India Theatre Crisis: चीन में भारत से 4 गुना ज्यादा थिएटर्स, US भी आगे, यहां बंद हो गए 20 हजार हॉल, देश का सिनेमा कैसे बढ़ेगा आगे?

India Theatre Crisis: चीन में भारत से 4 गुना ज्यादा थिएटर्स, US भी आगे, यहां बंद हो गए 20 हजार हॉल, देश का सिनेमा कैसे बढ़ेगा आगे?

India Theatre Crisis: भारत में सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर तेजी से बंद हो रहे हैं. इसका असर सिर्फ फिल्म देखने की आदत पर नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस की कमाई पर भी पड़ रहा है. चीन और अमेरिका के मुकाबले भारत में स्क्रीन की संख्या काफी कम है. ऐसे में सरकार नए पहल कर रही है, लेकिन सवाल है कि क्या नए थिएटर खोलने की सरकारी योजना भारतीय सिनेमा की तस्वीर बदल पाएगी?

India Theatre Crisis: अगर किसी शख्स को अपने खाली समय का अच्छा इस्तेमाल करना होता है, तो ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं, जो कि फिल्में देखना पसंद करते हैं. हालांकि, आजकल ओटीटी का दौर है, तो काफी सारी ऐसे लोग हैं, जो बाहर जाकर सिनेमाघरों में फिल्में देखने से ज्यादा घर में ही उनका मजा लेना पसंद करते हैं. लेकिन, एक वक्त था जब जब सिनेमाघरों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगती थी, लोग फिल्मों के रिलीज के लिए शुक्रवार का इंतजार किया करते थे. लेकिन, अब ये तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है. इसकी कहीं न कहीं एक वजह घटते हुए सिनेमाघर भी हैं. मल्टीप्लेक्स कल्चर, ओटीटी प्लेटफॉर्म, महंगे टिकट, बढ़ती ऑपरेटिंग लागत और घटती दर्शक संख्या ने देश के हजारों सिनेमाघरों पर ताले लगवा दिए.

बॉलीवुड हो या किसी और भाषा की कई ऐसी भी फिल्म हैं, जो कि देश से ज्यादा बाहरी देशों जैसे चीन, अमेरिका में अच्छी कमाई कर लेती हैं. कई फिल्मी सितारों ने भी देशभर में कम सिनेमाघरों का मुद्दा उठाते हुए बॉलीवुड के नुकसान की बात कही है. डेटा के जरिए इस बात को समझा जाए, तो रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 के दशक में भारत में करीब 25 हजार सिंगल स्क्रीन थिएटर थे, लेकिन अब इनमें से 20 हजार से ज्यादा बंद हो चुके हैं और केवल लगभग 5,500 ही किसी तरह अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. इसी बीच केंद्र सरकार ने भारतीय सिनेमा को नई दिशा देने की कोशिश शुरू कर दी है. सरकार ने देशभर में सिनेमाघर खोलने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक समान (Uniform) सिनेमा नियम राज्यों को भेजे हैं.

सरकार की पहल से पहले समझ लेते हैं कि आखिर ये पूरा मामला है क्या-

  1. थिएटर में फिल्म देखने वालों की संख्या- भारत की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है, जिनमें से एक सर्वे की बात करें, तो उसमें बताया गया है कि तकरीबन 15 करोड़ से ज्यादा लोगों को सिनेमाघरों में जाकर फिल्में देखना पसंद है. आंकड़ें की तुलना इस हिसाब से की जा सकती है कि कोरोना महामारी के बाद से अच्छी बढ़ोतरी को दिखाती है.
  2. भारत में कितने सिनेमाघर हैं- जुलाई 2025 तक उपलब्ध इंडस्ट्री डेटा के मुताबिक, भारत में करीब 17,698 सिनेमाघर हैं. इनमें मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन दोनों शामिल हैं. पिछले 30 साल में करीब 20,000 सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर बंद हो चुके हैं.
  3. भारत की फिल्मों की विदेशों में कमाई- ‘दंगल’ ने चीन में ऐतिहासिक कमाई की और आज भी विदेशों में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल है. RRR को जापान, अमेरिका और कई अन्य देशों में शानदार रिस्पॉन्स मिला.

भारत से ज्यादा चीन में कमाई

कमाल की बात ये है कि अगर किसी एक फिल्म को एग्जांपल के तौर पर लेते हैं, तो एक वीडियो सोशल मीडिया पर सर्फेस हो रही थी. इस वीडियो में चीन के कुछ लोगों से आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ के बारे में पूछा गया तो उन्हें इस फिल्म के बारे में नहीं पता था. लेकिन, हैरान करने वाली बात ये है कि चीन में फिल्म ने काफी कमाल की कमाई की थी. इसकी वजह ये है कि चीन में थिएटर्स की संख्या ज्यादा है, जिससे फिल्मों की कमाई पर काफी असर पड़ता है. जानकारी के मुताबिक, चीन में 80 हजार से ज्यादा थिएटर्स हैं. इसी के हिसाब से अगर वहां की फिल्मों की कमाई की तुलना की जाए, तो भारत की फिल्मों से हमेशा ज्यादा ही होगी.

