Drishyam 3: क्लाइमैक्स शानदार, लेकिन सफर में हिचकोले! इन 5 गलतियों की वजह से ‘दृश्यम 2’ का रिकॉर्ड तोड़ने से चूक जाएगी ‘दृश्यम 3’?

Drishyam 3: क्लाइमैक्स शानदार, लेकिन सफर में हिचकोले! इन 5 गलतियों की वजह से ‘दृश्यम 2’ का रिकॉर्ड तोड़ने से चूक जाएगी ‘दृश्यम 3’?

Drishyam: The Conclusion: 'दृश्यम 3' में विजय सलगांवकर की चालाकी फिर दिखी, लेकिन स्क्रीनप्ले और रफ्तार से जुड़ी इन 5 बारीकियों पर काम होता, तो ये फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी थ्रिलर बन जाती.

Drishyam: The Conclusion: भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सस्पेंस, फैमिली ड्रामा और माइंड गेम्स की बात होगी, तो विजय सलगांवकर का नाम हमेशा सबसे ऊपर लिखा जाएगा. थिएटर में दस्तक दे चुकी ‘दृश्यम 3’ को लेकर दर्शकों और क्रिटिक्स की शुरुआती प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी हैं. इसमें कोई दोराय नहीं है कि फिल्म का क्लाइमैक्स एक बार फिर आपको दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर देता है और थिएटर तालियों से गूंज उठता है.

लेकिन इस फ्रेंचाइजी को देखा जाए, तो ये कहना गलत नहीं होगा कि यह फिल्म एक ‘ऑल-टाइम हिस्टॉरिक क्लासिक’ बनने से बस एक कदम दूर रह गई. अगर मेकर्स ने फिल्म की इन 5 कमजोर कड़ियों पर थोड़ी और मेहनत की होती, तो ये फिल्म थ्रिलर जॉनर का ऐसा मील का पत्थर बनती जिसे दशकों तक कोई हिला नहीं पाता.

1. पहले हाफ की सुस्त रफ्तार

शुरुआत से ही दर्शकों के दिलों में एक अनजाना डर और बेचैनी पैदा कर देना ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ताकत रही है. लेकिन ‘दृश्यम 3’ में ये ग्रिप थोड़ी ढीली नजर आती है. फिल्म का पहला हाफ कहानी को दोबारा एस्टाब्लिश करने और परिवार के उसी पुराने खौफ को बार-बार दोहराने में काफी वक्त ले लेता है. स्क्रीनप्ले में जो चुस्ती पहले दोनों भागों में थी, वह इंटरवल से पहले गायब दिखती है. अगर फर्स्ट हाफ की एडिटिंग थोड़ी और क्रिस्प होती, तो सीट की पेटी बांधे रखने वाला तनाव पहले ही मिनट से दर्शकों को बांध लेता.

2. पुलिस इन्वेस्टिगेशन में नयेपन की कमी

विजय सलगांवकर हमेशा पुलिस प्रशासन से दो कदम आगे सोचता है, और यही इस फ्रेंचाइजी का असली मजा है. लेकिन इस बार पुलिस और जांच एजेंसियों के तौर-तरीके थोड़े घिसे-पिटे और प्रेडिक्टेबल लगते हैं. वही गवाहों को डराना-धमकाना, वही पुराने फोन रिकॉर्ड्स और कॉल डिटेल्स की पड़ताल. अगर जांच एजेंसियों की तरफ से कोई अत्याधुनिक तकनीक या एकदम चौंकाने वाला नया पैंतरा सामने आता, तो विजय और सिस्टम के बीच की ये ‘कैट एंड माउस’ जंग कई गुना ज्यादा रोमांचक हो सकती थी.

3. सपोर्टिंग किरदारों का सीमित दायरा

पहले और दूसरे भाग में नंदिनी (पत्नी) और बेटियों का मानसिक तनाव, उनकी अंदरूनी घबराहट कहानी का दिल हुआ करती थी. लेकिन तीसरे भाग में परिवार के किरदारों को काफी हद तक सिर्फ बैकग्राउंड में सहमने और आंसू बहाने तक सीमित कर दिया गया है. अगर परिवार का कोई सदस्य अपनी मर्जी से कोई स्वतंत्र कदम उठाता या डर के मारे कोई ऐसा क्लू छोड़ देता जिससे विजय की योजना खतरे में पड़ती, तो फिल्म में रियलिज्म और ड्रामा का स्तर कहीं ज्यादा गहरा हो जाता.

Drishyam 3 Mistakes

दृश्यम 3 रिलीज हो गई

4. ‘दृश्यम 2’ के नोस्टैल्जिया पर बहुत ज्यादा निर्भरता

तीसरे भाग में मेकर्स कई जगहों पर पिछली कड़ी के फॉर्मूले और नोस्टैल्जिया पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करते दिखे हैं. चूंकि दर्शक अब विजय सलगांवकर की सोचने की शैली और उसकी प्लानिंग के पैटर्न को काफी हद तक समझने लगे हैं, इसलिए कुछ ट्विस्ट्स पहले से भांपे जा सकते हैं. अगर कहानी को पुराने टेम्पलेट से पूरी तरह बाहर निकालकर कुछ बिल्कुल अनपेक्षित सब-प्लॉट्स जोड़े जाते, तो शॉक वैल्यू कई गुना ज्यादा असरदार होती.

5. पूरे थ्रिल का बोझ सिर्फ आखिरी 20 मिनट पर छोड़ना

पूरी फिल्म का सबसे जोरदार और झकझोर देने वाला हिस्सा इसका आखिरी 25 से 30 मिनट का हिस्सा है. बेशक, क्लाइमैक्स मास्टरक्लास है, लेकिन एक संपूर्ण थ्रिलर वही मानी जाती है जहां कहानी हर 15 मिनट में दर्शक को एक नया झटका दे. फिल्म के बीच के हिस्से को थोड़ा सपाट छोड़कर सारा दारोमदार सिर्फ अंत के ट्विस्ट पर डाल देना थोड़ा अखरता है. अगर ये सस्पेंस और पेसिंग पूरी फिल्म में समान रूप से बिखरी होती, तो यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ के क्लब में एक नया इतिहास रच सकती थी.

‘दृश्यम 3’ आज भी बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों की पहली पसंद बनी हुई है और विजय सलगांवकर की चालाकी लोगों को थिएटर्स खींच रही है, लेकिन अगर इन पांच पहलुओं को थोड़ा और तराशा गया होता, तो ये फिल्म सिनेमाई इतिहास की सबसे शानदार थ्रिलर बन जाती.

सोनाली नाईक
सोनाली नाईक

सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.

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