उत्साह-जुनून में क्या फर्क है? आदियोगी प्रतिमा के तीन आयाम… सद्गुरु ने दिए ये जवाब

उत्साह-जुनून में क्या फर्क है? आदियोगी प्रतिमा के तीन आयाम… सद्गुरु ने दिए ये जवाब

Duologue With Barun Das: TV9 नेटवर्क के MD-CEO बरुण दास ने सद्गुरु जग्गी वासुदेव से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने जीवन के मूल्यों को समझाया. सद्गुरु ने बताया कि इंसान के जीवन में उत्साह होना कितना जरूरी है. इसके बिना आप कोई काम नहीं कर सकते.

देश के हर कोने में महाशिवरात्रि धूमधाम से मनाई गई. तमिलनाडु के कोयंबटूर में ईशा योग सेंटर मौजूद है. यहां पर महाशिवरात्रि का अलग ही रंग देखने को मिलता है. देश और दुनिया से लाखों लोग इस दिन यहां पर मौजूद रहते हैं. इस समारोह से कुछ दिन पहले TV9 नेटवर्क के एमडी/सीईओ बरुण दास ने सद्गुरु जग्गी वासुदेव से मुलाकात की और उनसे बातचीत भी की.

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने दैनिक जीवन में उत्साह के महत्व को बताया. उन्होंने कहा कि उत्साह से भरा मन जीवन में आने वाली किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सही नजरिया देता है.‘बरुण दास के साथ संवाद’ (Duologue with Barun Das) के नए एपिसोड में सद्गुरु ने आदियोगी मूर्ति के कई आयामों का अर्थ समझाया. उन्होंने कहा कि आदियोगी मूर्तियों के अभिन्न अंग हैं, जैसे उत्साह, स्थिरता और नशा (Intoxication). 112 फीट ऊंची आदियोगी प्रतिमा भगवान शिव को पहले योगी के रूप में संदर्भित करती है.

उत्साह-जुनून में क्या फर्क होता है?

सद्गुरु ने कहा कि आप कुछ भी करना चाहते हैं, इसके लिए आपके पास उत्साह होना चाहिए. नहीं तो आप वो काम कैसे कर पाओगे? सद्गुरु ने बताया कि उत्साह और जुनून कैसे अलग-अलग हैं. उन्होंने कहा, ‘जब आप एक बच्चे होते हैं, तो आप किसी विशेष चीज के लिए जुनूनी नहीं होते हैं. लेकिन आप उसके लिए उत्साहिक जरूर होंगे. जुनून का मतलब है कि यह पहले से ही किसी चीज से जुड़ा हुआ है. लेकिन उत्साह किसी चीज से बंधा हुआ नहीं है. यह सिर्फ जीवन है.

उत्साही होना जरूरी- सद्गुरु

उन्होंने कहा कि उत्साह तब होता है जब आप उत्साही होते हैं. इसलिए नहीं कि आप कुछ पसंद करते हैं. अगर आप उत्साही हैं तो आप कुछ भी ठान लें वो आप कर सकते हैं. यदि आप जुनूनी हैं तो आप केवल एक चीज कर सकते हैं. वो जिसके प्रति आपका जुनून है. अगर कोई आपसे कुछ और करने के लिए कहता है तो आप नहीं कर सकते. यह (जुनून) जीवन को पंगु बनाने का एक तरीका है.

जीवन में शांति और उत्साह का मतलब

स्थिरता के बारे में बताते हुए सद्गुरु ने कहा कि यदि जीवन में शांति नहीं है तो उत्साह एक बाधा बन जाएगा और फिर समय के साथ अस्थिरता जैसी स्थितियां पैदा हो जाएंगी. सद्गुरु ने कहा कि अगर उत्साह के साथ स्थिरता नहीं है, तो चीजें अस्थिर हो जाएंगी. नशे पर सद्गुरु ने कहा कि कोई व्यक्ति इसके बिना पूरा जीवन नहीं बिता सकता है. उनके कहने का अर्थ साफ है कि नशा सिर्फ मादक पदार्थों का ही नहीं होता. नशे का मतलब है पूरी तरह से लीन. चाहे आप किताबों पर लीन हो जाएं या आप आध्यात्म की ओर खिंच जाएं.

क्या है नशे का सही मतलब?

उन्होंने कहा, ‘फिलहाल आप नशे को सिर्फ शराब या ड्रग या कुछ और ही समझते हैं. मुझे इससे कोई नैतिक समस्या नहीं है लेकिन इसके साथ सबसे बड़ी प्रॉब्लम ये है कि यह आपके सोचने-समझने की क्षमता को क्षीण कर देती है. आप इसके बाद जागरुक नहीं रह सकते. उन्होंने कहा कि पूरी तरह से नशे में होना और अत्यधिक सतर्क रहना ही लक्ष्य है.

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिव के विराट रूप , अध्यात्म और दर्शन आदि को लेकर टीवी 9 भारत वर्ष के एमडी और सीईओ बरुण दास ने योग के प्रचार-प्रसार के लिए प्रसिद्ध सदगुरु जग्गी वासुदेव जी से Duologue कार्यक्रम में बात की. इसे आप यहां देख सकते हैं.