पर्दे पर फिर गरजी कट्टे की आवाज ‘मिर्जापुर द मूवी’ देखने का बना रहे प्लान? जान लीजिए टिकट कटाने के 5 सबसे बड़े कारण

पर्दे पर फिर गरजी कट्टे की आवाज ‘मिर्जापुर द मूवी’ देखने का बना रहे प्लान? जान लीजिए टिकट कटाने के 5 सबसे बड़े कारण

मोबाइल की स्क्रीन से निकलकर 70mm के बड़े पर्दे पर मिर्जापुर के खूनी खेल ने एंट्री की है. मुन्ना-गुड्डू की दुश्मनी से लेकर रवि किशन के नए तेवर तक, जानिए फिल्म देखने की 5 वजहें.

ओटीटी के छोटे से मोबाइल स्क्रीन पर जब कालीन भैया की खामोशी और गुड्डू पंडित का डोला दिखता था, तो लोग सांस रोककर देखते थे. लेकिन जरा सोचिए, जब वही कट्टे की तड़तड़ाहट, वही पूर्वांचल की धूल और वही गालियों से सजी जुगलबंदी आपके सामने 70mm के विशाल परदे और थिएटर्स के गूंजते हुए साउंड सिस्टम पर उतरेगी, तो माहौल क्या होगा?

‘मिर्जापुर द मूवी’ इसी वादे के साथ थिएटर में रिलीज हुई है. अगर आप भी वीकेंड पर अपनी जेब ढीली करके टिकट कटाने की सोच रहे हैं, तो पहले जान लीजिए वे 5 सबसे बड़ी और धाकड़ वजहें, जो इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखना पैसा वसूल बनाती हैं.

1. मुन्ना और गुड्डू

वेब सीरीज के तीसरे सीजन में हर किसी ने जिस खालीपन को सबसे ज्यादा कोसा था, वो था मुन्ना भैया का न होना. गुड्डू अकेला दहाड़ रहा था, लेकिन जब तक सामने मुन्ना न हो, ताली में वो गूंज नहीं आती. इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी यही है कि ये उस पुरानी और क्लासिक दुश्मनी को सीधे बड़े पर्दे पर जिंदा कर देती है. गुड्डू का पागलपन, गुस्सा और मुन्ना की वही बेपरवाह ठसक जब आमने-सामने टकराती है, तो परदे पर सचमुच आग लगती है. दोनों का ये टकराव यही साबित करता है कि मिर्जापुर की असली जान इन दोनों के ईगो की इस टशन में ही बसती है.

2. 70mm स्क्रीन पर रॉ वायलेंस और लार्जर-दैन-लाइफ स्केल

मोबाइल पर हेडफोन लगाकर गोलियों की आवाज सुनना एक बात है और थिएटर की कुर्सियों पर बैठकर बेस के साथ कट्टे का धमाका अपनी छाती पर महसूस करना बिल्कुल अलग अहसास है. मेकर्स ने फिल्म के फॉर्मेट को सिर्फ नाम के लिए 70mm नहीं बनाया, बल्कि इसका एक्शन और विजुअल्स सचमुच बड़े पर्दे के हिसाब से तराशे हैं. गोलियों की बौछार, उड़ती हुई देसी धूल और गाड़ियों के टकराने का वो रॉ और खुरदरा अंदाज सिनेमाघर में ऐसा माहौल बनाता है कि आप सीट से हिले बिना स्क्रीन को घूरते रह जाते हैं.

3. पुराने मुन्ना भैया का नया और लवेबल अंदाज

मुन्ना भैया लौटे जरूर हैं, लेकिन इस बार उनके मिजाज में सिर्फ अंधाधुंध सनक नहीं है. दिव्येंदु के इस किरदार को इस बार एक बहुत ही खूबसूरत ह्यूमन टच दिया गया है. वो बिगड़े हुए नवाबजादे हैं, किसी का भी माथा फोड़ सकते हैं, लेकिन अपने पिता (कालीन भैया) के प्रति उनका सच्चा प्यार और उनका अप्रूवल पाने की बेचैनी दिल को छू जाती है. उनका वही मजाकिया, थोड़ा मासूम और थोड़ा तीखा अंदाज दर्शकों को हंसाता भी है और उनसे एक कनेक्शन भी महसूस कराता है. आप इस मुन्ना से लाख गलतियों के बाद भी नफरत नहीं कर पाएंगे.

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4. बिना भाभी की नई परत और लव स्टोरी वाला दिलचस्प ट्विस्ट

सीरीज में अब तक बीना त्रिपाठी (रसिका दुगल) को ज्यादातर एक ऐसी लाचार या घरेलू औरत के तौर पर देखा गया जो हालात और पति की कमजोरी के चलते सिर्फ समझौते करती दिखी या बाहर अपना सुख ढूंढती नजर आई. लेकिन इस फिल्म में राइटर्स ने बीना को एक ठोस वजूद और मजबूत बैकस्टोरी दी है. इस बार उनके पास अपने इरादे हैं, उनकी अपनी एक अलग दुनिया है और उनके हिस्से एक ऐसा इमोशनल लव स्टोरी वाला ट्विस्ट आता है जो उनके किरदार को महज एक कठपुतली के दायरे से बाहर निकालकर एक ताकतवर खिलाड़ी की तरह पेश करता है. बीना भाभी का ये नया अवतार दर्शकों को सबसे ज्यादा चौंकाता है.

5. रवि किशन का भौकाल

इस पूरी फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज पैकेज बनकर उभरे हैं रवि किशन. रवि किशन ने जिस विलेन का चोला पहना है, वो कोई आम गली-मोहल्ले का गुंडा नहीं है. वो एक ऐसा विलेन है जिसके अपने कायदे और उसूल हैं. सबसे मजेदार बात ये है कि वह अपराध की दुनिया में रहकर भी महिलाओं की बेइंतहा इज्जत करता है. जैसे साउथ सिनेमा में प्रकाश राज खूंखार होने के साथ-साथ अपनी कॉमिक टाइमिंग और बॉडी लैंग्वेज से महफिल लूट लेते हैं, ठीक वैसा ही कमाल रवि किशन ने यहां कर दिखाया है. उनका किरदार ऐसा है जिससे आपको डर भी लगेगा, उनके डायलॉग्स पर हंसी भी छूटेगी और उनके उसूलों को देखकर आपके दिल में उनके लिए एक अनचाही इज्जत भी पैदा हो जाएगी.

सोनाली नाईक
सोनाली नाईक

सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.

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