कोटा में साइंटिस्ट के बेटे ने किया सुसाइड, ट्रेन के आगे कूदा; 2 दिन बाद था JEE मेंस का एग्जाम

कानपुर के एग्रीकल्चर साइंटिस्ट के बेटे ने कोटा में ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी. मृतक युवक का दो दिन बाद लखनऊ में JEE मेंस का एग्जाम था. बेटे की मौत से एग्रीकल्चर साइंटिस्ट सदमे में हैं. उन्होंने कहा कि अभी कल ही उससे बात हुई थी. पता नहीं कैसे उसने ये कदम उठा लिया.
कानपुर (यूपी) के एग्रीकल्चर साइंटिस्ट के बेटे ने राजस्थान के कोटा में ट्रेन के आगे लेटकर जान दे दी. 2 दिन बाद लखनऊ में उसकी JEE मेंस की परीक्षा थी, जिसके लिए पिता सोमवार को उसे लेने आने वाले थे, लेकिन उनको क्या पता था कि बेटे के शव को ले जाना पड़ेगा. इससे पहले ही उनके पास बेटे की मौत की खबर पहुंच गई.
एग्रीकल्चर साइंटिस्ट दीपक मिश्रा ने कहा कि हमने देखा कि बच्चों में बहुत स्ट्रेस है. वे अपनी बात नहीं बता पाते. मैंने जब उसे बताया कि मैं कोटा आ रहा हूं लेने तो शायद उसको यह सब करना ज्यादा आसान लगा. उज्जवल (18) पिछले 2 साल से कोटा में JEE की तैयारी कर रहा था.
वहीं जीआरपी थाना एसआई धर्म सिंह ने बताया कि बीते रविवार शाम राजीव गांधी नगर इलाके में मुंबई-दिल्ली रेल लाइन पर यह घटना हुई. छात्र ट्रेन आने से पहले पटरी पर लेट गया था. आईडी और मोबाइल से उसकी पहचान की गई.
2 साल से हॉस्टल में रह रहा था छात्र
एग्रीकल्चर साइंटिस्ट पिता दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि बेटा उज्जवल पिछले 2 साल से राजीव गांधी नगर के सी होम हॉस्टल में रहकर निजी कोचिंग से JEE की तैयारी कर रहा था. 29 मार्च को उसका पेपर खत्म हुआ था. मैं उसका सामान शिफ्ट करवाने के लिए ही आ रहा था. दो अप्रैल को उसका लखनऊ में JEE का पेपर था, वह लखनऊ के लिए निकलने वाला था.
इससे पहले ही रविवार रात को जीआरपी पुलिस थाने से सूचना मिली कि आपके बेटे के साथ हादसा हो गया है. लास्ट बार कल 11:00 बजे बात हुई थी. मैंने उसको कहा था कि लखनऊ में एग्जाम है तो आज ही तुम बस से चले जाओ. उसका आज बस से टिकट था.
बेटे का सामान शिफ्ट करवाने आने वाले थे पिता
दीपक कुमार मिश्रा ने कहा कि मैंने सोचा था किन इस बार उसका जो भी सामान है, उसे शिफ्ट करवाकर ही वापस जाएंगे. हम हादसे के बाद उसके रूम पर भी गए थे, लेकिन सुसाइड नोट या ऐसा कुछ भी नहीं मिला. फिलहाल हम लोग लखनऊ में रह रहे हैं. घर हमारा कानपुर में है. मेरे दो बच्चे हैं, उज्जवल से एक छोटा और बेटा है.
दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि उज्जवल दो साल तक कोटा में बढ़िया से रहा. शायद कल ही उसका अंतिम दिन था. दो अप्रैल को JEE मेंस का उसका पेपर है, उसने एडमिट कार्ड भी निकलवा लिया था. उसका एडमिट कार्ड कमरे से मिला है.