बंगाल टीचर्स स्कैम: भ्रष्टाचार के दलदल में क्या डूब जाएंगी ममता या कर लेंगी डैमेज कंट्रोल?

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 25,753 शिक्षकों की अवैध नियुक्ति को रद्द कर दिया है. इससे ममता बनर्जी सरकार पर भारी राजनीतिक दबाव है. विपक्षी दल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. यह 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा झटका है. त्रिपुरा के उदाहरण का हवाला देते हुए विश्लेषक चुनावों पर इस घोटाले के प्रभाव पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन फैसले के बाद ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल में जुट गई हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के 2016 के स्कूल सेवा आयोग (SSC) द्वारा 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की अवैध भर्ती को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है. इससे राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे साजिश करार दिया है.
इसके साथ ही ममता बनर्जी इस फैसले के बाद डैमेज कंट्रोल में जुट गई हैं और इस फैसले से जिन शिक्षकों की नौकरी जाएगी, सात अप्रैल को उनकी बैठक बुलाई हैं, लेकिन इसे लेकर बीजेपी, कांग्रेस और माकपा ने सीएम पर हमला बोलना शुरू कर दिया है. भाजपा ने ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग की है.
गौरतलब है अगले साल 2026 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है. चुनाव में निश्चित रूप से अब शिक्षकों की नौकरी का जाना और भ्रष्टाचार फिर से एक अहम मुद्दा होने वाला है.
मंत्री सहित टीएमसी के कई नेता हुए थे अरेस्ट
बता दें कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 2016 के कथित भर्ती घोटाले की 2022 में सीबीआई जांच का आदेश दिया था, इस जांच के दौरान ममता बनर्जी सरकार के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी, पूर्व मंत्री परेश अधिकारी, पूर्व एसएससी अधिकारी शांतिप्रसाद सिन्हा और सुबीरेश भट्टाचार्य, पूर्व टीएमसी विधायक माणिक भट्टाचार्य सहित कई टीएमसी नेताओं के नाम सामने आये थे. सीबीआई ने कईयों को गिरफ्तार भी किया था. कईयों को जमानत मिल गई है, लेकिन पार्थ चटर्जी अभी भी जमानत की फरियाद लगा रहे हैं.
ऐसे में बंगाल की सियासत में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या टीएमसी नेताओं के भ्रष्टाचार में अगले चुनाव में ममता बनर्जी की सरकार डूब जाएगी या फिर पहले की तरह ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल कर लेंगी और चुनाव में जीत का अपना सिलसिला जारी रखेंगी.
घोटाले के बाद गिर गई थी त्रिपुरा में लेफ्ट की सरकार
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पार्थ मुखोपाध्याय त्रिपुरा के माणिक सरकार के दौरान शिक्षक भर्ती घोटाले का उदाहरण देते हैं. वह बताते हैं कि त्रिपुरा में मुख्यमंत्री माणिक सरकार के नेतृत्व में सीपीएम की सरकार थी. तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने 2010 और 2013 में दो चरणों में स्कूली शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर 10,323 लोगों को शिक्षक नियुक्त किया था, लेकिन नियुक्ति के संबंध में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए त्रिपुरा उच्च न्यायालय में मामला दायर किया गया.
उन्होंने कहा किअगरतला उच्च न्यायालय ने पूरे पैनल को रद्द कर दिया. माणिक की सरकार उस आदेश को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय गयी, लेकिन 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने भी पूरे पैनल को रद्द करने के आदेश को बरकरार रखा. गले वर्ष त्रिपुरा विधानसभा चुनाव हुए और उस चुनाव में माणिक सरकार की सत्ता चली गई.
अगले साल होने हैं विधानसभा चुनाव, क्या पड़ेगा प्रभाव?
उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की तरह की गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में करीब 26,000 शिक्षकों की नौकरियां रद्द कर दी. एक साल बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की पीठ ने अप्रैल 2024 में कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश को बरकरार रखा.
बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में त्रिपुरा की घटना से टीएमसी के नेता चिंतित हैं, हालांकि इस पर टीएमसी के कुछ नेताओं में मतभेद हैं. कुछ का कहना है कि इसका चुनाव पर प्रभाव पड़ेगा, जबकि पिछले उदाहरणों को बताकर टीएमसी के कुछ नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल कर लेंगी.
इसका कारण यह है कि पिछले वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 26,000 शिक्षकों की नौकरियां रद्द कर दी थीं. ममता बनर्जी ने स्वयं उस आदेश के बाद सर्वोच्च न्यायालय जाने की घोषणा की थी, लेकिन चुनाव में इसका इम्पैक्ट नहीं हुआ. इसके विपरीत, 2019 की तुलना में बंगाल में तृणमूल की सीटों में वृद्धि हुई और भाजपा की सीटों की संख्या घट गई.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सियासी घमासान
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद विपक्षी पार्टियां मैदान में उतर गई हैं. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने टीएमसी के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है. मजूमदार ने कहा कि शिक्षक भर्ती में इस बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की पूरी जिम्मेदारी राज्य की विफल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की है. उन्होंने ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग की.
सीपीआई(एम) के राज्य समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने कहा, “राज्य सरकार को नौकरी देने वाले पैसे पाने वालों से वास्तविक उम्मीदवारों की सूची को अलग करने के लिए एक साल का समय मिला था, लेकिन राज्य सरकार वह सूची बनाने में विफल रही और इस कारण, जो वास्तविक थे, उनकी भी नौकरी चली गई.