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इंडियन फिल्मों की कमाई

आमिर-शाहरुख का भी है बयान

बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ने भी इस मुद्दे पर बात की थी. उन्होंने कहा, “भारत में सिनेमाघरों की सबसे बड़ी समस्या उनकी कम संख्या है.” उनके मुताबिक, भारत में करीब 10 हजार स्क्रीन हैं, जबकि अमेरिका में लगभग 40 हजार और चीन में करीब 80 हजार स्क्रीन मौजूद हैं. उनका मानना है कि यही वजह है कि भारत में थिएटर कारोबार अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पा रहा है. शाहरुख खान ने कहा था, “आज के समय में फिल्में देखना धीरे-धीरे सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित होता जा रहा है, क्योंकि थिएटर और टिकट दोनों महंगे हो गए हैं.” उनका मानना है कि छोटे शहरों और कस्बों में कम लागत वाले और सस्ते सिनेमाघर बनाए जाने चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग कम कीमत में बड़े पर्दे पर फिल्में देख सकें.

2% आबादी ही थिएटर में देखती है

इस मुद्दे पर आमिर खान ने भी एक अहम बात कही. उन्होंने बताया कि भारत में मौजूद करीब 10 हजार स्क्रीन में से लगभग आधी साउथ इंडिया में हैं और बाकी आधी पूरे देश के बाकी हिस्सों में. इसका मतलब है कि किसी हिंदी फिल्म को आमतौर पर करीब 5 हजार स्क्रीन ही मिलती हैं. एक्टर ने ये भी कहा कि भारत जैसे सिनेमाप्रेमी देश में भी सबसे बड़ी हिट फिल्में केवल करीब 2% आबादी ही थिएटर में देखती है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बाकी 98% लोग फिल्में कहां देख रहे हैं.

25 हजार से घट 6 हजार तक पहुंचा आंकड़ा

फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के पुराने आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 10,167 सिंगल स्क्रीन थिएटर थे. सबसे ज्यादा सिंगल स्क्रीन आंध्र प्रदेश (2,809) में हैं. इसके बाद तमिलनाडु (1,546), केरल (1,015), उत्तर प्रदेश (970), कर्नाटक (950), महाराष्ट्र (504) और तेलंगाना (485) का स्थान है. हालांकि, पूर्व सिनेमैटोग्राफर हेमंत चतुर्वेदी की रिसर्च के मुताबिक, 1990 के दशक में भारत में करीब 25,000 सिंगल स्क्रीन थिएटर हुआ करते थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर करीब 6,000 या उससे भी कम रह गई है.

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भारत में थिएटर्स का हाल

चीन-भारत-अमेरिका की कमाई की तुलना

फिल्मों की कमाई से कंपेयर करते हुए समझाएं, तो साल 2025 में भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म, धुरंधर थी, जिसने 1000 करोड़ रुपये की कमाई की थी. वहीं चीन में पिछले साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म ने झा 2 थी, जिसने बॉक्स ऑफिस पर 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की. वहीं अमेरिका की बात करें, तो ज़ूटोपिया 2 ने शानदार कमाई की थी, जो कि इंडियन रुपये के हिसाब से लगभग 4 हजार करोड़ रुपये हैं. सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों के कलेक्शन में ये बड़ा अंतर साफ तौर पर सिनेमाघरों की कमी दिखाता है.

क्यों आ रही है सिनेमाघरों में कमी-

  • OTT और मल्टीप्लेक्स बढ़ने से लोग अब हर फिल्म थिएटर में नहीं देखते.
  • सोशल मीडिया रिव्यू रिलीज के पहले दिन ही फिल्म की किस्मत तय कर देते हैं.
  • बढ़ते खर्च (बिजली, टैक्स, प्रोजेक्टर, साउंड सिस्टम) की वजह से सिंगल स्क्रीन थिएटर चलाना मुश्किल होता जा रहा है.
  • अच्छे कंटेंट की कमी के कारण दर्शक सिर्फ चुनिंदा फिल्मों के लिए ही सिनेमाघर पहुंच रहे हैं.

चीन ने 9 साल में 9 गुना बढ़ाईं स्क्रीन

चीन ने पिछले डेढ़-दो दशक में अपने थिएटर नेटवर्क और टिकट प्राइस, दोनों पर तेजी से काम किया है और यही उसकी बॉक्स ऑफिस सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी. 2009 में चीन में सिर्फ 6,323 सिनेमाघर स्क्रीन थीं, जबकि भारत में करीब 12 हजार स्क्रीन थीं. लेकिन 2018 तक चीन ने यह संख्या बढ़ाकर 55,623 स्क्रीन कर दी, जिससे देश के ज्यादातर लोगों के लिए थिएटर तक पहुंच आसान हो गई. वहीं भारत में ये संख्या कम होती चली गई है. दूसरी ओर अगर टिकट के दामों की बात करें, तो भारत, चीन और अमेरिका की प्राइसिंग सिस्टम में ज्यादा अंतर नहीं है. उल्टा भारत के ही सिनेमाघर महंगे लगने लगेंगे.

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कहां, कितने थिएटर्स?

सरकार क्या उठा रही है कदम

केंद्र सरकार देशभर में सिनेमाघर खोलने के नियम एक जैसे करना चाहती है, ताकि नए थिएटर बनाने की प्रक्रिया आसान और तेज हो सके. अभी हर राज्य के अलग-अलग नियम होने की वजह से मंजूरी मिलने में काफी समय लगता है. इसी को खत्म करने के लिए राज्यों को मॉडल सिनेमा रेगुलेशन भेजा गया है. साथ ही, मशहूर गीतकार प्रसून जोशी की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है, जो भारतीय फिल्म उद्योग के विकास के लिए रोडमैप तैयार करेगी. सरकार का लक्ष्य छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी ज्यादा सिनेमाघर खोलना और फिल्म इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब पुराने सिनेमाघर ही बंद हो रहे हैं, तब नए थिएटर खोलने से क्या वाकई तस्वीर बदलेगी?

अंकिता
अंकिता

शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है.  पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.

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