर्य, आर्यभट्ट, गुरुगोविंद सिंह सबका जन्म यहीं हुआ. उस बिहार को देश काटने की बात भला कैसे की जा सकती है?

‘एक बिहारी, सौ पर भारी’ उसे नहीं मालूम!

दीपाली ने जिस जहानाबाद में पोस्टिंग को लेकर बवाल खड़ा किया, क्या उसे ये नहीं पता कि उसी जहानाबाद से बोधगया महज 63 किलोमीटर दूरी पर है, जहां गौतम को बुद्धत्व का ज्ञान मिला. और उसी जहानाबाद से नालंदा महज 61 किलोमीटर की दूरी पर है जहां प्राचीन विश्वविद्यालय में दुनिया के तमाम देशों के स्कॉलर शिक्षा हासिल करने आते थे. बिहार दुनिया के सबसे पहले गणराज्य के तौर पर भी जाना जाता है.

अगर मौजूदा दौर की ही बातें करें तो बिहार सबसे पौष्टिक आहार मखाना देश भर को प्रदान कर रहा है तो मिथिला पेंटिंग और मधुबनी साड़ी को लेकर देश विदेश में अनोखी पहचान बना चुका है. केंद्र और राज्य सरकारों ने इसे प्रमुखता से तरजीह दी है. लेकिन हैरत कि बच्चों को शिक्षा देने वाली दीपाली को उस बिहार के बारे में कोई ज्ञान नहीं, जहां के लोग देश भर में प्रशासन, आईटी, मीडिया, बिजनेस, कला और मनोरंजन के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके हैं और नई पीढ़ी को दिशा दे रहे हैं.

क्या होता है सिविक सेंस?

दीपाली ने बिहार के लोगों में सिविक सेंस पर सवाल उठाए और कहीं की भड़ास कहीं निकाली है. जानते हैं क्या होता है सिविक सेंस? अगर आप भी बिहार के लोगों के संपर्क में हैं तो खुद ही समझ सकते हैं कि उनमें सिविक सेंस है या नहीं. सिविक सेंस का मतलब है- नागरिक बोध. यानी सामाजिक मानदंडों के प्रति जागरूक होना और लोगों का सम्मान करना. दूसरों का ख्याल रखना, कानून का पालन करना और देश का एक जिम्मेदार नागरिक कहलाना.

सिविक सेंस का मतलब होता है दूसरों की निजता और स्वतंत्रता का ख्याल रखना. शिष्टाचार का पालन करना. पब्लिक प्रॉपर्टी की हिफाजत करना. सड़कों पर गंदनी न फैलाना. यातायात नियमों का पालन करना. विविधता की समझ रखना. आदि. आप खुद तय करें कि बिहार के लोगों में इन सबका ज्ञान है या नहीं. या फिर वे व्यवहार में इनका पालन करते हैं या नहीं!

यह भी देखें : केंद्रीय विद्यालय की महिला टीचर दीपाली ने बिहार के बारे ऐसा क्या कहा, जो हो गईं सस्पेंड?